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पंचांग · गोचर

गोचर 2026: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2026 में गुरु (बृहस्पति) 2 जून को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 31 अक्टूबर को सिंह में, राहु 6 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

आज ग्रह कहाँ हैं

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2026 का गोचर कैलेंडर

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2026

  • 13 जनवरीसुबह 4:06

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीदोपहर 3:14

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 16 जनवरीसुबह 4:32

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीसुबह 10:33

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2026

  • 3 फ़रवरीरात 10:02

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 6 फ़रवरीरात 1:19

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 फ़रवरीसुबह 4:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 4:15

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीदोपहर 3:23

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 फ़रवरीसुबह 11:54

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 26 फ़रवरीदोपहर 12:32

    बुध कुम्भ 28°21′ पर वक्री

  • 28 फ़रवरीरात 10:22

    बुध अस्त (13 मार्च तक)†

मार्च 2026

  • 2 मार्चरात 1:05

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 8 मार्चसुबह 9:49

    शनि अस्त (12 अप्रैल तक)†

  • 11 मार्चसुबह 9:31

    गुरु (बृहस्पति) मिथुन 20°52′ पर मार्गी

  • 13 मार्चरात 10:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 मार्चरात 1:09

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 21 मार्चरात 1:18

    बुध कुम्भ 14°16′ पर मार्गी

  • 26 मार्चसुबह 5:17

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 26 मार्चदोपहर 2:22

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2026

  • 2 अप्रैलदोपहर 3:34

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 11 अप्रैलरात 1:24

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 12 अप्रैलरात 12:19

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अप्रैलसुबह 9:39

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलदोपहर 3:55

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 30 अप्रैलसुबह 7:03

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2026

  • 1 मईरात 11:31

    बुध अस्त (26 मई तक)†

  • 11 मईदोपहर 12:42

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 14 मईसुबह 11:02

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मईरात 12:43

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 6:28

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 26 मईरात 11:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 मईसुबह 11:22

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2026

  • 2 जूनरात 1:20

    गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश

  • 8 जूनशाम 5:50

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 15 जूनदोपहर 12:58

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनरात 12:02

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 22 जूनदोपहर 3:29

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 29 जूनरात 11:20

    बुध कर्क 2°02′ पर वक्री

जुलाई 2026

  • 4 जुलाईशाम 7:20

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 5 जुलाईसुबह 9:27

    बुध अस्त (21 जुलाई तक)†

  • 7 जुलाईसुबह 11:19

    बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 जुलाईशाम 6:18

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (13 अगस्त तक)†

  • 16 जुलाईरात 11:44

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 21 जुलाईदोपहर 2:23

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 जुलाईसुबह 4:43

    बुध मिथुन 22°05′ पर मार्गी

  • 27 जुलाईरात 1:08

    शनि मीन 20°32′ पर वक्री

अगस्त 2026

  • 1 अगस्तसुबह 9:34

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 2 अगस्तरात 10:52

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 5 अगस्तरात 8:01

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 13 अगस्तशाम 4:08

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अगस्तरात 1:43

    बुध अस्त (13 सितंबर तक)†

  • 17 अगस्तसुबह 8:03

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 22 अगस्तशाम 7:42

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2026

  • 2 सितंबरदोपहर 1:47

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 7 सितंबरदोपहर 1:42

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 13 सितंबरशाम 6:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 सितंबरसुबह 7:58

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबरशाम 4:35

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 26 सितंबरदोपहर 12:47

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2026

  • 3 अक्टूबरदोपहर 12:59

    शुक्र तुला 14°16′ पर वक्री

  • 17 अक्टूबरशाम 7:57

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 19 अक्टूबरसुबह 8:30

    शुक्र अस्त (29 अक्टूबर तक)†

  • 24 अक्टूबरदोपहर 12:57

    बुध तुला 26°45′ पर वक्री

  • 29 अक्टूबरसुबह 9:54

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 अक्टूबरसुबह 6:19

    बुध अस्त (10 नवंबर तक)†

  • 31 अक्टूबरसुबह 11:04

    गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश

नवंबर 2026

  • 6 नवंबररात 1:46

    शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 10 नवंबरशाम 4:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 नवंबररात 8:13

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 13 नवंबररात 9:39

    बुध तुला 10°49′ पर मार्गी

  • 14 नवंबरसुबह 6:13

    शुक्र कन्या 28°38′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरशाम 7:49

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 22 नवंबरशाम 5:07

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 2026

  • 2 दिसंबरशाम 5:36

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 6 दिसंबररात 12:36

    राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 6 दिसंबररात 12:36

    केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 7 दिसंबररात 1:09

    बुध अस्त (23 जनवरी तक)†

  • 11 दिसंबरसुबह 5:46

    शनि मीन 13°42′ पर मार्गी

  • 13 दिसंबरसुबह 6:24

    गुरु (बृहस्पति) सिंह 2°48′ पर वक्री

  • 16 दिसंबरसुबह 10:30

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 22 दिसंबरसुबह 7:48

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

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