पंचांग · गोचर · मंगल
2035 में मंगल का गोचर
2035 में मंगल 7 बार राशि बदलता है: 2 जनवरी को वृश्चिक, 17 फ़रवरी को धनु, 3 अप्रैल को मकर, 21 मई को कुम्भ …। वक्री: 15 अगस्त से।
सभी समय पोर्ट ऑफ़ स्पेन के स्थानीय समय (America/Port of Spain, AST) में।
2035 में मंगल किन राशियों में है
- तुला17 नवंबर, शाम 4:32 2034 → 2 जनवरी, शाम 6:05 2035· 46 दिन
- वृश्चिक2 जनवरी, शाम 6:05 2035 → 17 फ़रवरी, सुबह 8:10 2035· 46 दिन
- धनु17 फ़रवरी, सुबह 8:10 2035 → 3 अप्रैल, रात 10:58 2035· 46 दिन
- मकर3 अप्रैल, रात 10:58 2035 → 21 मई, सुबह 6:08 2035· 47 दिन
- कुम्भ21 मई, सुबह 6:08 2035 → 21 जुलाई, रात 12:34 2035· लगभग 2 महीने
- मीन21 जुलाई, रात 12:34 2035 → 10 सितंबर, रात 1:26 2035· 51 दिन
- कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)10 सितंबर, रात 1:26 2035 → 17 नवंबर, शाम 5:20 2035· लगभग 2 महीने
- मीन17 नवंबर, शाम 5:20 2035 → 16 जनवरी, दोपहर 2:11 2036· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय पोर्ट ऑफ़ स्पेन के स्थानीय समय (America/Port of Spain, AST) में।
जनवरी 2035
2 जनवरीशाम 6:05
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
फ़रवरी 2035
17 फ़रवरीसुबह 8:10
मंगल का धनु में प्रवेश
अप्रैल 2035
3 अप्रैलरात 10:58
मंगल का मकर में प्रवेश
मई 2035
21 मईसुबह 6:08
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
जुलाई 2035
21 जुलाईरात 12:34
मंगल का मीन में प्रवेश
अगस्त 2035
15 अगस्तसुबह 5:57
मंगल मीन 4°05′ पर वक्री
सितंबर 2035
10 सितंबररात 1:26
मंगल का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
अक्टूबर 2035
15 अक्टूबरसुबह 4:36
मंगल कुम्भ 23°24′ पर मार्गी
नवंबर 2035
17 नवंबरशाम 5:20
मंगल का मीन में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ मंगल को सूर्य से 17° के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: मंगल (शब्दकोश) · गोचर 2035: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
