पंचांग · गोचर · बुध
2026 में बुध का गोचर
2026 में बुध 14 बार राशि बदलता है: 17 जनवरी को मकर, 3 फ़रवरी को कुम्भ, 10 अप्रैल को मीन, 30 अप्रैल को मेष …। वक्री: 26 फ़रवरी, 29 जून, 24 अक्टूबर से।
सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
2026 में बुध किन राशियों में है
- धनु29 दिसंबर, रात 3:48 2025 → 17 जनवरी, सुबह 6:48 2026· 19 दिन
- मकर17 जनवरी, सुबह 6:48 2026 → 3 फ़रवरी, शाम 6:17 2026· 17 दिन
- कुम्भ3 फ़रवरी, शाम 6:17 2026 → 10 अप्रैल, रात 9:39 2026· लगभग 2 महीने
- मीन10 अप्रैल, रात 9:39 2026 → 30 अप्रैल, रात 3:18 2026· 19 दिन
- मेष30 अप्रैल, रात 3:18 2026 → 14 मई, रात 8:58 2026· 15 दिन
- वृषभ14 मई, रात 8:58 2026 → 29 मई, सुबह 7:37 2026· 14 दिन
- मिथुन29 मई, सुबह 7:37 2026 → 22 जून, सुबह 11:44 2026· 24 दिन
- कर्क22 जून, सुबह 11:44 2026 → 7 जुलाई, सुबह 7:34 2026· 15 दिन
- मिथुन(वक्री गति से प्रवेश)7 जुलाई, सुबह 7:34 2026 → 5 अगस्त, शाम 4:16 2026· 29 दिन
- कर्क5 अगस्त, शाम 4:16 2026 → 22 अगस्त, दोपहर 3:57 2026· 17 दिन
- सिंह22 अगस्त, दोपहर 3:57 2026 → 7 सितंबर, सुबह 9:57 2026· 16 दिन
- कन्या7 सितंबर, सुबह 9:57 2026 → 26 सितंबर, सुबह 9:02 2026· 19 दिन
- तुला26 सितंबर, सुबह 9:02 2026 → 2 दिसंबर, दोपहर 1:51 2026· लगभग 2 महीने
- वृश्चिक2 दिसंबर, दोपहर 1:51 2026 → 22 दिसंबर, सुबह 4:03 2026· 20 दिन
- धनु22 दिसंबर, सुबह 4:03 2026 → 9 जनवरी, रात 9:01 2027· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
जनवरी 2026
17 जनवरीसुबह 6:48
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2026
3 फ़रवरीशाम 6:17
बुध का कुम्भ में प्रवेश
10 फ़रवरीरात 12:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीसुबह 8:47
बुध कुम्भ 28°21′ पर वक्री
28 फ़रवरीशाम 6:37
बुध अस्त (13 मार्च तक)†
मार्च 2026
13 मार्चशाम 6:39
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 मार्चरात 9:33
बुध कुम्भ 14°16′ पर मार्गी
अप्रैल 2026
10 अप्रैलरात 9:39
बुध का मीन में प्रवेश
30 अप्रैलरात 3:18
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2026
1 मईशाम 7:46
बुध अस्त (26 मई तक)†
14 मईरात 8:58
बुध का वृषभ में प्रवेश
26 मईशाम 7:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मईसुबह 7:37
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2026
22 जूनसुबह 11:44
बुध का कर्क में प्रवेश
29 जूनशाम 7:35
बुध कर्क 2°02′ पर वक्री
जुलाई 2026
5 जुलाईसुबह 5:42
बुध अस्त (21 जुलाई तक)†
7 जुलाईसुबह 7:34
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
21 जुलाईसुबह 10:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जुलाईरात 12:58
बुध मिथुन 22°05′ पर मार्गी
अगस्त 2026
5 अगस्तशाम 4:16
बुध का कर्क में प्रवेश
13 अगस्तरात 9:58
बुध अस्त (13 सितंबर तक)†
22 अगस्तदोपहर 3:57
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2026
7 सितंबरसुबह 9:57
बुध का कन्या में प्रवेश
13 सितंबरदोपहर 3:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 सितंबरसुबह 9:02
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2026
24 अक्टूबरसुबह 9:12
बुध तुला 26°45′ पर वक्री
30 अक्टूबररात 2:34
बुध अस्त (10 नवंबर तक)†
नवंबर 2026
10 नवंबरदोपहर 12:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 नवंबरशाम 5:54
बुध तुला 10°49′ पर मार्गी
दिसंबर 2026
2 दिसंबरदोपहर 1:51
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
6 दिसंबररात 9:24
बुध अस्त (23 जनवरी तक)†
22 दिसंबरसुबह 4:03
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2026: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
