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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2047 में बुध का गोचर

2047 में बुध 19 बार राशि बदलता है: 7 जनवरी को मकर, 26 जनवरी को कुम्भ, 15 फ़रवरी को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 12 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 5 फ़रवरी, 5 जून, 3 अक्टूबर से।

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

2047 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु20 दिसंबर, रात 3:57 2046 → 7 जनवरी, रात 8:05 2047· 19 दिन
  2. मकर7 जनवरी, रात 8:05 2047 → 26 जनवरी, दोपहर 3:23 2047· 19 दिन
  3. कुम्भ26 जनवरी, दोपहर 3:23 2047 → 15 फ़रवरी, रात 12:08 2047· 19 दिन
  4. मकर(वक्री गति से प्रवेश)15 फ़रवरी, रात 12:08 2047 → 12 मार्च, दोपहर 3:38 2047· 26 दिन
  5. कुम्भ12 मार्च, दोपहर 3:38 2047 → 3 अप्रैल, शाम 4:46 2047· 22 दिन
  6. मीन3 अप्रैल, शाम 4:46 2047 → 19 अप्रैल, रात 10:26 2047· 16 दिन
  7. मेष19 अप्रैल, रात 10:26 2047 → 4 मई, रात 3:31 2047· 14 दिन
  8. वृषभ4 मई, रात 3:31 2047 → 23 मई, सुबह 8:30 2047· 19 दिन
  9. मिथुन23 मई, सुबह 8:30 2047 → 21 जून, शाम 6:15 2047· 29 दिन
  10. वृषभ(वक्री गति से प्रवेश)21 जून, शाम 6:15 2047 → 6 जुलाई, शाम 6:32 2047· 15 दिन
  11. मिथुन6 जुलाई, शाम 6:32 2047 → 28 जुलाई, सुबह 11:33 2047· 22 दिन
  12. कर्क28 जुलाई, सुबह 11:33 2047 → 12 अगस्त, रात 1:56 2047· 15 दिन
  13. सिंह12 अगस्त, रात 1:56 2047 → 29 अगस्त, रात 12:29 2047· 17 दिन
  14. कन्या29 अगस्त, रात 12:29 2047 → 21 सितंबर, सुबह 6:15 2047· 23 दिन
  15. तुला21 सितंबर, सुबह 6:15 2047 → 13 अक्टूबर, रात 2:01 2047· 22 दिन
  16. कन्या(वक्री गति से प्रवेश)13 अक्टूबर, रात 2:01 2047 → 4 नवंबर, दोपहर 1:09 2047· 23 दिन
  17. तुला4 नवंबर, दोपहर 1:09 2047 → 23 नवंबर, रात 9:02 2047· 19 दिन
  18. वृश्चिक23 नवंबर, रात 9:02 2047 → 12 दिसंबर, रात 10:04 2047· 19 दिन
  19. धनु12 दिसंबर, रात 10:04 2047 → 31 दिसंबर, रात 8:36 2047· 19 दिन
  20. मकर31 दिसंबर, रात 8:36 2047 → 7 मार्च, शाम 6:28 2048· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

जनवरी 2047

  • 7 जनवरीरात 8:05

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 18 जनवरीशाम 4:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जनवरीदोपहर 3:23

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 2047

  • 5 फ़रवरीसुबह 7:00

    बुध कुम्भ 7°14′ पर वक्री

  • 7 फ़रवरीरात 11:14

    बुध अस्त (20 फ़रवरी तक)†

  • 15 फ़रवरीरात 12:08

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 20 फ़रवरीरात 12:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 फ़रवरीरात 9:05

    बुध मकर 21°58′ पर मार्गी

मार्च 2047

  • 12 मार्चदोपहर 3:38

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

अप्रैल 2047

  • 3 अप्रैलशाम 4:46

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 10 अप्रैलशाम 6:22

    बुध अस्त (7 मई तक)†

  • 19 अप्रैलरात 10:26

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2047

  • 4 मईरात 3:31

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 7 मईरात 3:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 मईसुबह 8:30

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2047

  • 5 जूनदोपहर 1:04

    बुध मिथुन 6°36′ पर वक्री

  • 9 जूनसुबह 11:34

    बुध अस्त (26 जून तक)†

  • 21 जूनशाम 6:15

    बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 जूनसुबह 11:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जूनदोपहर 1:36

    बुध वृषभ 27°53′ पर मार्गी

जुलाई 2047

  • 6 जुलाईशाम 6:32

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 25 जुलाईसुबह 6:25

    बुध अस्त (21 अगस्त तक)†

  • 28 जुलाईसुबह 11:33

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2047

  • 12 अगस्तरात 1:56

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 21 अगस्तरात 9:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अगस्तरात 12:29

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2047

  • 21 सितंबरसुबह 6:15

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2047

  • 3 अक्टूबररात 1:45

    बुध तुला 6°14′ पर वक्री

  • 9 अक्टूबरदोपहर 12:47

    बुध अस्त (21 अक्टूबर तक)†

  • 13 अक्टूबररात 2:01

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 अक्टूबरसुबह 11:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 अक्टूबरसुबह 6:21

    बुध कन्या 20°44′ पर मार्गी

नवंबर 2047

  • 4 नवंबरदोपहर 1:09

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 11 नवंबरशाम 7:11

    बुध अस्त (31 दिसंबर तक)†

  • 23 नवंबररात 9:02

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2047

  • 12 दिसंबररात 10:04

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 31 दिसंबररात 1:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 दिसंबररात 8:36

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2047: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

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