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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · शुक्र

2020 में शुक्र का गोचर

2020 में शुक्र 10 बार राशि बदलता है: 9 जनवरी को कुम्भ, 3 फ़रवरी को मीन, 29 फ़रवरी को मेष, 28 मार्च को वृषभ …। वक्री: 13 मई से।

2020 में शुक्र किन राशियों में है

  1. मकर15 दिसंबर, शाम 5:59 2019 → 9 जनवरी, सुबह 4:23 2020· 24 दिन
  2. कुम्भ9 जनवरी, सुबह 4:23 2020 → 3 फ़रवरी, रात 2:18 2020· 25 दिन
  3. मीन3 फ़रवरी, रात 2:18 2020 → 29 फ़रवरी, रात 1:33 2020· 26 दिन
  4. मेष29 फ़रवरी, रात 1:33 2020 → 28 मार्च, दोपहर 3:39 2020· 29 दिन
  5. वृषभ28 मार्च, दोपहर 3:39 2020 → 1 अगस्त, सुबह 5:11 2020· लगभग 4 महीने
  6. मिथुन1 अगस्त, सुबह 5:11 2020 → 1 सितंबर, रात 2:04 2020· 31 दिन
  7. कर्क1 सितंबर, रात 2:04 2020 → 28 सितंबर, रात 1:03 2020· 27 दिन
  8. सिंह28 सितंबर, रात 1:03 2020 → 23 अक्टूबर, सुबह 10:46 2020· 25 दिन
  9. कन्या23 अक्टूबर, सुबह 10:46 2020 → 17 नवंबर, रात 1:03 2020· 25 दिन
  10. तुला17 नवंबर, रात 1:03 2020 → 11 दिसंबर, सुबह 5:18 2020· 24 दिन
  11. वृश्चिक11 दिसंबर, सुबह 5:18 2020 → 4 जनवरी, सुबह 5:04 2021· 24 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 2020

  • 9 जनवरीसुबह 4:23

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 2020

  • 3 फ़रवरीरात 2:18

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 29 फ़रवरीरात 1:33

    शुक्र का मेष में प्रवेश

मार्च 2020

  • 28 मार्चदोपहर 3:39

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

मई 2020

  • 13 मईदोपहर 12:13

    शुक्र वृषभ 27°42′ पर वक्री

  • 29 मईरात 8:55

    शुक्र अस्त (9 जून तक)†

जून 2020

  • 9 जूनरात 1:37

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जूनदोपहर 12:19

    शुक्र वृषभ 11°12′ पर मार्गी

अगस्त 2020

  • 1 अगस्तसुबह 5:11

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

सितंबर 2020

  • 1 सितंबररात 2:04

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 28 सितंबररात 1:03

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 2020

  • 23 अक्टूबरसुबह 10:46

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

नवंबर 2020

  • 17 नवंबररात 1:03

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 2020

  • 11 दिसंबरसुबह 5:18

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2020: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और