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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1973: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1973 में गुरु (बृहस्पति) 25 जनवरी को मकर में, शनि 10 जून को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1973 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1973 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1973

  • 5 जनवरीरात 2:04

    बुध अस्त (16 फ़रवरी तक)†

  • 6 जनवरीशाम 7:31

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 14 जनवरीरात 12:30

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीरात 9:26

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 24 जनवरीदोपहर 3:13

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जनवरीसुबह 11:55

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 30 जनवरीशाम 7:06

    शुक्र का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1973

  • 3 फ़रवरीरात 2:10

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 6 फ़रवरीसुबह 10:15

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीदोपहर 1:27

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीशाम 6:48

    शनि वृषभ 20°10′ पर मार्गी

  • 16 फ़रवरीसुबह 10:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 फ़रवरीशाम 6:55

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीदोपहर 12:02

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 1973

  • 1 मार्चसुबह 5:08

    शुक्र अस्त (18 मई तक)†

  • 4 मार्चशाम 6:27

    बुध मीन 5°07′ पर वक्री

  • 7 मार्चरात 2:52

    बुध अस्त (20 मार्च तक)†

  • 13 मार्चशाम 4:46

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 मार्चसुबह 10:21

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चरात 9:29

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 19 मार्चरात 8:14

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चसुबह 11:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 मार्चदोपहर 1:49

    बुध कुम्भ 21°32′ पर मार्गी

अप्रैल 1973

  • 11 अप्रैलसुबह 9:06

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलरात 12:07

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 13 अप्रैलशाम 6:55

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 29 अप्रैलसुबह 4:19

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

मई 1973

  • 2 मईशाम 5:28

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 7 मईसुबह 7:06

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 7 मईरात 10:34

    बुध अस्त (1 जून तक)†

  • 14 मईदोपहर 3:54

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 17 मईरात 11:07

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 18 मईसुबह 4:14

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मईसुबह 11:35

    शनि अस्त (3 जुलाई तक)†

  • 31 मईरात 3:22

    गुरु (बृहस्पति) मकर 18°39′ पर वक्री

  • 31 मईशाम 5:09

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 1973

  • 1 जूनरात 12:14

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 1 जूनशाम 4:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 जूनशाम 5:44

    शनि का मिथुन में प्रवेश

  • 11 जूनसुबह 7:23

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 14 जूनरात 10:35

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनसुबह 6:31

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 25 जूनसुबह 6:04

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1973

  • 3 जुलाईशाम 7:03

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 6 जुलाईरात 10:29

    बुध कर्क 9°52′ पर वक्री

  • 12 जुलाईशाम 6:49

    बुध अस्त (28 जुलाई तक)†

  • 16 जुलाईसुबह 9:30

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 19 जुलाईरात 10:25

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 27 जुलाईदोपहर 12:57

    बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 28 जुलाईदोपहर 3:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जुलाईसुबह 6:11

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 3:17

    बुध मिथुन 29°23′ पर मार्गी

अगस्त 1973

  • 3 अगस्तदोपहर 2:12

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 13 अगस्तशाम 7:55

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 16 अगस्तशाम 5:55

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तशाम 6:44

    बुध अस्त (20 सितंबर तक)†

  • 25 अगस्तदोपहर 1:59

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 1973

  • 8 सितंबररात 1:33

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 10 सितंबरसुबह 4:58

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 16 सितंबरशाम 5:51

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबरसुबह 4:45

    मंगल मेष 15°47′ पर वक्री

  • 20 सितंबरशाम 5:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 सितंबरदोपहर 1:43

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 28 सितंबरशाम 7:12

    गुरु (बृहस्पति) मकर 8°48′ पर मार्गी

अक्टूबर 1973

  • 3 अक्टूबररात 8:31

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 5:47

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 10:50

    शनि मिथुन 11°16′ पर वक्री

  • 23 अक्टूबरसुबह 6:05

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरदोपहर 3:59

    बुध वृश्चिक 3°07′ पर वक्री

  • 30 अक्टूबरशाम 6:11

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 1973

  • 5 नवंबररात 3:13

    बुध अस्त (16 नवंबर तक)†

  • 6 नवंबररात 1:31

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 नवंबरसुबह 5:33

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरसुबह 9:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 19 नवंबरशाम 7:44

    बुध तुला 17°04′ पर मार्गी

  • 26 नवंबरसुबह 5:39

    मंगल मेष 1°49′ पर मार्गी

  • 30 नवंबररात 2:05

    शुक्र का मकर में प्रवेश

दिसंबर 1973

  • 4 दिसंबरदोपहर 12:14

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 दिसंबररात 8:32

    बुध अस्त (30 जनवरी तक)†

  • 15 दिसंबररात 8:09

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 24 दिसंबरशाम 4:17

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और