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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1972: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1972 में गुरु (बृहस्पति) 6 जनवरी को धनु में, राहु 5 सितंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1972 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1972 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1972

  • 6 जनवरीसुबह 6:33

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

  • 6 जनवरीरात 10:13

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 11 जनवरीदोपहर 12:32

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 जनवरीशाम 6:27

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 27 जनवरीसुबह 4:39

    बुध अस्त (4 मार्च तक)†

  • 28 जनवरीरात 1:38

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 31 जनवरीशाम 4:21

    शनि वृषभ 6°07′ पर मार्गी

  • 31 जनवरीरात 9:48

    मंगल का मेष में प्रवेश

फ़रवरी 1972

  • 5 फ़रवरीसुबह 4:35

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 7:23

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीरात 3:25

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 1972

  • 1 मार्चदोपहर 3:33

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 2 मार्चसुबह 7:02

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 4 मार्चरात 9:42

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मार्चसुबह 4:16

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चसुबह 10:25

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मार्चरात 12:08

    बुध मीन 22°23′ पर वक्री

  • 24 मार्चसुबह 6:47

    बुध अस्त (7 अप्रैल तक)†

  • 28 मार्चशाम 7:36

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

अप्रैल 1972

  • 7 अप्रैलदोपहर 3:11

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 अप्रैलदोपहर 12:49

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 8:59

    बुध मीन 10°13′ पर मार्गी

  • 25 अप्रैलसुबह 5:30

    गुरु (बृहस्पति) धनु 14°52′ पर वक्री

  • 30 अप्रैलदोपहर 12:40

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

मई 1972

  • 2 मईदोपहर 2:35

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 8 मईशाम 7:20

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 13 मईदोपहर 12:54

    शनि अस्त (18 जून तक)†

  • 14 मईसुबह 9:44

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 23 मईरात 8:26

    बुध अस्त (17 जून तक)†

  • 26 मईसुबह 8:09

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 27 मईसुबह 8:42

    शुक्र मिथुन 11°17′ पर वक्री

जून 1972

  • 9 जूनसुबह 7:01

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 12 जूनशाम 5:52

    शुक्र अस्त (22 जून तक)†

  • 14 जूनशाम 4:23

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनसुबह 6:15

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जूनदोपहर 2:20

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 18 जूनशाम 4:33

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 जूनशाम 7:45

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 22 जूनरात 11:22

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 जूनशाम 6:49

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1972

  • 9 जुलाईसुबह 10:26

    शुक्र वृषभ 24°45′ पर मार्गी

  • 16 जुलाईरात 3:18

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईदोपहर 12:20

    मंगल अस्त (27 अक्टूबर तक)†

  • 25 जुलाईसुबह 4:31

    बुध कर्क 28°53′ पर वक्री

  • 27 जुलाईरात 3:57

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 9:04

    बुध अस्त (15 अगस्त तक)†

अगस्त 1972

  • 4 अगस्तरात 11:24

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 15 अगस्तशाम 6:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अगस्तसुबह 11:43

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 18 अगस्तसुबह 4:08

    बुध कर्क 16°59′ पर मार्गी

  • 25 अगस्तदोपहर 1:48

    गुरु (बृहस्पति) धनु 5°01′ पर मार्गी

सितंबर 1972

  • 1 सितंबरशाम 7:08

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 1 सितंबररात 10:09

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 4 सितंबरसुबह 11:25

    बुध अस्त (10 अक्टूबर तक)†

  • 5 सितंबरशाम 4:59

    राहु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 सितंबरशाम 4:59

    केतु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 सितंबरसुबह 11:39

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबरसुबह 4:11

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबररात 1:24

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 29 सितंबररात 8:06

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 1972

  • 2 अक्टूबररात 9:26

    शनि वृषभ 27°08′ पर वक्री

  • 5 अक्टूबरदोपहर 1:07

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 10 अक्टूबररात 3:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अक्टूबररात 11:34

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 25 अक्टूबरशाम 4:07

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 25 अक्टूबररात 10:18

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 अक्टूबररात 9:28

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

नवंबर 1972

  • 6 नवंबरसुबह 6:15

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 15 नवंबररात 11:18

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 1:56

    बुध वृश्चिक 18°59′ पर वक्री

  • 19 नवंबरसुबह 11:19

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 20 नवंबररात 10:33

    बुध अस्त (1 दिसंबर तक)†

दिसंबर 1972

  • 1 दिसंबररात 11:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 5 दिसंबररात 9:52

    बुध वृश्चिक 2°46′ पर मार्गी

  • 13 दिसंबरशाम 6:10

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 दिसंबरदोपहर 1:51

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 21 दिसंबरसुबह 6:39

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 दिसंबरदोपहर 3:12

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (24 जनवरी तक)†

  • 31 दिसंबरसुबह 10:45

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और