पंचांग · भद्रा · पोर्ट लुई
भद्रा अभी चल रही है, रात 9:22 तक (वास: भूलोक (पृथ्वी))
भद्रा विष्टि करण का दूसरा नाम है, जो हर मास आठ बार आता है। नीचे अगले दो महीनों की हर भद्रा है, उसके वास के साथ, और यह कि ग्रंथ उसके बारे में क्या कहते हैं।
सभी समय पोर्ट लुई के स्थानीय समय (Indian/Mauritius, UTC+4) में।
आने वाली भद्रा
सभी समय पोर्ट लुई के स्थानीय समय (Indian/Mauritius, UTC+4) में। ये क्षण हर नगर में एक ही हैं; केवल घड़ी का समय नगर के अनुसार बदलता है।
अक्टूबर 2026
रवि, 25 अक्टूबर, सुबह 10:26 → रात 9:22अभी
पूर्णिमा, पूर्वार्ध · चन्द्रमा मीन में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: भूलोक (पृथ्वी) · मुहूर्त चुनते समय पंचांग इसी भद्रा को छोड़ते हैं।
10 घंटे 56 मिनट
बुध, 28 अक्टूबर, दोपहर 1:07 → रात 11:37
कृष्ण तृतीया, उत्तरार्ध · चन्द्रमा वृषभ में
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 30 मिनट
शनि, 31 अक्टूबर, दोपहर 3:27 → 1 नवंबर, रात 2:22
कृष्ण सप्तमी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा मिथुन में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 54 मिनट
नवंबर 2026
मंगल, 3 नवंबर, रात 9:56 → 4 नवंबर, सुबह 9:33
कृष्ण दशमी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा सिंह में
वास†: भूलोक (पृथ्वी) · मुहूर्त चुनते समय पंचांग इसी भद्रा को छोड़ते हैं।
11 घंटे 37 मिनट
शनि, 7 नवंबर, सुबह 9:18 → रात 9:35
कृष्ण चतुर्दशी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा कन्या में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
12 घंटे 17 मिनट
शुक्र, 13 नवंबर, सुबह 5:54 → शाम 7:13
शुक्ल चतुर्थी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा धनु में
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
13 घंटे 18 मिनट
मंगल, 17 नवंबर, रात 2:50 → दोपहर 3:47
शुक्ल अष्टमी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा मकर में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
12 घंटे 58 मिनट
शुक्र, 20 नवंबर, शाम 5:30 → 21 नवंबर, सुबह 5:02
शुक्ल एकादशी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा मीन में
वास†: भूलोक (पृथ्वी) · मुहूर्त चुनते समय पंचांग इसी भद्रा को छोड़ते हैं।
11 घंटे 31 मिनट
सोम, 23 नवंबर, रात 10:12 → 24 नवंबर, सुबह 8:35
पूर्णिमा, पूर्वार्ध · चन्द्रमा मेष में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 23 मिनट
गुरु, 26 नवंबर, रात 10:00 → 27 नवंबर, सुबह 8:19
कृष्ण तृतीया, उत्तरार्ध · चन्द्रमा मिथुन में
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 18 मिनट
सोम, 30 नवंबर, रात 12:17 → सुबह 11:25
कृष्ण सप्तमी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा कर्क में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: भूलोक (पृथ्वी) · मुहूर्त चुनते समय पंचांग इसी भद्रा को छोड़ते हैं।
11 घंटे 8 मिनट
दिसंबर 2026
गुरु, 3 दिसंबर, सुबह 9:24 → रात 9:34
कृष्ण दशमी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा कन्या में
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
12 घंटे 10 मिनट
सोम, 7 दिसंबर, रात 12:52 → दोपहर 1:45
कृष्ण चतुर्दशी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा तुला में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
12 घंटे 53 मिनट
रवि, 13 दिसंबर, रात 1:58 → दोपहर 3:18
शुक्ल चतुर्थी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा मकर में
वास†: पाताल · ग्रंथों के अनुसार पाताल की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
13 घंटे 20 मिनट
बुध, 16 दिसंबर, रात 9:16 → 17 दिसंबर, सुबह 9:42
शुक्ल अष्टमी, पूर्वार्ध · चन्द्रमा कुम्भ में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: भूलोक (पृथ्वी) · मुहूर्त चुनते समय पंचांग इसी भद्रा को छोड़ते हैं।
12 घंटे 26 मिनट
रवि, 20 दिसंबर, सुबह 7:48 → शाम 6:45
शुक्ल एकादशी, उत्तरार्ध · चन्द्रमा मेष में
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 57 मिनट
बुध, 23 दिसंबर, सुबह 9:17 → शाम 7:23
पूर्णिमा, पूर्वार्ध · चन्द्रमा वृषभ में (बीच में राशि बदलता है)
वास†: स्वर्ग · ग्रंथों के अनुसार स्वर्ग की भद्रा पृथ्वी पर नहीं गिनी जाती।
10 घंटे 6 मिनट
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। वास का नियम सभी पंचांग नहीं मानते: कुछ हर भद्रा को समान रूप से छोड़ते हैं, कुछ भद्रा के मुख और पुच्छ भागों में भेद करते हैं। जब चन्द्रमा भद्रा के बीच राशि बदले, तो यहाँ मध्य-क्षण की राशि ली गई है।
यह भी देखें: भद्रा (शब्दकोश) · करण · रक्षा बन्धन · होलिका दहन · पंचक
किसी दिन की भद्रा दिन के पंचांग में भी दिखती है: आज
समझें
भद्रा क्या है
करण तिथि का आधा भाग है। सात चर करण क्रम से घूमते हैं, और उनमें सातवाँ विष्टि है, जिसे भद्रा भी कहते हैं। यह हर चान्द्र मास में आठ बार आती है: शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और एकादशी के उत्तरार्ध, अष्टमी और पूर्णिमा के पूर्वार्ध; कृष्ण पक्ष की तृतीया और दशमी के उत्तरार्ध, सप्तमी और चतुर्दशी के पूर्वार्ध में। हर भद्रा लगभग 11 से 13 घंटे की होती है।
ग्रंथ क्या कहते हैं
मुहूर्त चिन्तामणि जैसे ग्रंथ विवाह, गृह-प्रवेश या यात्रा जैसे किसी नए आरम्भ का समय चुनते हुए विष्टि करण को छोड़ते हैं। रक्षा बन्धन और होलिका दहन का समय भी भद्रा को छोड़कर निकाला जाता है। साथ ही वे कहते हैं कि भद्रा का वास चन्द्रमा की राशि से तय होता है, और केवल पृथ्वी (भूलोक) पर वास वाली भद्रा ही गिनी जाती है।
भद्रा का वास
चन्द्रमा मेष, वृषभ, मिथुन या वृश्चिक में हो तो भद्रा स्वर्ग में, कन्या, तुला, धनु या मकर में हो तो पाताल में, और कर्क, सिंह, कुम्भ या मीन में हो तो पृथ्वी पर मानी जाती है। स्वर्ग और पाताल की भद्रा को ग्रंथ पृथ्वी के कामों के लिए नहीं गिनते।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति। करण 6° के चरण हैं (चन्द्र-सूर्य अन्तर के); हर सीमा का क्षण सटीक निकाला गया है। वास भद्रा के मध्य-क्षण पर चन्द्रमा की निरयण (लाहिरी) राशि से है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- गोचरहर ग्रह का राशि-परिवर्तन, वक्री-मार्गी और अस्त।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
