पंचांग · गोचर · बुध
2038 में बुध का गोचर
2038 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 5 जनवरी को धनु, 26 जनवरी को मकर, 13 फ़रवरी को कुम्भ, 1 मार्च को मीन …। वक्री: 18 मार्च, 21 जुलाई, 12 नवंबर से।
सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
2038 में बुध किन राशियों में है
- वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)2 दिसंबर, सुबह 6:18 2037 → 5 जनवरी, दोपहर 3:57 2038· 34 दिन
- धनु5 जनवरी, दोपहर 3:57 2038 → 26 जनवरी, सुबह 4:26 2038· 21 दिन
- मकर26 जनवरी, सुबह 4:26 2038 → 13 फ़रवरी, रात 1:56 2038· 18 दिन
- कुम्भ13 फ़रवरी, रात 1:56 2038 → 1 मार्च, सुबह 9:10 2038· 16 दिन
- मीन1 मार्च, सुबह 9:10 2038 → 8 मई, सुबह 9:56 2038· लगभग 2 महीने
- मेष8 मई, सुबह 9:56 2038 → 25 मई, सुबह 4:06 2038· 17 दिन
- वृषभ25 मई, सुबह 4:06 2038 → 8 जून, रात 12:54 2038· 14 दिन
- मिथुन8 जून, रात 12:54 2038 → 24 जून, रात 2:40 2038· 16 दिन
- कर्क24 जून, रात 2:40 2038 → 1 सितंबर, रात 3:35 2038· लगभग 2 महीने
- सिंह1 सितंबर, रात 3:35 2038 → 17 सितंबर, रात 1:04 2038· 16 दिन
- कन्या17 सितंबर, रात 1:04 2038 → 4 अक्टूबर, दोपहर 2:29 2038· 18 दिन
- तुला4 अक्टूबर, दोपहर 2:29 2038 → 25 अक्टूबर, दोपहर 1:13 2038· 21 दिन
- वृश्चिक25 अक्टूबर, दोपहर 1:13 2038 → 29 नवंबर, सुबह 5:39 2038· 35 दिन
- तुला(वक्री गति से प्रवेश)29 नवंबर, सुबह 5:39 2038 → 6 दिसंबर, दोपहर 1:31 2038· 7 दिन
- वृश्चिक6 दिसंबर, दोपहर 1:31 2038 → 30 दिसंबर, शाम 4:36 2038· 24 दिन
- धनु30 दिसंबर, शाम 4:36 2038 → 18 जनवरी, रात 10:12 2039· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
जनवरी 2038
5 जनवरीदोपहर 3:57
बुध का धनु में प्रवेश
21 जनवरीशाम 7:44
बुध अस्त (1 मार्च तक)†
26 जनवरीसुबह 4:26
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2038
13 फ़रवरीरात 1:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2038
1 मार्चसुबह 9:10
बुध का मीन में प्रवेश
1 मार्चशाम 4:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
18 मार्चसुबह 11:51
बुध मीन 17°59′ पर वक्री
20 मार्चशाम 6:51
बुध अस्त (3 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2038
3 अप्रैलरात 8:52
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 अप्रैलशाम 5:57
बुध मीन 5°26′ पर मार्गी
मई 2038
8 मईसुबह 9:56
बुध का मेष में प्रवेश
20 मईशाम 6:39
बुध अस्त (14 जून तक)†
25 मईसुबह 4:06
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 2038
8 जूनरात 12:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
14 जूनसुबह 5:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जूनरात 2:40
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2038
21 जुलाईदोपहर 12:42
बुध कर्क 24°11′ पर वक्री
28 जुलाईरात 1:05
बुध अस्त (12 अगस्त तक)†
अगस्त 2038
12 अगस्तसुबह 4:41
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अगस्तदोपहर 2:34
बुध कर्क 12°40′ पर मार्गी
सितंबर 2038
1 सितंबररात 3:35
बुध का सिंह में प्रवेश
1 सितंबरसुबह 9:42
बुध अस्त (6 अक्टूबर तक)†
17 सितंबररात 1:04
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2038
4 अक्टूबरदोपहर 2:29
बुध का तुला में प्रवेश
6 अक्टूबररात 1:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 अक्टूबरदोपहर 1:13
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2038
12 नवंबररात 8:40
बुध वृश्चिक 15°01′ पर वक्री
17 नवंबररात 9:04
बुध अस्त (28 नवंबर तक)†
28 नवंबररात 11:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 नवंबरसुबह 5:39
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
दिसंबर 2038
2 दिसंबरशाम 6:15
बुध तुला 28°50′ पर मार्गी
6 दिसंबरदोपहर 1:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
30 दिसंबरशाम 4:36
बुध का धनु में प्रवेश
31 दिसंबरदोपहर 2:03
बुध अस्त (13 फ़रवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2038: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
