पंचांग · गोचर · शुक्र
2025 में शुक्र का गोचर
2025 में शुक्र 10 बार राशि बदलता है: 27 जनवरी को मीन, 31 मई को मेष, 29 जून को वृषभ, 25 जुलाई को मिथुन …। वक्री: 1 मार्च से।
सभी समय एडिसन के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।
2025 में शुक्र किन राशियों में है
- कुम्भ28 दिसंबर, दोपहर 1:05 2024 → 27 जनवरी, रात 8:25 2025· 30 दिन
- मीन27 जनवरी, रात 8:25 2025 → 31 मई, रात 1:57 2025· लगभग 4 महीने
- मेष31 मई, रात 1:57 2025 → 29 जून, सुबह 4:33 2025· 29 दिन
- वृषभ29 जून, सुबह 4:33 2025 → 25 जुलाई, रात 11:20 2025· 27 दिन
- मिथुन25 जुलाई, रात 11:20 2025 → 20 अगस्त, दोपहर 3:43 2025· 26 दिन
- कर्क20 अगस्त, दोपहर 3:43 2025 → 14 सितंबर, दोपहर 2:41 2025· 25 दिन
- सिंह14 सितंबर, दोपहर 2:41 2025 → 9 अक्टूबर, रात 1:13 2025· 24 दिन
- कन्या9 अक्टूबर, रात 1:13 2025 → 2 नवंबर, रात 2:40 2025· 24 दिन
- तुला2 नवंबर, रात 2:40 2025 → 26 नवंबर, रात 12:46 2025· 24 दिन
- वृश्चिक26 नवंबर, रात 12:46 2025 → 19 दिसंबर, रात 9:09 2025· 24 दिन
- धनु19 दिसंबर, रात 9:09 2025 → 12 जनवरी, शाम 5:21 2026· 24 दिन
तारीखवार
सभी समय एडिसन के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।
जनवरी 2025
27 जनवरीरात 8:25
शुक्र का मीन में प्रवेश
मार्च 2025
1 मार्चशाम 7:34
शुक्र मीन 16°38′ पर वक्री
17 मार्चरात 9:45
शुक्र अस्त (27 मार्च तक)†
27 मार्चरात 9:03
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2025
12 अप्रैलरात 9:03
शुक्र मीन 0°25′ पर मार्गी
मई 2025
31 मईरात 1:57
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2025
29 जूनसुबह 4:33
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2025
25 जुलाईरात 11:20
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2025
20 अगस्तदोपहर 3:43
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2025
14 सितंबरदोपहर 2:41
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2025
9 अक्टूबररात 1:13
शुक्र का कन्या में प्रवेश
नवंबर 2025
2 नवंबररात 2:40
शुक्र का तुला में प्रवेश
26 नवंबररात 12:46
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबररात 1:21
शुक्र अस्त (17 फ़रवरी तक)†
दिसंबर 2025
19 दिसंबररात 9:09
शुक्र का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2025: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
