पंचांग · गोचर · बुध
2045 में बुध का गोचर
2045 में बुध 17 बार राशि बदलता है: 3 जनवरी को धनु, 22 जनवरी को मकर, 9 फ़रवरी को कुम्भ, 26 फ़रवरी को मीन …। वक्री: 10 मार्च, 13 जुलाई, 5 नवंबर से।
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
2045 में बुध किन राशियों में है
- वृश्चिक28 अक्टूबर, सुबह 9:45 2044 → 3 जनवरी, रात 2:20 2045· लगभग 2 महीने
- धनु3 जनवरी, रात 2:20 2045 → 22 जनवरी, रात 9:49 2045· 20 दिन
- मकर22 जनवरी, रात 9:49 2045 → 9 फ़रवरी, दोपहर 1:42 2045· 18 दिन
- कुम्भ9 फ़रवरी, दोपहर 1:42 2045 → 26 फ़रवरी, सुबह 11:32 2045· 17 दिन
- मीन26 फ़रवरी, सुबह 11:32 2045 → 26 मार्च, शाम 4:40 2045· 28 दिन
- कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)26 मार्च, शाम 4:40 2045 → 10 अप्रैल, दोपहर 3:49 2045· 15 दिन
- मीन10 अप्रैल, दोपहर 3:49 2045 → 5 मई, दोपहर 2:29 2045· 25 दिन
- मेष5 मई, दोपहर 2:29 2045 → 21 मई, सुबह 9:15 2045· 16 दिन
- वृषभ21 मई, सुबह 9:15 2045 → 4 जून, सुबह 6:34 2045· 14 दिन
- मिथुन4 जून, सुबह 6:34 2045 → 21 जून, शाम 6:23 2045· 17 दिन
- कर्क21 जून, शाम 6:23 2045 → 28 अगस्त, शाम 7:02 2045· लगभग 2 महीने
- सिंह28 अगस्त, शाम 7:02 2045 → 13 सितंबर, सुबह 10:16 2045· 16 दिन
- कन्या13 सितंबर, सुबह 10:16 2045 → 1 अक्टूबर, सुबह 9:32 2045· 18 दिन
- तुला1 अक्टूबर, सुबह 9:32 2045 → 23 अक्टूबर, शाम 7:24 2045· 22 दिन
- वृश्चिक23 अक्टूबर, शाम 7:24 2045 → 16 नवंबर, सुबह 4:47 2045· 23 दिन
- तुला(वक्री गति से प्रवेश)16 नवंबर, सुबह 4:47 2045 → 6 दिसंबर, दोपहर 1:36 2045· 20 दिन
- वृश्चिक6 दिसंबर, दोपहर 1:36 2045 → 27 दिसंबर, दोपहर 2:10 2045· 21 दिन
- धनु27 दिसंबर, दोपहर 2:10 2045 → 15 जनवरी, दोपहर 1:13 2046· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
जनवरी 2045
3 जनवरीरात 2:20
बुध का धनु में प्रवेश
12 जनवरीदोपहर 3:01
बुध अस्त (22 फ़रवरी तक)†
22 जनवरीरात 9:49
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2045
9 फ़रवरीदोपहर 1:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीदोपहर 12:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीसुबह 11:32
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2045
10 मार्चरात 10:41
बुध मीन 10°39′ पर वक्री
13 मार्चसुबह 6:22
बुध अस्त (26 मार्च तक)†
26 मार्चशाम 4:40
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 मार्चरात 10:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2045
2 अप्रैलरात 11:10
बुध कुम्भ 27°30′ पर मार्गी
10 अप्रैलदोपहर 3:49
बुध का मीन में प्रवेश
मई 2045
5 मईदोपहर 2:29
बुध का मेष में प्रवेश
13 मईशाम 7:12
बुध अस्त (7 जून तक)†
21 मईसुबह 9:15
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 2045
4 जूनसुबह 6:34
बुध का मिथुन में प्रवेश
7 जूनसुबह 9:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 जूनशाम 6:23
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2045
13 जुलाईदोपहर 1:37
बुध कर्क 16°07′ पर वक्री
19 जुलाईशाम 5:15
बुध अस्त (4 अगस्त तक)†
अगस्त 2045
4 अगस्तसुबह 6:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अगस्तशाम 5:28
बुध कर्क 5°11′ पर मार्गी
25 अगस्तदोपहर 12:18
बुध अस्त (27 सितंबर तक)†
28 अगस्तशाम 7:02
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2045
13 सितंबरसुबह 10:16
बुध का कन्या में प्रवेश
27 सितंबरदोपहर 1:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2045
1 अक्टूबरसुबह 9:32
बुध का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरशाम 7:24
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2045
5 नवंबरशाम 4:07
बुध वृश्चिक 8°17′ पर वक्री
10 नवंबररात 10:41
बुध अस्त (22 नवंबर तक)†
16 नवंबरसुबह 4:47
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
22 नवंबररात 3:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबरशाम 4:54
बुध तुला 22°11′ पर मार्गी
दिसंबर 2045
6 दिसंबरदोपहर 1:36
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
22 दिसंबरसुबह 7:42
बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†
27 दिसंबरदोपहर 2:10
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2045: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
