पंचांग · गोचर
गोचर 2026: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2026 में गुरु (बृहस्पति) 2 जून को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 31 अक्टूबर को सिंह में, राहु 6 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय मेलबर्न के स्थानीय समय (Australia/Melbourne, AEDT/AEST) में।
आज ग्रह कहाँ हैं
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यतुला में18 अक्टूबर 2026 से, 17 नवंबर 2026 तक
- चन्द्रमेष में26 अक्टूबर 2026 से, 28 अक्टूबर 2026 तक
- मंगलकर्क में18 सितंबर 2026 से, 13 नवंबर 2026 तक
- बुधवक्रीतुला में26 सितंबर 2026 से, 2 दिसंबर 2026 तक
- गुरु (बृहस्पति)कर्क में2 जून 2026 से, 31 अक्टूबर 2026 तक
- शुक्रवक्रीतुला में2 सितंबर 2026 से, 6 नवंबर 2026 तक
- शनिवक्रीमीन में30 मार्च 2025 से, 3 जून 2027 तक
- राहुकुम्भ में19 मई 2025 से, 6 दिसंबर 2026 तक
- केतुसिंह में19 मई 2025 से, 6 दिसंबर 2026 तक
2026 का गोचर कैलेंडर
सभी समय मेलबर्न के स्थानीय समय (Australia/Melbourne, AEDT/AEST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2026
13 जनवरीसुबह 9:21
शुक्र का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 8:29
सूर्य का मकर में प्रवेश
16 जनवरीसुबह 9:47
मंगल का मकर में प्रवेश
17 जनवरीदोपहर 3:48
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2026
4 फ़रवरीरात 3:17
बुध का कुम्भ में प्रवेश
6 फ़रवरीसुबह 6:34
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
10 फ़रवरीसुबह 9:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 फ़रवरीसुबह 9:30
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
17 फ़रवरीरात 8:38
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
23 फ़रवरीशाम 5:09
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
26 फ़रवरीशाम 5:47
बुध कुम्भ 28°21′ पर वक्री
मार्च 2026
1 मार्चरात 3:37
बुध अस्त (14 मार्च तक)†
2 मार्चसुबह 6:20
शुक्र का मीन में प्रवेश
8 मार्चदोपहर 3:04
शनि अस्त (12 अप्रैल तक)†
11 मार्चदोपहर 2:46
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 20°52′ पर मार्गी
14 मार्चरात 3:39
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मार्चसुबह 6:24
सूर्य का मीन में प्रवेश
21 मार्चसुबह 6:33
बुध कुम्भ 14°16′ पर मार्गी
26 मार्चसुबह 10:32
शुक्र का मेष में प्रवेश
26 मार्चशाम 7:37
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2026
2 अप्रैलरात 8:49
मंगल का मीन में प्रवेश
11 अप्रैलसुबह 5:39
बुध का मीन में प्रवेश
12 अप्रैलसुबह 4:34
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अप्रैलदोपहर 1:54
सूर्य का मेष में प्रवेश
19 अप्रैलरात 8:10
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
30 अप्रैलसुबह 11:18
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2026
2 मईरात 3:46
बुध अस्त (27 मई तक)†
11 मईशाम 4:57
मंगल का मेष में प्रवेश
14 मईदोपहर 3:17
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
15 मईसुबह 4:58
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 मईसुबह 10:43
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
27 मईरात 3:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मईदोपहर 3:37
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2026
2 जूनसुबह 5:35
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
8 जूनरात 10:05
शुक्र का कर्क में प्रवेश
15 जूनशाम 5:13
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनसुबह 4:17
मंगल का वृषभ में प्रवेश
22 जूनशाम 7:44
बुध का कर्क में प्रवेश
30 जूनरात 3:35
बुध कर्क 2°02′ पर वक्री
जुलाई 2026
4 जुलाईरात 11:35
शुक्र का सिंह में प्रवेश
5 जुलाईदोपहर 1:42
बुध अस्त (21 जुलाई तक)†
7 जुलाईदोपहर 3:34
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जुलाईरात 10:33
गुरु (बृहस्पति) अस्त (13 अगस्त तक)†
17 जुलाईरात 3:59
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईशाम 6:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जुलाईसुबह 8:58
बुध मिथुन 22°05′ पर मार्गी
27 जुलाईसुबह 5:23
शनि मीन 20°32′ पर वक्री
अगस्त 2026
1 अगस्तदोपहर 1:49
शुक्र का कन्या में प्रवेश
3 अगस्तरात 3:07
मंगल का मिथुन में प्रवेश
6 अगस्तरात 12:16
बुध का कर्क में प्रवेश
13 अगस्तरात 8:23
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अगस्तसुबह 5:58
बुध अस्त (13 सितंबर तक)†
17 अगस्तदोपहर 12:18
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तरात 11:57
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2026
2 सितंबरशाम 6:02
शुक्र का तुला में प्रवेश
7 सितंबरशाम 5:57
बुध का कन्या में प्रवेश
13 सितंबररात 11:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरदोपहर 12:13
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबररात 8:50
मंगल का कर्क में प्रवेश
26 सितंबरशाम 5:02
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2026
3 अक्टूबरशाम 5:14
शुक्र तुला 14°16′ पर वक्री
18 अक्टूबररात 1:12
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरदोपहर 1:45
शुक्र अस्त (29 अक्टूबर तक)†
24 अक्टूबरशाम 6:12
बुध तुला 26°45′ पर वक्री
29 अक्टूबरदोपहर 3:09
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबरसुबह 11:34
बुध अस्त (10 नवंबर तक)†
31 अक्टूबरशाम 4:19
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
नवंबर 2026
6 नवंबरसुबह 7:01
शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
10 नवंबररात 9:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 नवंबररात 1:28
मंगल का सिंह में प्रवेश
14 नवंबररात 2:54
बुध तुला 10°49′ पर मार्गी
14 नवंबरसुबह 11:28
शुक्र कन्या 28°38′ पर मार्गी
17 नवंबररात 1:04
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबररात 10:22
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2026
2 दिसंबररात 10:51
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
6 दिसंबरसुबह 5:51
राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
6 दिसंबरसुबह 5:51
केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
7 दिसंबरसुबह 6:24
बुध अस्त (24 जनवरी तक)†
11 दिसंबरसुबह 11:01
शनि मीन 13°42′ पर मार्गी
13 दिसंबरसुबह 11:39
गुरु (बृहस्पति) सिंह 2°48′ पर वक्री
16 दिसंबरदोपहर 3:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबरदोपहर 1:03
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
