पंचांग · गोचर
गोचर 2002: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2002 में राहु 16 फ़रवरी को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 5 जुलाई को कर्क में, शनि 23 जुलाई को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2002 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2001 से, 14 जनवरी 2002 तक
- चन्द्रकर्क में31 दिसंबर 2001 से, 2 जनवरी 2002 तक
- मंगलकुम्भ में30 नवंबर 2001 से, 10 जनवरी 2002 तक
- बुधमकर में30 दिसंबर 2001 से, 7 मार्च 2002 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीमिथुन में16 जून 2001 से, 5 जुलाई 2002 तक
- शुक्रधनु में21 दिसंबर 2001 से, 14 जनवरी 2002 तक
- शनिवक्रीवृषभ में6 जून 2000 से, 23 जुलाई 2002 तक
- राहुमिथुन में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
- केतुधनु में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
2002 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2002
10 जनवरीदोपहर 1:43
मंगल का मीन में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 5:51
सूर्य का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 6:56
शुक्र का मकर में प्रवेश
18 जनवरीरात 8:49
बुध मकर 20°36′ पर वक्री
21 जनवरीरात 8:22
बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†
फ़रवरी 2002
2 फ़रवरीसुबह 9:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 फ़रवरीसुबह 4:10
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
8 फ़रवरीरात 2:00
शनि वृषभ 14°09′ पर मार्गी
8 फ़रवरीशाम 5:28
बुध मकर 4°45′ पर मार्गी
12 फ़रवरीशाम 6:52
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीशाम 7:32
राहु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
16 फ़रवरीशाम 7:32
केतु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
21 फ़रवरीरात 12:44
मंगल का मेष में प्रवेश
25 फ़रवरीरात 12:27
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2002
1 मार्चदोपहर 3:31
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 11°44′ पर मार्गी
3 मार्चरात 3:51
शुक्र का मीन में प्रवेश
7 मार्चरात 8:04
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चदोपहर 3:47
सूर्य का मीन में प्रवेश
23 मार्चसुबह 6:27
बुध अस्त (20 अप्रैल तक)†
26 मार्चसुबह 7:34
बुध का मीन में प्रवेश
27 मार्चसुबह 7:44
शुक्र का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2002
4 अप्रैलरात 8:30
मंगल का वृषभ में प्रवेश
10 अप्रैलदोपहर 1:07
बुध का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलरात 1:19
सूर्य का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलदोपहर 12:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अप्रैलशाम 6:37
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
26 अप्रैलरात 1:20
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2002
14 मईरात 10:11
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईदोपहर 12:19
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
15 मईशाम 7:49
बुध वृषभ 16°06′ पर वक्री
18 मईशाम 7:36
बुध अस्त (4 जून तक)†
19 मईसुबह 6:43
मंगल का मिथुन में प्रवेश
22 मईसुबह 10:29
शनि अस्त (27 जून तक)†
जून 2002
4 जूनशाम 6:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 जूनशाम 4:12
बुध वृषभ 7°28′ पर मार्गी
9 जूनशाम 4:30
शुक्र का कर्क में प्रवेश
15 जूनसुबह 4:44
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनसुबह 11:01
मंगल अस्त (30 सितंबर तक)†
27 जूनशाम 4:21
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
जुलाई 2002
4 जुलाईरात 12:49
बुध का मिथुन में प्रवेश
4 जुलाईसुबह 4:38
मंगल का कर्क में प्रवेश
5 जुलाईरात 1:14
गुरु (बृहस्पति) अस्त (4 अगस्त तक)†
5 जुलाईसुबह 7:55
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
5 जुलाईदोपहर 12:49
शुक्र का सिंह में प्रवेश
8 जुलाईशाम 5:00
बुध अस्त (3 अगस्त तक)†
16 जुलाईदोपहर 3:32
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 2:52
बुध का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईरात 3:42
शनि का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2002
1 अगस्तदोपहर 3:11
शुक्र का कन्या में प्रवेश
3 अगस्तरात 12:37
बुध का सिंह में प्रवेश
3 अगस्तशाम 5:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
4 अगस्तरात 2:25
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अगस्तरात 11:53
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 1:13
मंगल का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तरात 12:49
बुध का कन्या में प्रवेश
31 अगस्तरात 10:43
शुक्र का तुला में प्रवेश
सितंबर 2002
14 सितंबररात 8:37
बुध कन्या 19°21′ पर वक्री
16 सितंबररात 11:47
सूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सितंबरशाम 6:32
बुध अस्त (4 अक्टूबर तक)†
30 सितंबररात 10:35
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2002
4 अक्टूबरसुबह 7:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अक्टूबरसुबह 4:39
मंगल का कन्या में प्रवेश
6 अक्टूबररात 8:26
बुध कन्या 4°26′ पर मार्गी
10 अक्टूबरशाम 7:33
शुक्र तुला 21°43′ पर वक्री
11 अक्टूबरदोपहर 1:31
शनि मिथुन 5°11′ पर वक्री
17 अक्टूबरसुबह 11:45
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 9:25
बुध अस्त (9 दिसंबर तक)†
26 अक्टूबरदोपहर 12:19
शुक्र अस्त (5 नवंबर तक)†
28 अक्टूबरसुबह 6:50
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2002
5 नवंबरदोपहर 12:29
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
15 नवंबरदोपहर 2:45
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 10:35
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नवंबरसुबह 7:13
शुक्र तुला 6°10′ पर मार्गी
22 नवंबररात 2:11
मंगल का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2002
4 दिसंबरदोपहर 12:05
गुरु (बृहस्पति) कर्क 24°13′ पर वक्री
4 दिसंबररात 8:44
बुध का धनु में प्रवेश
9 दिसंबररात 11:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 दिसंबररात 1:14
सूर्य का धनु में प्रवेश
26 दिसंबररात 1:29
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
