पंचांग · गोचर
गोचर 1976: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1976 में गुरु (बृहस्पति) 25 फ़रवरी को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 8 जुलाई को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 8 दिसंबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 1976 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 1975 से, 14 जनवरी 1976 तक
- चन्द्रधनु में31 दिसंबर 1975 से, 2 जनवरी 1976 तक
- मंगलवक्रीवृषभ में14 दिसंबर 1975 से, 2 मार्च 1976 तक
- बुधमकर में29 दिसंबर 1975 से, 2 फ़रवरी 1976 तक
- गुरु (बृहस्पति)मीन में11 सितंबर 1975 से, 25 फ़रवरी 1976 तक
- शुक्रवृश्चिक में27 दिसंबर 1975 से, 21 जनवरी 1976 तक
- शनिवक्रीकर्क में23 जुलाई 1975 से, 7 सितंबर 1977 तक
- राहुतुला में12 अक्टूबर 1975 से, 1 मई 1977 तक
- केतुमेष में12 अक्टूबर 1975 से, 1 मई 1977 तक
1976 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1976
14 जनवरीदोपहर 12:12
बुध मकर 15°47′ पर वक्री
14 जनवरीशाम 7:05
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीदोपहर 2:20
बुध अस्त (29 जनवरी तक)†
21 जनवरीरात 3:01
मंगल वृषभ 21°13′ पर मार्गी
21 जनवरीसुबह 4:11
शुक्र का धनु में प्रवेश
29 जनवरीरात 12:08
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
फ़रवरी 1976
2 फ़रवरीसुबह 11:55
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
4 फ़रवरीसुबह 4:27
बुध धनु 29°49′ पर मार्गी
5 फ़रवरीरात 10:29
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 8:05
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 3:54
शुक्र का मकर में प्रवेश
25 फ़रवरीशाम 5:09
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश
मार्च 1976
2 मार्चशाम 6:39
मंगल का मिथुन में प्रवेश
5 मार्चदोपहर 12:19
बुध का कुम्भ में प्रवेश
10 मार्चरात 12:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 4:59
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चसुबह 10:27
बुध अस्त (15 अप्रैल तक)†
23 मार्चसुबह 10:55
बुध का मीन में प्रवेश
28 मार्चरात 1:58
शनि कर्क 2°30′ पर मार्गी
अप्रैल 1976
3 अप्रैलसुबह 8:16
शुक्र का मीन में प्रवेश
7 अप्रैलसुबह 11:40
बुध का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलरात 2:55
गुरु (बृहस्पति) अस्त (13 मई तक)†
13 अप्रैलदोपहर 1:31
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलसुबह 7:01
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अप्रैलरात 2:48
बुध का वृषभ में प्रवेश
27 अप्रैलशाम 4:56
शुक्र का मेष में प्रवेश
मई 1976
4 मईरात 10:28
मंगल का कर्क में प्रवेश
9 मईसुबह 10:33
बुध वृषभ 10°13′ पर वक्री
12 मईसुबह 6:01
बुध अस्त (29 मई तक)†
12 मईसुबह 6:47
शुक्र अस्त (24 जुलाई तक)†
13 मईरात 2:37
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईसुबह 10:25
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईरात 2:41
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
29 मईरात 1:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
जून 1976
2 जूनसुबह 6:50
बुध वृषभ 1°26′ पर मार्गी
14 जूनशाम 5:04
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनदोपहर 12:54
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
26 जूनसुबह 9:46
मंगल का सिंह में प्रवेश
जुलाई 1976
1 जुलाईसुबह 10:10
बुध का मिथुन में प्रवेश
3 जुलाईदोपहर 12:50
बुध अस्त (29 जुलाई तक)†
8 जुलाईशाम 5:12
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
9 जुलाईरात 10:44
शुक्र का कर्क में प्रवेश
11 जुलाईदोपहर 3:46
शनि अस्त (16 अगस्त तक)†
15 जुलाईरात 11:44
बुध का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईरात 3:58
सूर्य का कर्क में प्रवेश
24 जुलाईशाम 4:35
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जुलाईसुबह 4:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 जुलाईसुबह 4:00
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 1976
3 अगस्तसुबह 7:52
शुक्र का सिंह में प्रवेश
14 अगस्तसुबह 7:01
मंगल का कन्या में प्रवेश
16 अगस्तदोपहर 12:25
सूर्य का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तरात 8:51
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अगस्तसुबह 4:44
बुध का कन्या में प्रवेश
27 अगस्तशाम 4:55
शुक्र का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1976
9 सितंबररात 3:33
बुध कन्या 14°20′ पर वक्री
16 सितंबररात 3:55
बुध अस्त (28 सितंबर तक)†
16 सितंबरदोपहर 12:21
सूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सितंबररात 11:52
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 7°41′ पर वक्री
21 सितंबररात 3:05
शुक्र का तुला में प्रवेश
28 सितंबररात 10:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 सितंबरसुबह 7:00
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
29 सितंबरसुबह 10:56
मंगल का तुला में प्रवेश
30 सितंबरदोपहर 12:12
मंगल अस्त (26 जनवरी तक)†
अक्टूबर 1976
1 अक्टूबरसुबह 9:29
बुध सिंह 29°37′ पर मार्गी
3 अक्टूबरसुबह 11:58
बुध का कन्या में प्रवेश
15 अक्टूबरदोपहर 3:31
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
17 अक्टूबररात 12:17
सूर्य का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 2:05
बुध अस्त (3 दिसंबर तक)†
25 अक्टूबरदोपहर 2:09
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 1976
9 नवंबरसुबह 7:41
शुक्र का धनु में प्रवेश
12 नवंबररात 2:43
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
12 नवंबररात 9:45
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबररात 12:02
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
27 नवंबररात 11:46
शनि कर्क 23°21′ पर वक्री
दिसंबर 1976
2 दिसंबरसुबह 7:32
बुध का धनु में प्रवेश
3 दिसंबरसुबह 7:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
4 दिसंबरसुबह 7:17
शुक्र का मकर में प्रवेश
8 दिसंबरदोपहर 3:52
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
15 दिसंबरदोपहर 2:37
सूर्य का धनु में प्रवेश
23 दिसंबरदोपहर 1:32
मंगल का धनु में प्रवेश
28 दिसंबरसुबह 10:03
बुध धनु 29°47′ पर वक्री
30 दिसंबररात 12:48
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
31 दिसंबररात 9:51
बुध अस्त (12 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
