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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1998: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1998 में गुरु (बृहस्पति) 8 जनवरी को कुम्भ में, शनि 17 अप्रैल को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 25 मई को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 10 सितंबर को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 1998 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1998 का गोचर कैलेंडर

सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1998

  • 7 जनवरीसुबह 8:07

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 8 जनवरीसुबह 10:02

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश

  • 11 जनवरीदोपहर 12:44

    शुक्र अस्त (21 जनवरी तक)†

  • 14 जनवरीसुबह 5:12

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीदोपहर 1:37

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 जनवरीसुबह 6:23

    शुक्र का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 जनवरीसुबह 10:12

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जनवरीदोपहर 3:22

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1998

  • 1 फ़रवरीरात 8:41

    बुध अस्त (10 मार्च तक)†

  • 5 फ़रवरीरात 9:27

    शुक्र धनु 24°38′ पर मार्गी

  • 9 फ़रवरीरात 1:43

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (9 मार्च तक)†

  • 12 फ़रवरीशाम 6:10

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीरात 11:27

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 23 फ़रवरीसुबह 7:40

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीशाम 5:47

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीशाम 6:25

    मंगल अस्त (16 जुलाई तक)†

मार्च 1998

  • 5 मार्चरात 1:51

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 9 मार्चशाम 6:48

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 मार्चसुबह 6:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मार्चदोपहर 3:01

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 27 मार्चरात 12:43

    शनि अस्त (1 मई तक)†

  • 27 मार्चशाम 7:41

    बुध मीन 27°40′ पर वक्री

  • 30 मार्चरात 3:13

    बुध अस्त (13 अप्रैल तक)†

  • 31 मार्चसुबह 5:57

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

अप्रैल 1998

  • 4 अप्रैलरात 8:42

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 13 अप्रैलशाम 7:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अप्रैलरात 12:30

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 17 अप्रैलसुबह 8:14

    शनि का मेष में प्रवेश

  • 20 अप्रैलसुबह 8:31

    बुध मीन 15°58′ पर मार्गी

  • 28 अप्रैलसुबह 7:56

    शुक्र का मीन में प्रवेश

मई 1998

  • 1 मईसुबह 4:20

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 मईसुबह 11:50

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 मईरात 9:22

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईदोपहर 1:50

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 24 मईशाम 4:55

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 25 मईरात 11:30

    गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश

  • 29 मईरात 3:06

    बुध अस्त (22 जून तक)†

  • 29 मईसुबह 6:50

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 1998

  • 12 जूनसुबह 10:22

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनरात 3:58

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जूनसुबह 8:22

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 22 जूनदोपहर 12:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जूनसुबह 8:23

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 27 जूनसुबह 9:16

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1998

  • 14 जुलाईदोपहर 1:06

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईदोपहर 2:51

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईशाम 5:37

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जुलाईरात 2:31

    गुरु (बृहस्पति) मीन 4°14′ पर वक्री

  • 20 जुलाईसुबह 9:42

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 3:27

    बुध सिंह 4°26′ पर वक्री

अगस्त 1998

  • 6 अगस्तरात 11:52

    बुध अस्त (21 अगस्त तक)†

  • 8 अगस्तसुबह 8:53

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 10 अगस्तदोपहर 1:17

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 अगस्तसुबह 7:52

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 15 अगस्तशाम 7:37

    शनि मेष 9°47′ पर वक्री

  • 16 अगस्तरात 11:16

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 21 अगस्तदोपहर 2:54

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अगस्तरात 11:35

    बुध कर्क 22°08′ पर मार्गी

सितंबर 1998

  • 1 सितंबररात 8:30

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 4 सितंबररात 1:25

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 9 सितंबरशाम 7:16

    बुध अस्त (16 अक्टूबर तक)†

  • 10 सितंबरसुबह 6:59

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 सितंबररात 11:13

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबररात 2:56

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबररात 9:14

    शुक्र अस्त (9 दिसंबर तक)†

  • 26 सितंबररात 1:28

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 27 सितंबरदोपहर 1:09

    मंगल का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 1998

  • 8 अक्टूबरसुबह 7:21

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 16 अक्टूबरशाम 5:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 11:11

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबररात 2:00

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 28 अक्टूबररात 3:12

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 1998

  • 12 नवंबररात 11:17

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 13 नवंबरदोपहर 1:18

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 24°19′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरसुबह 10:02

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरदोपहर 1:56

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 21 नवंबरसुबह 11:45

    बुध वृश्चिक 23°43′ पर वक्री

  • 26 नवंबरसुबह 4:02

    बुध अस्त (7 दिसंबर तक)†

दिसंबर 1998

  • 6 दिसंबररात 8:45

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 7 दिसंबरसुबह 4:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 दिसंबरशाम 5:15

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 दिसंबरसुबह 6:29

    बुध वृश्चिक 7°28′ पर मार्गी

  • 16 दिसंबररात 12:43

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 29 दिसंबरशाम 4:14

    शनि मेष 2°56′ पर मार्गी

  • 30 दिसंबरशाम 6:26

    शुक्र का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और