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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2041 में बुध का गोचर

2041 में बुध 13 बार राशि बदलता है: 3 जनवरी को मकर, 10 मार्च को कुम्भ, 30 मार्च को मीन, 14 अप्रैल को मेष …। वक्री: 26 जनवरी, 25 मई, 23 सितंबर से।

सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।

2041 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु15 दिसंबर, शाम 7:34 2040 → 3 जनवरी, दोपहर 1:10 2041· 19 दिन
  2. मकर3 जनवरी, दोपहर 1:10 2041 → 10 मार्च, शाम 6:38 2041· लगभग 2 महीने
  3. कुम्भ10 मार्च, शाम 6:38 2041 → 30 मार्च, सुबह 8:17 2041· 20 दिन
  4. मीन30 मार्च, सुबह 8:17 2041 → 14 अप्रैल, रात 9:31 2041· 16 दिन
  5. मेष14 अप्रैल, रात 9:31 2041 → 29 अप्रैल, दोपहर 12:46 2041· 15 दिन
  6. वृषभ29 अप्रैल, दोपहर 12:46 2041 → 7 जुलाई, रात 1:07 2041· लगभग 2 महीने
  7. मिथुन7 जुलाई, रात 1:07 2041 → 23 जुलाई, दोपहर 12:28 2041· 16 दिन
  8. कर्क23 जुलाई, दोपहर 12:28 2041 → 7 अगस्त, रात 3:51 2041· 15 दिन
  9. सिंह7 अगस्त, रात 3:51 2041 → 25 अगस्त, रात 1:50 2041· 18 दिन
  10. कन्या25 अगस्त, रात 1:50 2041 → 1 नवंबर, रात 12:01 2041· लगभग 2 महीने
  11. तुला1 नवंबर, रात 12:01 2041 → 19 नवंबर, दोपहर 12:29 2041· 19 दिन
  12. वृश्चिक19 नवंबर, दोपहर 12:29 2041 → 8 दिसंबर, दोपहर 2:50 2041· 19 दिन
  13. धनु8 दिसंबर, दोपहर 2:50 2041 → 28 दिसंबर, सुबह 6:38 2041· 20 दिन
  14. मकर28 दिसंबर, सुबह 6:38 2041 → 23 जनवरी, सुबह 9:31 2042· 26 दिन

तारीखवार

सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।

जनवरी 2041

  • 3 जनवरीदोपहर 1:10

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 7 जनवरीरात 10:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जनवरीशाम 6:14

    बुध मकर 27°53′ पर वक्री

  • 29 जनवरीदोपहर 2:20

    बुध अस्त (10 फ़रवरी तक)†

फ़रवरी 2041

  • 10 फ़रवरीसुबह 8:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 फ़रवरीरात 10:27

    बुध मकर 12°14′ पर मार्गी

मार्च 2041

  • 10 मार्चशाम 6:38

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 30 मार्चसुबह 8:17

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चशाम 5:24

    बुध अस्त (28 अप्रैल तक)†

अप्रैल 2041

  • 14 अप्रैलरात 9:31

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 28 अप्रैलरात 1:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अप्रैलदोपहर 12:46

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2041

  • 25 मईरात 3:37

    बुध वृषभ 25°03′ पर वक्री

  • 28 मईदोपहर 12:09

    बुध अस्त (14 जून तक)†

जून 2041

  • 14 जूनदोपहर 1:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जूनरात 1:41

    बुध वृषभ 16°30′ पर मार्गी

जुलाई 2041

  • 7 जुलाईरात 1:07

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईसुबह 4:52

    बुध अस्त (11 अगस्त तक)†

  • 23 जुलाईदोपहर 12:28

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2041

  • 7 अगस्तरात 3:51

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 11 अगस्तरात 8:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 अगस्तरात 1:50

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2041

  • 23 सितंबररात 2:43

    बुध कन्या 26°49′ पर वक्री

  • 29 सितंबररात 8:17

    बुध अस्त (12 अक्टूबर तक)†

अक्टूबर 2041

  • 12 अक्टूबररात 3:02

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अक्टूबरशाम 5:51

    बुध कन्या 11°37′ पर मार्गी

नवंबर 2041

  • 1 नवंबररात 12:01

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 1 नवंबररात 12:10

    बुध अस्त (19 दिसंबर तक)†

  • 19 नवंबरदोपहर 12:29

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2041

  • 8 दिसंबरदोपहर 2:50

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरदोपहर 3:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 दिसंबरसुबह 6:38

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2041: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और