पंचांग · गोचर · शुक्र
2037 में शुक्र का गोचर
2037 में शुक्र 13 बार राशि बदलता है: 2 जनवरी को धनु, 26 जनवरी को मकर, 19 फ़रवरी को कुम्भ, 15 मार्च को मीन …। वक्री: 14 दिसंबर से।
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
2037 में शुक्र किन राशियों में है
- वृश्चिक9 दिसंबर, शाम 7:10 2036 → 2 जनवरी, शाम 6:29 2037· 24 दिन
- धनु2 जनवरी, शाम 6:29 2037 → 26 जनवरी, शाम 4:36 2037· 24 दिन
- मकर26 जनवरी, शाम 4:36 2037 → 19 फ़रवरी, दोपहर 3:17 2037· 24 दिन
- कुम्भ19 फ़रवरी, दोपहर 3:17 2037 → 15 मार्च, शाम 4:46 2037· 24 दिन
- मीन15 मार्च, शाम 4:46 2037 → 8 अप्रैल, रात 8:08 2037· 24 दिन
- मेष8 अप्रैल, रात 8:08 2037 → 3 मई, रात 3:06 2037· 24 दिन
- वृषभ3 मई, रात 3:06 2037 → 27 मई, दोपहर 1:54 2037· 24 दिन
- मिथुन27 मई, दोपहर 1:54 2037 → 21 जून, सुबह 4:48 2037· 25 दिन
- कर्क21 जून, सुबह 4:48 2037 → 16 जुलाई, रात 12:55 2037· 25 दिन
- सिंह16 जुलाई, रात 12:55 2037 → 10 अगस्त, सुबह 4:47 2037· 25 दिन
- कन्या10 अगस्त, सुबह 4:47 2037 → 4 सितंबर, रात 9:08 2037· 26 दिन
- तुला4 सितंबर, रात 9:08 2037 → 1 अक्टूबर, दोपहर 12:03 2037· 27 दिन
- वृश्चिक1 अक्टूबर, दोपहर 12:03 2037 → 30 अक्टूबर, सुबह 10:42 2037· 29 दिन
- धनु30 अक्टूबर, सुबह 10:42 2037 → 28 फ़रवरी, रात 3:19 2038· लगभग 4 महीने
तारीखवार
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
जनवरी 2037
2 जनवरीशाम 6:29
शुक्र का धनु में प्रवेश
26 जनवरीशाम 4:36
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2037
8 फ़रवरीसुबह 9:11
शुक्र अस्त (29 अप्रैल तक)†
19 फ़रवरीदोपहर 3:17
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2037
15 मार्चशाम 4:46
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2037
8 अप्रैलरात 8:08
शुक्र का मेष में प्रवेश
29 अप्रैलरात 1:44
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2037
3 मईरात 3:06
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
27 मईदोपहर 1:54
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2037
21 जूनसुबह 4:48
शुक्र का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2037
16 जुलाईरात 12:55
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2037
10 अगस्तसुबह 4:47
शुक्र का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2037
4 सितंबररात 9:08
शुक्र का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2037
1 अक्टूबरदोपहर 12:03
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
30 अक्टूबरसुबह 10:42
शुक्र का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2037
14 दिसंबरसुबह 4:45
शुक्र धनु 27°08′ पर वक्री
29 दिसंबरशाम 6:31
शुक्र अस्त (8 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2037: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
