पंचांग · गोचर
गोचर 2001: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2001 में गुरु (बृहस्पति) 15 जून को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय अटलांटा के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।
1 जनवरी 2001 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2000 से, 13 जनवरी 2001 तक
- चन्द्रकुम्भ में29 दिसंबर 2000 से, 1 जनवरी 2001 तक
- मंगलतुला में13 दिसंबर 2000 से, 3 फ़रवरी 2001 तक
- बुधधनु में18 दिसंबर 2000 से, 6 जनवरी 2001 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीवृषभ में2 जून 2000 से, 15 जून 2001 तक
- शुक्रकुम्भ में28 दिसंबर 2000 से, 26 जनवरी 2001 तक
- शनिवक्रीवृषभ में6 जून 2000 से, 22 जुलाई 2002 तक
- राहुमिथुन में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
- केतुधनु में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
2001 का गोचर कैलेंडर
सभी समय अटलांटा के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2001
6 जनवरीदोपहर 3:39
बुध का मकर में प्रवेश
13 जनवरीशाम 6:43
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीसुबह 5:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जनवरीशाम 7:53
शनि वृषभ 0°11′ पर मार्गी
25 जनवरीरात 3:53
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 7°19′ पर मार्गी
25 जनवरीदोपहर 12:58
बुध का कुम्भ में प्रवेश
26 जनवरीशाम 7:24
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2001
3 फ़रवरीसुबह 4:02
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
3 फ़रवरीरात 8:57
बुध कुम्भ 6°50′ पर वक्री
6 फ़रवरीदोपहर 1:19
बुध अस्त (18 फ़रवरी तक)†
12 फ़रवरीसुबह 7:44
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 5:18
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
18 फ़रवरीदोपहर 2:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीसुबह 10:41
बुध मकर 21°32′ पर मार्गी
मार्च 2001
8 मार्चरात 8:05
शुक्र मीन 23°52′ पर वक्री
11 मार्चदोपहर 3:10
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 4:40
सूर्य का मीन में प्रवेश
24 मार्चरात 11:32
शुक्र अस्त (4 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2001
2 अप्रैलदोपहर 12:34
बुध का मीन में प्रवेश
4 अप्रैलरात 12:23
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
9 अप्रैलसुबह 7:58
बुध अस्त (5 मई तक)†
10 अप्रैलसुबह 8:45
मंगल का धनु में प्रवेश
13 अप्रैलदोपहर 2:13
सूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैलशाम 5:19
बुध का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलरात 12:35
शुक्र मीन 7°35′ पर मार्गी
मई 2001
2 मईरात 10:35
बुध का वृषभ में प्रवेश
5 मईशाम 6:08
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 मईसुबह 9:36
शनि अस्त (12 जून तक)†
11 मईदोपहर 12:03
मंगल धनु 5°11′ पर वक्री
14 मईसुबह 11:05
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईसुबह 9:48
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 मईसुबह 5:14
गुरु (बृहस्पति) अस्त (29 जून तक)†
30 मईदोपहर 2:23
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2001
4 जूनरात 1:21
बुध मिथुन 6°05′ पर वक्री
7 जूनरात 11:17
बुध अस्त (24 जून तक)†
10 जूनरात 1:56
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जूनसुबह 10:44
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जूनशाम 5:39
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनरात 10:01
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
19 जूनसुबह 6:27
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
24 जूनरात 10:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जूनरात 1:49
बुध वृषभ 27°23′ पर मार्गी
29 जूनदोपहर 12:56
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जूनशाम 7:57
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2001
6 जुलाईरात 2:19
बुध का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 4:28
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईशाम 6:48
मंगल वृश्चिक 21°14′ पर मार्गी
23 जुलाईरात 8:47
बुध अस्त (20 अगस्त तक)†
26 जुलाईरात 11:36
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
27 जुलाईसुबह 6:38
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2001
10 अगस्तरात 8:54
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तदोपहर 12:48
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तसुबह 11:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 अगस्तरात 8:08
शुक्र का कर्क में प्रवेश
26 अगस्तसुबह 11:47
मंगल का धनु में प्रवेश
27 अगस्तरात 8:23
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2001
15 सितंबररात 9:17
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबरदोपहर 12:42
सूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सितंबरसुबह 6:45
बुध का तुला में प्रवेश
26 सितंबरशाम 7:34
शनि वृषभ 21°05′ पर वक्री
अक्टूबर 2001
1 अक्टूबरदोपहर 3:22
बुध तुला 5°49′ पर वक्री
8 अक्टूबररात 2:41
बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†
10 अक्टूबरसुबह 9:00
शुक्र का कन्या में प्रवेश
11 अक्टूबरसुबह 7:13
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अक्टूबररात 12:39
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरसुबह 11:31
मंगल का मकर में प्रवेश
20 अक्टूबररात 2:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 अक्टूबररात 8:23
बुध कन्या 20°19′ पर मार्गी
नवंबर 2001
2 नवंबरसुबह 10:18
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 21°49′ पर वक्री
3 नवंबरसुबह 10:15
बुध का तुला में प्रवेश
3 नवंबरसुबह 11:00
शुक्र का तुला में प्रवेश
10 नवंबरसुबह 7:55
बुध अस्त (29 दिसंबर तक)†
15 नवंबररात 11:27
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबरशाम 4:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
27 नवंबरसुबह 9:18
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
30 नवंबरसुबह 6:35
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
दिसंबर 2001
3 दिसंबरदोपहर 3:32
शुक्र अस्त (24 फ़रवरी तक)†
11 दिसंबरशाम 5:46
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबरदोपहर 2:06
सूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरसुबह 5:43
शुक्र का धनु में प्रवेश
29 दिसंबरदोपहर 1:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 दिसंबरशाम 4:41
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
