भद्रा
Bhadrā (Viṣṭi karaṇa)
विष्टि करण, जिसे पंचांग कार्यारंभ के लिए अनुपयुक्त बताते हैं।
परिभाषा
भद्रा सातवें चर करण विष्टि का लोक-प्रचलित नाम है, जो प्रत्येक चांद्र मास में आठ बार आता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे शुभ कार्यारंभ के लिए न चुने जाने वाले समयों में गिनते हैं, और परवर्ती परंपरा चंद्रमा की राशि के अनुसार भद्रा का वास स्वर्ग, पाताल या मृत्युलोक में मानती है, जिनमें केवल अंतिम को प्रासंगिक गिना जाता है। अधिकांश पंचांगों में इसका समय दिया जाता है।
इस शब्द का प्रयोग करने वाले लेख
- पंचांगव्याख्या
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7 मिनट का पाठ · 27 सितंबर 2026
