मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1995: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1995 में शनि 2 जून को मीन में, शनि 10 अगस्त को कुम्भ में, राहु 6 दिसंबर को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 7 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 1995 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1995 का गोचर कैलेंडर

सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1995

  • 2 जनवरीरात 9:22

    मंगल सिंह 8°53′ पर वक्री

  • 3 जनवरीरात 1:40

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 7 जनवरीरात 3:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीसुबह 10:26

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 26 जनवरीरात 1:15

    बुध मकर 27°29′ पर वक्री

  • 28 जनवरीरात 9:30

    बुध अस्त (9 फ़रवरी तक)†

  • 30 जनवरीसुबह 5:54

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 1995

  • 9 फ़रवरीदोपहर 3:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 फ़रवरीरात 9:34

    मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 12 फ़रवरीरात 11:25

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीसुबह 5:06

    बुध मकर 11°50′ पर मार्गी

  • 17 फ़रवरीरात 2:12

    शनि अस्त (23 मार्च तक)†

  • 25 फ़रवरीदोपहर 2:40

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 1995

  • 10 मार्चसुबह 8:32

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 8:18

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 23 मार्चरात 12:21

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 23 मार्चसुबह 5:03

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 मार्चशाम 5:22

    मंगल कर्क 19°23′ पर मार्गी

  • 29 मार्चरात 9:27

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चरात 12:55

    बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†

अप्रैल 1995

  • 1 अप्रैलदोपहर 12:45

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 21°36′ पर वक्री

  • 14 अप्रैलसुबह 5:51

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 10:05

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 17 अप्रैलरात 1:28

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 27 अप्रैलसुबह 9:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अप्रैलरात 2:05

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 1995

  • 10 मईरात 11:30

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 11 मईरात 9:17

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 15 मईरात 2:46

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 24 मईसुबह 10:01

    बुध वृषभ 24°34′ पर वक्री

  • 27 मईशाम 6:04

    बुध अस्त (13 जून तक)†

जून 1995

  • 2 जूनरात 3:07

    शनि का मीन में प्रवेश

  • 5 जूनदोपहर 2:42

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 13 जूनशाम 7:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनसुबह 9:24

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनसुबह 7:59

    बुध वृषभ 16°01′ पर मार्गी

  • 30 जूनसुबह 5:42

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 1995

  • 6 जुलाईसुबह 8:12

    शनि मीन 0°58′ पर वक्री

  • 6 जुलाईशाम 4:12

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 10 जुलाईशाम 5:11

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 15 जुलाईदोपहर 1:15

    बुध अस्त (11 अगस्त तक)†

  • 15 जुलाईदोपहर 3:31

    शुक्र अस्त (27 सितंबर तक)†

  • 16 जुलाईरात 8:20

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 23 जुलाईरात 1:06

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 24 जुलाईशाम 5:23

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

अगस्त 1995

  • 2 अगस्तशाम 6:01

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 11°44′ पर मार्गी

  • 6 अगस्तशाम 4:47

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 10 अगस्तरात 12:39

    शनि का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 अगस्तरात 3:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 अगस्तसुबह 4:47

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 18 अगस्तरात 1:19

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 24 अगस्तशाम 4:05

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 28 अगस्तरात 8:14

    मंगल का तुला में प्रवेश

सितंबर 1995

  • 11 सितंबरसुबह 6:06

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 4:46

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबरसुबह 10:14

    बुध कन्या 26°23′ पर वक्री

  • 27 सितंबररात 1:07

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 सितंबरसुबह 4:02

    बुध अस्त (11 अक्टूबर तक)†

अक्टूबर 1995

  • 5 अक्टूबरसुबह 9:05

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 11 अक्टूबरसुबह 11:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 अक्टूबरसुबह 4:11

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 अक्टूबररात 1:47

    बुध कन्या 11°12′ पर मार्गी

  • 17 अक्टूबरशाम 4:44

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 29 अक्टूबरसुबह 10:37

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरसुबह 6:08

    बुध अस्त (18 दिसंबर तक)†

  • 31 अक्टूबरदोपहर 12:54

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 1995

  • 16 नवंबरदोपहर 3:30

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबररात 12:58

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 21 नवंबररात 8:18

    शनि कुम्भ 24°12′ पर मार्गी

  • 22 नवंबरसुबह 8:20

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 22 नवंबरदोपहर 1:33

    शुक्र का धनु में प्रवेश

दिसंबर 1995

  • 4 दिसंबररात 11:12

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (1 जनवरी तक)†

  • 6 दिसंबरसुबह 7:43

    राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 6 दिसंबरसुबह 7:43

    केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 7 दिसंबररात 12:49

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

  • 8 दिसंबररात 3:26

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 6:05

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरशाम 5:59

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 18 दिसंबररात 8:19

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 दिसंबररात 8:21

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 31 दिसंबरदोपहर 12:30

    मंगल का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और