पंचांग · गोचर · बुध
2040 में बुध का गोचर
2040 में बुध 16 बार राशि बदलता है: 11 जनवरी को मकर, 29 जनवरी को कुम्भ, 2 मार्च को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 9 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 12 फ़रवरी, 13 जून, 9 अक्टूबर से।
2040 में बुध किन राशियों में है
- धनु23 दिसंबर, शाम 6:16 2039 → 11 जनवरी, दोपहर 12:04 2040· 19 दिन
- मकर11 जनवरी, दोपहर 12:04 2040 → 29 जनवरी, सुबह 9:36 2040· 18 दिन
- कुम्भ29 जनवरी, सुबह 9:36 2040 → 2 मार्च, रात 2:39 2040· 33 दिन
- मकर(वक्री गति से प्रवेश)2 मार्च, रात 2:39 2040 → 9 मार्च, सुबह 11:57 2040· 7 दिन
- कुम्भ9 मार्च, सुबह 11:57 2040 → 6 अप्रैल, रात 12:15 2040· 28 दिन
- मीन6 अप्रैल, रात 12:15 2040 → 22 अप्रैल, रात 10:38 2040· 17 दिन
- मेष22 अप्रैल, रात 10:38 2040 → 7 मई, रात 3:32 2040· 14 दिन
- वृषभ7 मई, रात 3:32 2040 → 23 मई, शाम 4:23 2040· 17 दिन
- मिथुन23 मई, शाम 4:23 2040 → 31 जुलाई, सुबह 6:31 2040· लगभग 2 महीने
- कर्क31 जुलाई, सुबह 6:31 2040 → 15 अगस्त, रात 2:48 2040· 15 दिन
- सिंह15 अगस्त, रात 2:48 2040 → 31 अगस्त, दोपहर 12:51 2040· 16 दिन
- कन्या31 अगस्त, दोपहर 12:51 2040 → 21 सितंबर, दोपहर 2:30 2040· 21 दिन
- तुला21 सितंबर, दोपहर 2:30 2040 → 25 अक्टूबर, सुबह 8:49 2040· 34 दिन
- कन्या(वक्री गति से प्रवेश)25 अक्टूबर, सुबह 8:49 2040 → 5 नवंबर, रात 3:12 2040· 11 दिन
- तुला5 नवंबर, रात 3:12 2040 → 26 नवंबर, सुबह 10:45 2040· 21 दिन
- वृश्चिक26 नवंबर, सुबह 10:45 2040 → 15 दिसंबर, दोपहर 1:04 2040· 19 दिन
- धनु15 दिसंबर, दोपहर 1:04 2040 → 3 जनवरी, सुबह 6:40 2041· 19 दिन
तारीखवार
समय भारतीय मानक समय (IST) में।
जनवरी 2040
11 जनवरीदोपहर 12:04
बुध का मकर में प्रवेश
26 जनवरीशाम 7:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीसुबह 9:36
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2040
12 फ़रवरीशाम 7:08
बुध कुम्भ 14°13′ पर वक्री
15 फ़रवरीसुबह 8:47
बुध अस्त (27 फ़रवरी तक)†
27 फ़रवरीशाम 5:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2040
2 मार्चरात 2:39
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
5 मार्चशाम 4:50
बुध मकर 29°17′ पर मार्गी
9 मार्चसुबह 11:57
बुध का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2040
6 अप्रैलरात 12:15
बुध का मीन में प्रवेश
17 अप्रैलसुबह 9:14
बुध अस्त (13 मई तक)†
22 अप्रैलरात 10:38
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2040
7 मईरात 3:32
बुध का वृषभ में प्रवेश
13 मईसुबह 5:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 मईशाम 4:23
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2040
13 जूनसुबह 5:48
बुध मिथुन 15°07′ पर वक्री
17 जूनदोपहर 3:39
बुध अस्त (4 जुलाई तक)†
जुलाई 2040
4 जुलाईसुबह 10:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 जुलाईसुबह 7:51
बुध मिथुन 6°07′ पर मार्गी
31 जुलाईसुबह 6:31
बुध का कर्क में प्रवेश
31 जुलाईसुबह 7:21
बुध अस्त (28 अगस्त तक)†
अगस्त 2040
15 अगस्तरात 2:48
बुध का सिंह में प्रवेश
28 अगस्तशाम 7:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तदोपहर 12:51
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2040
21 सितंबरदोपहर 2:30
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2040
9 अक्टूबरशाम 5:34
बुध तुला 13°06′ पर वक्री
15 अक्टूबररात 10:52
बुध अस्त (27 अक्टूबर तक)†
25 अक्टूबरसुबह 8:49
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
27 अक्टूबरशाम 4:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबरदोपहर 2:36
बुध कन्या 27°26′ पर मार्गी
नवंबर 2040
5 नवंबररात 3:12
बुध का तुला में प्रवेश
19 नवंबरसुबह 11:04
बुध अस्त (7 जनवरी तक)†
26 नवंबरसुबह 10:45
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2040
15 दिसंबरदोपहर 1:04
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2040: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
