पंचांग · गोचर · मंगल
1993 में मंगल का गोचर
1993 में मंगल 6 बार राशि बदलता है: 14 अप्रैल को कर्क, 12 जून को सिंह, 1 अगस्त को कन्या, 17 सितंबर को तुला …।
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CDT/CST) में।
1993 में मंगल किन राशियों में है
- मिथुन(वक्री गति से प्रवेश)22 दिसंबर, सुबह 9:56 1992 → 14 अप्रैल, रात 1:14 1993· लगभग 4 महीने
- कर्क14 अप्रैल, रात 1:14 1993 → 12 जून, रात 3:34 1993· 59 दिन
- सिंह12 जून, रात 3:34 1993 → 1 अगस्त, रात 8:12 1993· 51 दिन
- कन्या1 अगस्त, रात 8:12 1993 → 17 सितंबर, दोपहर 1:48 1993· 47 दिन
- तुला17 सितंबर, दोपहर 1:48 1993 → 31 अक्टूबर, सुबह 5:28 1993· 44 दिन
- वृश्चिक31 अक्टूबर, सुबह 5:28 1993 → 11 दिसंबर, सुबह 11:04 1993· 41 दिन
- धनु11 दिसंबर, सुबह 11:04 1993 → 19 जनवरी, रात 9:18 1994· 39 दिन
तारीखवार
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CDT/CST) में।
फ़रवरी 1993
15 फ़रवरीरात 1:47
मंगल मिथुन 14°55′ पर मार्गी
अप्रैल 1993
14 अप्रैलरात 1:14
मंगल का कर्क में प्रवेश
जून 1993
12 जूनरात 3:34
मंगल का सिंह में प्रवेश
अगस्त 1993
1 अगस्तरात 8:12
मंगल का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1993
17 सितंबरदोपहर 1:48
मंगल का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 1993
26 अक्टूबररात 8:31
मंगल अस्त (8 मार्च तक)†
31 अक्टूबरसुबह 5:28
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1993
11 दिसंबरसुबह 11:04
मंगल का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ मंगल को सूर्य से 17° के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: मंगल (शब्दकोश) · गोचर 1993: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
