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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · शुक्र

2003 में शुक्र का गोचर

2003 में शुक्र 15 बार राशि बदलता है: 1 जनवरी को वृश्चिक, 30 जनवरी को धनु, 25 फ़रवरी को मकर, 23 मार्च को कुम्भ …।

सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।

2003 में शुक्र किन राशियों में है

  1. तुला1 सितंबर, सुबह 9:43 2002 → 1 जनवरी, शाम 6:43 2003· लगभग 4 महीने
  2. वृश्चिक1 जनवरी, शाम 6:43 2003 → 30 जनवरी, दोपहर 3:32 2003· 29 दिन
  3. धनु30 जनवरी, दोपहर 3:32 2003 → 25 फ़रवरी, रात 8:52 2003· 26 दिन
  4. मकर25 फ़रवरी, रात 8:52 2003 → 23 मार्च, रात 3:53 2003· 25 दिन
  5. कुम्भ23 मार्च, रात 3:53 2003 → 17 अप्रैल, रात 3:01 2003· 25 दिन
  6. मीन17 अप्रैल, रात 3:01 2003 → 11 मई, रात 10:12 2003· 25 दिन
  7. मेष11 मई, रात 10:12 2003 → 5 जून, दोपहर 3:13 2003· 25 दिन
  8. वृषभ5 जून, दोपहर 3:13 2003 → 30 जून, सुबह 5:56 2003· 25 दिन
  9. मिथुन30 जून, सुबह 5:56 2003 → 24 जुलाई, शाम 5:29 2003· 24 दिन
  10. कर्क24 जुलाई, शाम 5:29 2003 → 18 अगस्त, रात 1:21 2003· 24 दिन
  11. सिंह18 अगस्त, रात 1:21 2003 → 11 सितंबर, सुबह 6:11 2003· 24 दिन
  12. कन्या11 सितंबर, सुबह 6:11 2003 → 5 अक्टूबर, सुबह 10:20 2003· 24 दिन
  13. तुला5 अक्टूबर, सुबह 10:20 2003 → 29 अक्टूबर, दोपहर 1:07 2003· 24 दिन
  14. वृश्चिक29 अक्टूबर, दोपहर 1:07 2003 → 22 नवंबर, शाम 4:22 2003· 24 दिन
  15. धनु22 नवंबर, शाम 4:22 2003 → 16 दिसंबर, रात 9:12 2003· 24 दिन
  16. मकर16 दिसंबर, रात 9:12 2003 → 10 जनवरी, सुबह 6:24 2004· 24 दिन

तारीखवार

सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।

जनवरी 2003

  • 1 जनवरीशाम 6:43

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 जनवरीदोपहर 3:32

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2003

  • 25 फ़रवरीरात 8:52

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 2003

  • 23 मार्चरात 3:53

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

अप्रैल 2003

  • 17 अप्रैलरात 3:01

    शुक्र का मीन में प्रवेश

मई 2003

  • 11 मईरात 10:12

    शुक्र का मेष में प्रवेश

जून 2003

  • 5 जूनदोपहर 3:13

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 30 जूनसुबह 5:56

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2003

  • 13 जुलाईरात 8:46

    शुक्र अस्त (25 सितंबर तक)†

  • 24 जुलाईशाम 5:29

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2003

  • 18 अगस्तरात 1:21

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2003

  • 11 सितंबरसुबह 6:11

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 25 सितंबरसुबह 4:15

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

अक्टूबर 2003

  • 5 अक्टूबरसुबह 10:20

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 29 अक्टूबरदोपहर 1:07

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2003

  • 22 नवंबरशाम 4:22

    शुक्र का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2003

  • 16 दिसंबररात 9:12

    शुक्र का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2003: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और