पंचांग · गोचर · शुक्र
2040 में शुक्र का गोचर
2040 में शुक्र 15 बार राशि बदलता है: 18 जनवरी को धनु, 11 फ़रवरी को मकर, 6 मार्च को कुम्भ, 31 मार्च को मीन …।
सभी समय लौटोका के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
2040 में शुक्र किन राशियों में है
- वृश्चिक24 दिसंबर, शाम 7:56 2039 → 18 जनवरी, सुबह 8:26 2040· 25 दिन
- धनु18 जनवरी, सुबह 8:26 2040 → 11 फ़रवरी, दोपहर 3:19 2040· 24 दिन
- मकर11 फ़रवरी, दोपहर 3:19 2040 → 6 मार्च, रात 8:29 2040· 24 दिन
- कुम्भ6 मार्च, रात 8:29 2040 → 31 मार्च, रात 1:53 2040· 24 दिन
- मीन31 मार्च, रात 1:53 2040 → 24 अप्रैल, सुबह 8:40 2040· 24 दिन
- मेष24 अप्रैल, सुबह 8:40 2040 → 18 मई, शाम 5:09 2040· 24 दिन
- वृषभ18 मई, शाम 5:09 2040 → 12 जून, रात 2:51 2040· 24 दिन
- मिथुन12 जून, रात 2:51 2040 → 6 जुलाई, दोपहर 1:00 2040· 24 दिन
- कर्क6 जुलाई, दोपहर 1:00 2040 → 30 जुलाई, रात 11:22 2040· 24 दिन
- सिंह30 जुलाई, रात 11:22 2040 → 24 अगस्त, सुबह 10:41 2040· 24 दिन
- कन्या24 अगस्त, सुबह 10:41 2040 → 18 सितंबर, रात 12:19 2040· 25 दिन
- तुला18 सितंबर, रात 12:19 2040 → 12 अक्टूबर, शाम 5:47 2040· 25 दिन
- वृश्चिक12 अक्टूबर, शाम 5:47 2040 → 6 नवंबर, शाम 5:25 2040· 25 दिन
- धनु6 नवंबर, शाम 5:25 2040 → 2 दिसंबर, सुबह 5:29 2040· 26 दिन
- मकर2 दिसंबर, सुबह 5:29 2040 → 29 दिसंबर, रात 1:28 2040· 27 दिन
- कुम्भ29 दिसंबर, रात 1:28 2040 → 29 जनवरी, रात 9:03 2041· 32 दिन
तारीखवार
सभी समय लौटोका के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
जनवरी 2040
18 जनवरीसुबह 8:26
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2040
11 फ़रवरीदोपहर 3:19
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2040
6 मार्चरात 8:29
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
31 मार्चरात 1:53
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2040
23 अप्रैलरात 9:28
शुक्र अस्त (7 जुलाई तक)†
24 अप्रैलसुबह 8:40
शुक्र का मेष में प्रवेश
मई 2040
18 मईशाम 5:09
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जून 2040
12 जूनरात 2:51
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2040
6 जुलाईदोपहर 1:00
शुक्र का कर्क में प्रवेश
7 जुलाईरात 3:57
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जुलाईरात 11:22
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2040
24 अगस्तसुबह 10:41
शुक्र का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2040
18 सितंबररात 12:19
शुक्र का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2040
12 अक्टूबरशाम 5:47
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2040
6 नवंबरशाम 5:25
शुक्र का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2040
2 दिसंबरसुबह 5:29
शुक्र का मकर में प्रवेश
29 दिसंबररात 1:28
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2040: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
