मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2037 में बुध का गोचर

2037 में बुध 17 बार राशि बदलता है: 1 फ़रवरी को मकर, 20 फ़रवरी को कुम्भ, 8 मार्च को मीन, 26 मार्च को मेष …। वक्री: 5 अप्रैल, 8 अगस्त, 28 नवंबर से।

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

2037 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु27 नवंबर, सुबह 4:05 2036 → 1 फ़रवरी, शाम 4:45 2037· लगभग 2 महीने
  2. मकर1 फ़रवरी, शाम 4:45 2037 → 20 फ़रवरी, दोपहर 12:49 2037· 19 दिन
  3. कुम्भ20 फ़रवरी, दोपहर 12:49 2037 → 8 मार्च, शाम 5:37 2037· 16 दिन
  4. मीन8 मार्च, शाम 5:37 2037 → 26 मार्च, सुबह 4:19 2037· 17 दिन
  5. मेष26 मार्च, सुबह 4:19 2037 → 16 अप्रैल, शाम 4:10 2037· 21 दिन
  6. मीन(वक्री गति से प्रवेश)16 अप्रैल, शाम 4:10 2037 → 10 मई, दोपहर 1:52 2037· 24 दिन
  7. मेष10 मई, दोपहर 1:52 2037 → 1 जून, शाम 7:03 2037· 22 दिन
  8. वृषभ1 जून, शाम 7:03 2037 → 16 जून, सुबह 10:43 2037· 15 दिन
  9. मिथुन16 जून, सुबह 10:43 2037 → 30 जून, रात 8:14 2037· 14 दिन
  10. कर्क30 जून, रात 8:14 2037 → 20 जुलाई, सुबह 7:51 2037· 19 दिन
  11. सिंह20 जुलाई, सुबह 7:51 2037 → 29 अगस्त, रात 9:26 2037· 41 दिन
  12. कर्क(वक्री गति से प्रवेश)29 अगस्त, रात 9:26 2037 → 2 सितंबर, शाम 7:59 2037· 4 दिन
  13. सिंह2 सितंबर, शाम 7:59 2037 → 24 सितंबर, शाम 6:39 2037· 22 दिन
  14. कन्या24 सितंबर, शाम 6:39 2037 → 11 अक्टूबर, शाम 6:46 2037· 17 दिन
  15. तुला11 अक्टूबर, शाम 6:46 2037 → 31 अक्टूबर, रात 1:02 2037· 19 दिन
  16. वृश्चिक31 अक्टूबर, रात 1:02 2037 → 25 नवंबर, दोपहर 1:36 2037· 26 दिन
  17. धनु25 नवंबर, दोपहर 1:36 2037 → 2 दिसंबर, रात 12:33 2037· 6 दिन
  18. वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)2 दिसंबर, रात 12:33 2037 → 5 जनवरी, सुबह 10:12 2038· 34 दिन

तारीखवार

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

जनवरी 2037

  • 3 जनवरीरात 10:57

    बुध धनु 0°23′ पर मार्गी

फ़रवरी 2037

  • 1 फ़रवरीशाम 4:45

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 11 फ़रवरीरात 12:36

    बुध अस्त (17 मार्च तक)†

  • 20 फ़रवरीदोपहर 12:49

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2037

  • 8 मार्चशाम 5:37

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चदोपहर 2:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मार्चसुबह 4:19

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 2037

  • 5 अप्रैलरात 1:05

    बुध मेष 5°44′ पर वक्री

  • 7 अप्रैलसुबह 8:12

    बुध अस्त (22 अप्रैल तक)†

  • 16 अप्रैलशाम 4:10

    बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 22 अप्रैलसुबह 11:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अप्रैलशाम 4:56

    बुध मीन 24°43′ पर मार्गी

मई 2037

  • 10 मईदोपहर 1:52

    बुध का मेष में प्रवेश

जून 2037

  • 1 जूनशाम 7:03

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 5 जूनसुबह 6:59

    बुध अस्त (29 जून तक)†

  • 16 जूनसुबह 10:43

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 29 जूनशाम 5:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जूनरात 8:14

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2037

  • 20 जुलाईसुबह 7:51

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2037

  • 8 अगस्तसुबह 6:45

    बुध सिंह 12°37′ पर वक्री

  • 15 अगस्तसुबह 7:31

    बुध अस्त (29 अगस्त तक)†

  • 29 अगस्तदोपहर 12:42

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अगस्तरात 9:26

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 31 अगस्तरात 9:07

    बुध कर्क 29°44′ पर मार्गी

सितंबर 2037

  • 2 सितंबरशाम 7:59

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 3:19

    बुध अस्त (26 अक्टूबर तक)†

  • 24 सितंबरशाम 6:39

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2037

  • 11 अक्टूबरशाम 6:46

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 26 अक्टूबररात 12:42

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 अक्टूबररात 1:02

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2037

  • 25 नवंबरदोपहर 1:36

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 28 नवंबररात 10:00

    बुध धनु 0°50′ पर वक्री

दिसंबर 2037

  • 2 दिसंबररात 12:33

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 3 दिसंबरसुबह 8:11

    बुध अस्त (14 दिसंबर तक)†

  • 14 दिसंबरसुबह 7:22

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 दिसंबरशाम 4:12

    बुध वृश्चिक 14°34′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2037: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और