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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1977: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1977 में गुरु (बृहस्पति) 22 फ़रवरी को वृषभ में, राहु 1 मई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 18 जुलाई को मिथुन में, शनि 7 सितंबर को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1977 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1977 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1977

  • 12 जनवरीरात 12:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीरात 1:20

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीशाम 4:41

    गुरु (बृहस्पति) मेष 27°38′ पर मार्गी

  • 17 जनवरीदोपहर 1:31

    बुध धनु 13°34′ पर मार्गी

  • 26 जनवरीरात 12:41

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जनवरीरात 8:07

    शुक्र का मीन में प्रवेश

फ़रवरी 1977

  • 1 फ़रवरीसुबह 7:36

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 6 फ़रवरीसुबह 9:22

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीदोपहर 2:21

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 फ़रवरीशाम 5:32

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश

  • 26 फ़रवरीशाम 5:10

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 फ़रवरीरात 1:54

    बुध अस्त (30 मार्च तक)†

मार्च 1977

  • 9 मार्चरात 1:25

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 12 मार्चरात 1:00

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 11:17

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 15 मार्चसुबह 10:36

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 8:29

    शुक्र मेष 1°01′ पर वक्री

  • 23 मार्चसुबह 9:54

    शुक्र का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 मार्चदोपहर 3:15

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 30 मार्चशाम 4:26

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 1977

  • 1 अप्रैलदोपहर 12:06

    शुक्र अस्त (11 अप्रैल तक)†

  • 11 अप्रैलसुबह 11:41

    शनि कर्क 16°25′ पर मार्गी

  • 11 अप्रैलदोपहर 12:21

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 अप्रैलशाम 7:51

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलदोपहर 12:50

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 20 अप्रैलसुबह 7:38

    बुध मेष 20°59′ पर वक्री

  • 22 अप्रैलशाम 5:27

    बुध अस्त (8 मई तक)†

  • 27 अप्रैलदोपहर 3:19

    शुक्र मीन 14°43′ पर मार्गी

मई 1977

  • 1 मईरात 1:49

    राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 1 मईरात 1:49

    केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 8 मईशाम 5:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मईरात 2:22

    बुध मेष 11°10′ पर मार्गी

  • 14 मईशाम 4:45

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 20 मईदोपहर 12:11

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 जून तक)†

  • 28 मईशाम 5:18

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 29 मईशाम 7:36

    शुक्र का मेष में प्रवेश

जून 1977

  • 6 जूनरात 9:48

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 14 जूनरात 11:20

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 18 जूनरात 2:43

    बुध अस्त (12 जुलाई तक)†

  • 19 जूनशाम 7:36

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जूनदोपहर 12:25

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 30 जूनशाम 5:11

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

जुलाई 1977

  • 7 जुलाईसुबह 11:59

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 8 जुलाईशाम 4:20

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 12 जुलाईरात 9:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईसुबह 10:08

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईसुबह 10:13

    गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश

  • 24 जुलाईसुबह 5:38

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 26 जुलाईसुबह 10:29

    शनि अस्त (31 अगस्त तक)†

  • 28 जुलाईसुबह 7:44

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

अगस्त 1977

  • 16 अगस्तशाम 6:28

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 21 अगस्तरात 11:36

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 22 अगस्तशाम 7:48

    बुध सिंह 27°14′ पर वक्री

  • 23 अगस्तसुबह 9:07

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 29 अगस्तरात 11:40

    बुध अस्त (12 सितंबर तक)†

  • 31 अगस्तसुबह 10:19

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

सितंबर 1977

  • 7 सितंबरसुबह 10:09

    शनि का सिंह में प्रवेश

  • 12 सितंबरसुबह 11:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 सितंबररात 8:34

    बुध सिंह 13°25′ पर मार्गी

  • 16 सितंबरशाम 6:21

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरदोपहर 12:44

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 30 सितंबरदोपहर 3:21

    बुध अस्त (12 नवंबर तक)†

  • 30 सितंबररात 9:18

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 1977

  • 12 अक्टूबररात 1:44

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 13 अक्टूबररात 12:56

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 6:17

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 1:28

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 24 अक्टूबरदोपहर 3:26

    गुरु (बृहस्पति) मिथुन 12°36′ पर वक्री

नवंबर 1977

  • 5 नवंबरसुबह 5:24

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 5 नवंबरशाम 4:59

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 12 नवंबरसुबह 9:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबरसुबह 6:03

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 26 नवंबरसुबह 7:40

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 29 नवंबरसुबह 4:00

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 1977

  • 11 दिसंबरशाम 5:11

    शनि सिंह 7°00′ पर वक्री

  • 11 दिसंबरशाम 5:50

    शुक्र अस्त (4 मार्च तक)†

  • 12 दिसंबरसुबह 7:40

    बुध धनु 13°55′ पर वक्री

  • 13 दिसंबररात 12:37

    मंगल कर्क 18°01′ पर वक्री

  • 15 दिसंबररात 8:41

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 6:55

    बुध अस्त (27 दिसंबर तक)†

  • 23 दिसंबररात 12:31

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 26 दिसंबरशाम 7:06

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 27 दिसंबरसुबह 6:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और