पंचांग · गोचर
गोचर 2026: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2026 में गुरु (बृहस्पति) 1 जून को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 31 अक्टूबर को सिंह में, राहु 5 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
आज ग्रह कहाँ हैं
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यतुला में17 अक्टूबर 2026 से, 16 नवंबर 2026 तक
- चन्द्रमेष में25 अक्टूबर 2026 से, 27 अक्टूबर 2026 तक
- मंगलकर्क में18 सितंबर 2026 से, 12 नवंबर 2026 तक
- बुधवक्रीतुला में26 सितंबर 2026 से, 2 दिसंबर 2026 तक
- गुरु (बृहस्पति)कर्क में1 जून 2026 से, 31 अक्टूबर 2026 तक
- शुक्रवक्रीतुला में2 सितंबर 2026 से, 5 नवंबर 2026 तक
- शनिवक्रीमीन में29 मार्च 2025 से, 2 जून 2027 तक
- राहुकुम्भ में18 मई 2025 से, 5 दिसंबर 2026 तक
- केतुसिंह में18 मई 2025 से, 5 दिसंबर 2026 तक
2026 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2026
12 जनवरीरात 10:21
शुक्र का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 9:29
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 10:47
मंगल का मकर में प्रवेश
17 जनवरीसुबह 4:48
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2026
3 फ़रवरीशाम 4:17
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 फ़रवरीशाम 7:34
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
9 फ़रवरीरात 10:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीरात 10:30
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
17 फ़रवरीसुबह 9:38
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
23 फ़रवरीसुबह 6:09
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
26 फ़रवरीसुबह 6:47
बुध कुम्भ 28°21′ पर वक्री
28 फ़रवरीशाम 4:37
बुध अस्त (13 मार्च तक)†
मार्च 2026
1 मार्चशाम 7:20
शुक्र का मीन में प्रवेश
8 मार्चसुबह 4:04
शनि अस्त (11 अप्रैल तक)†
11 मार्चरात 3:46
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 20°52′ पर मार्गी
13 मार्चशाम 4:39
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मार्चशाम 7:24
सूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्चशाम 7:33
बुध कुम्भ 14°16′ पर मार्गी
25 मार्चरात 11:32
शुक्र का मेष में प्रवेश
26 मार्चसुबह 8:37
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2026
2 अप्रैलसुबह 10:49
मंगल का मीन में प्रवेश
10 अप्रैलरात 8:39
बुध का मीन में प्रवेश
11 अप्रैलशाम 7:34
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अप्रैलसुबह 4:54
सूर्य का मेष में प्रवेश
19 अप्रैलसुबह 11:10
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
30 अप्रैलरात 2:18
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2026
1 मईशाम 6:46
बुध अस्त (26 मई तक)†
11 मईसुबह 7:57
मंगल का मेष में प्रवेश
14 मईसुबह 6:17
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
14 मईशाम 7:58
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 मईरात 1:43
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
26 मईशाम 6:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मईसुबह 6:37
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2026
1 जूनरात 8:35
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
8 जूनदोपहर 1:05
शुक्र का कर्क में प्रवेश
15 जूनसुबह 8:13
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनशाम 7:17
मंगल का वृषभ में प्रवेश
22 जूनसुबह 10:44
बुध का कर्क में प्रवेश
29 जूनशाम 6:35
बुध कर्क 2°02′ पर वक्री
जुलाई 2026
4 जुलाईदोपहर 2:35
शुक्र का सिंह में प्रवेश
5 जुलाईसुबह 4:42
बुध अस्त (21 जुलाई तक)†
7 जुलाईसुबह 6:34
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जुलाईदोपहर 1:33
गुरु (बृहस्पति) अस्त (13 अगस्त तक)†
16 जुलाईशाम 6:59
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईसुबह 9:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जुलाईरात 11:58
बुध मिथुन 22°05′ पर मार्गी
26 जुलाईरात 8:23
शनि मीन 20°32′ पर वक्री
अगस्त 2026
1 अगस्तसुबह 4:49
शुक्र का कन्या में प्रवेश
2 अगस्तशाम 6:07
मंगल का मिथुन में प्रवेश
5 अगस्तदोपहर 3:16
बुध का कर्क में प्रवेश
13 अगस्तसुबह 11:23
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
13 अगस्तरात 8:58
बुध अस्त (13 सितंबर तक)†
17 अगस्तरात 3:18
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तदोपहर 2:57
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2026
2 सितंबरसुबह 9:02
शुक्र का तुला में प्रवेश
7 सितंबरसुबह 8:57
बुध का कन्या में प्रवेश
13 सितंबरदोपहर 2:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबररात 3:13
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरसुबह 11:50
मंगल का कर्क में प्रवेश
26 सितंबरसुबह 8:02
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2026
3 अक्टूबरसुबह 8:14
शुक्र तुला 14°16′ पर वक्री
17 अक्टूबरदोपहर 3:12
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबररात 3:45
शुक्र अस्त (29 अक्टूबर तक)†
24 अक्टूबरसुबह 8:12
बुध तुला 26°45′ पर वक्री
29 अक्टूबरसुबह 4:09
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबररात 12:34
बुध अस्त (10 नवंबर तक)†
31 अक्टूबरसुबह 5:19
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
नवंबर 2026
5 नवंबररात 8:01
शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
10 नवंबरसुबह 10:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 नवंबरदोपहर 2:28
मंगल का सिंह में प्रवेश
13 नवंबरदोपहर 3:54
बुध तुला 10°49′ पर मार्गी
14 नवंबररात 12:28
शुक्र कन्या 28°38′ पर मार्गी
16 नवंबरदोपहर 2:04
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबरसुबह 11:22
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2026
2 दिसंबरसुबह 11:51
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
5 दिसंबरशाम 6:51
राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
5 दिसंबरशाम 6:51
केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
6 दिसंबरशाम 7:24
बुध अस्त (23 जनवरी तक)†
11 दिसंबररात 12:01
शनि मीन 13°42′ पर मार्गी
13 दिसंबररात 12:39
गुरु (बृहस्पति) सिंह 2°48′ पर वक्री
16 दिसंबरसुबह 4:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबररात 2:03
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
