मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · पंचक · सिएटल

अगला पंचक बुध, 18 नवंबर, रात 3:57 से

चन्द्रमा जब अन्तिम पाँच नक्षत्रों से गुज़रता है, वह काल पंचक कहलाता है। नीचे अगले चार महीनों के पंचक हैं, और यह कि ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PDT/PST) में।

अक्टूबर 2026 से फ़रवरी 2027 तक

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PDT/PST) में। पंचक का आरम्भ और अन्त चन्द्रमा की स्थिति से है, इसलिए ये क्षण हर नगर में एक ही हैं; केवल घड़ी का समय नगर के अनुसार बदलता है।

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। पंचक के नाम वार से रखने की परम्परा और उनके अर्थ पंचांगों में अलग हैं, और कुछ परम्पराएँ पंचक का आरम्भ धनिष्ठा के आरम्भ से नहीं, उसके उत्तरार्ध से ही मानती हैं (जैसा यहाँ)।

यह भी देखें: पंचक (शब्दकोश) · नक्षत्र · मुहूर्त खोजें · भद्रा

समझें

पंचक क्या है

जब चन्द्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अन्त तक, यानी अन्तिम पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा 3-4, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, रेवती) में होता है, उस काल को पंचक कहते हैं। यह कुम्भ और मीन राशि में चन्द्रमा का समय है, हर 27-28 दिन में एक बार, लगभग पाँच दिन।

ग्रंथ क्या कहते हैं

मुहूर्त चिन्तामणि जैसे मुहूर्त ग्रंथ पंचक में पाँच काम टालने की परम्परा बताते हैं: लकड़ी या घास का संग्रह, चारपाई बनाना, घर की छत डालना, दक्षिण दिशा की यात्रा, और अन्त्येष्टि को एक अतिरिक्त विधि (कुश के पाँच पुतलों) के साथ करना। इनके अतिरिक्त कामों के लिए पंचांग सामान्य मुहूर्त नियम देखते हैं।

पंचक के नाम

पंचांग पंचक का नाम उस वार से रखते हैं जिस दिन वह शुरू हो: रविवार से रोग, सोमवार से राज, मंगलवार से अग्नि, शुक्रवार से चोर और शनिवार से मृत्यु पंचक; बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक का कोई विशेष नाम नहीं। ये परम्परागत नाम हैं; इनके अर्थ और महत्त्व पर पंचांग एकमत नहीं।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से चन्द्रमा की स्पष्ट स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। जिस क्षण चन्द्रमा 306°40′ (धनिष्ठा का तीसरा पद) पार करे वहाँ पंचक शुरू, और 360° (रेवती का अन्त) पर समाप्त। यह क्षण हर नगर में एक ही है।

पंचांग में और