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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2046 में बुध का गोचर

2046 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 15 जनवरी को मकर, 1 फ़रवरी को कुम्भ, 9 अप्रैल को मीन, 27 अप्रैल को मेष …। वक्री: 21 फ़रवरी, 24 जून, 19 अक्टूबर से।

सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।

2046 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु27 दिसंबर, रात 1:10 2045 → 15 जनवरी, रात 12:13 2046· 19 दिन
  2. मकर15 जनवरी, रात 12:13 2046 → 1 फ़रवरी, दोपहर 12:29 2046· 18 दिन
  3. कुम्भ1 फ़रवरी, दोपहर 12:29 2046 → 9 अप्रैल, दोपहर 12:45 2046· लगभग 2 महीने
  4. मीन9 अप्रैल, दोपहर 12:45 2046 → 27 अप्रैल, शाम 7:52 2046· 18 दिन
  5. मेष27 अप्रैल, शाम 7:52 2046 → 12 मई, सुबह 7:34 2046· 14 दिन
  6. वृषभ12 मई, सुबह 7:34 2046 → 27 मई, सुबह 4:49 2046· 15 दिन
  7. मिथुन27 मई, सुबह 4:49 2046 → 4 अगस्त, सुबह 7:25 2046· लगभग 2 महीने
  8. कर्क4 अगस्त, सुबह 7:25 2046 → 20 अगस्त, सुबह 4:41 2046· 16 दिन
  9. सिंह20 अगस्त, सुबह 4:41 2046 → 5 सितंबर, रात 2:30 2046· 16 दिन
  10. कन्या5 सितंबर, रात 2:30 2046 → 24 सितंबर, दोपहर 2:08 2046· 19 दिन
  11. तुला24 सितंबर, दोपहर 2:08 2046 → 30 नवंबर, दोपहर 2:21 2046· लगभग 2 महीने
  12. वृश्चिक30 नवंबर, दोपहर 2:21 2046 → 19 दिसंबर, रात 10:57 2046· 19 दिन
  13. धनु19 दिसंबर, रात 10:57 2046 → 7 जनवरी, दोपहर 3:05 2047· 19 दिन

तारीखवार

सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।

जनवरी 2046

  • 15 जनवरीरात 12:13

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2046

  • 1 फ़रवरीदोपहर 12:29

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 फ़रवरीरात 2:15

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 फ़रवरीदोपहर 1:00

    बुध कुम्भ 23°45′ पर वक्री

  • 24 फ़रवरीरात 12:01

    बुध अस्त (8 मार्च तक)†

मार्च 2046

  • 8 मार्चशाम 6:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 मार्चरात 10:12

    बुध कुम्भ 9°22′ पर मार्गी

अप्रैल 2046

  • 9 अप्रैलदोपहर 12:45

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 27 अप्रैलरात 3:45

    बुध अस्त (22 मई तक)†

  • 27 अप्रैलशाम 7:52

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2046

  • 12 मईसुबह 7:34

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मईसुबह 9:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 मईसुबह 4:49

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2046

  • 24 जूनसुबह 10:57

    बुध मिथुन 26°37′ पर वक्री

  • 29 जूनदोपहर 1:25

    बुध अस्त (15 जुलाई तक)†

जुलाई 2046

  • 15 जुलाईरात 11:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जुलाईदोपहर 3:51

    बुध मिथुन 17°01′ पर मार्गी

अगस्त 2046

  • 4 अगस्तसुबह 7:25

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 9 अगस्तसुबह 11:17

    बुध अस्त (8 सितंबर तक)†

  • 20 अगस्तसुबह 4:41

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2046

  • 5 सितंबररात 2:30

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 8 सितंबरसुबह 9:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 सितंबरदोपहर 2:08

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2046

  • 19 अक्टूबरदोपहर 2:55

    बुध तुला 22°21′ पर वक्री

  • 25 अक्टूबरदोपहर 12:19

    बुध अस्त (5 नवंबर तक)†

नवंबर 2046

  • 5 नवंबररात 11:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 नवंबररात 2:26

    बुध तुला 6°29′ पर मार्गी

  • 30 नवंबरदोपहर 2:21

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2046

  • 1 दिसंबररात 1:34

    बुध अस्त (18 जनवरी तक)†

  • 19 दिसंबररात 10:57

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2046: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और