पंचांग · गोचर
गोचर 2003: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2003 में शनि 8 जनवरी को वृषभ में, शनि 8 अप्रैल को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 30 जुलाई को सिंह में, राहु 6 सितंबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ब्रिस्बेन के स्थानीय समय (Australia/Brisbane, AEST) में।
1 जनवरी 2003 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2002 से, 14 जनवरी 2003 तक
- चन्द्रवृश्चिक में30 दिसंबर 2002 से, 1 जनवरी 2003 तक
- मंगलतुला में22 नवंबर 2002 से, 8 जनवरी 2003 तक
- बुधमकर में26 दिसंबर 2002 से, 10 जनवरी 2003 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीकर्क में5 जुलाई 2002 से, 30 जुलाई 2003 तक
- शुक्रतुला में1 सितंबर 2002 से, 1 जनवरी 2003 तक
- शनिवक्रीमिथुन में23 जुलाई 2002 से, 8 जनवरी 2003 तक
- राहुवृषभ में17 फ़रवरी 2002 से, 6 सितंबर 2003 तक
- केतुवृश्चिक में17 फ़रवरी 2002 से, 6 सितंबर 2003 तक
2003 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ब्रिस्बेन के स्थानीय समय (Australia/Brisbane, AEST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2003
1 जनवरीदोपहर 3:43
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
3 जनवरीसुबह 4:18
बुध मकर 4°34′ पर वक्री
6 जनवरीदोपहर 12:58
बुध अस्त (17 जनवरी तक)†
8 जनवरीरात 3:04
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
8 जनवरीशाम 6:21
शनि का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
10 जनवरीरात 3:27
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जनवरीरात 9:57
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीशाम 5:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जनवरीसुबह 11:08
बुध धनु 18°24′ पर मार्गी
30 जनवरीदोपहर 12:32
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2003
8 फ़रवरीदोपहर 12:44
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 10:54
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीशाम 6:09
शनि वृषभ 28°14′ पर मार्गी
23 फ़रवरीशाम 6:06
मंगल का धनु में प्रवेश
25 फ़रवरीशाम 5:52
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2003
1 मार्चशाम 6:47
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 मार्चदोपहर 2:57
बुध अस्त (5 अप्रैल तक)†
15 मार्चसुबह 7:46
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चशाम 7:13
बुध का मीन में प्रवेश
23 मार्चरात 1:53
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2003
2 अप्रैलशाम 7:16
बुध का मेष में प्रवेश
4 अप्रैलदोपहर 1:21
गुरु (बृहस्पति) कर्क 14°10′ पर मार्गी
5 अप्रैलसुबह 7:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 अप्रैलरात 12:48
शनि का मिथुन में प्रवेश
12 अप्रैलसुबह 9:01
मंगल का मकर में प्रवेश
14 अप्रैलशाम 4:17
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलरात 1:01
शुक्र का मीन में प्रवेश
26 अप्रैलरात 9:58
बुध मेष 26°39′ पर वक्री
29 अप्रैलसुबह 9:52
बुध अस्त (15 मई तक)†
मई 2003
11 मईरात 8:12
शुक्र का मेष में प्रवेश
15 मईदोपहर 1:11
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईशाम 4:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 मईशाम 5:33
बुध मेष 17°13′ पर मार्गी
जून 2003
4 जूनसुबह 6:18
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
5 जूनदोपहर 1:13
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
6 जूनशाम 7:47
शनि अस्त (13 जुलाई तक)†
8 जूनरात 11:12
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 जूनशाम 7:49
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
23 जूनशाम 4:25
बुध अस्त (18 जुलाई तक)†
26 जूनरात 10:29
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 जूनरात 3:56
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2003
10 जुलाईरात 10:46
बुध का कर्क में प्रवेश
13 जुलाईसुबह 4:17
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
13 जुलाईशाम 6:46
शुक्र अस्त (25 सितंबर तक)†
17 जुलाईसुबह 6:42
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईशाम 4:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जुलाईदोपहर 3:29
शुक्र का कर्क में प्रवेश
27 जुलाईरात 2:12
बुध का सिंह में प्रवेश
29 जुलाईशाम 5:32
मंगल कुम्भ 16°14′ पर वक्री
30 जुलाईशाम 4:22
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2003
8 अगस्तरात 12:47
गुरु (बृहस्पति) अस्त (6 सितंबर तक)†
17 अगस्तदोपहर 3:07
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तरात 11:21
शुक्र का सिंह में प्रवेश
21 अगस्तसुबह 11:33
बुध का कन्या में प्रवेश
28 अगस्तरात 11:40
बुध कन्या 2°25′ पर वक्री
सितंबर 2003
4 सितंबररात 10:10
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
5 सितंबररात 3:07
बुध अस्त (18 सितंबर तक)†
6 सितंबरसुबह 8:30
राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
6 सितंबरसुबह 8:30
केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
6 सितंबरदोपहर 12:32
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
11 सितंबरसुबह 4:11
शुक्र का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 3:04
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरसुबह 9:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 सितंबरशाम 6:52
बुध सिंह 18°18′ पर मार्गी
25 सितंबररात 2:15
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
27 सितंबरशाम 5:56
मंगल कुम्भ 6°13′ पर मार्गी
अक्टूबर 2003
3 अक्टूबरशाम 5:38
बुध का कन्या में प्रवेश
5 अक्टूबरसुबह 7:20
शुक्र का तुला में प्रवेश
6 अक्टूबरदोपहर 1:48
बुध अस्त (19 नवंबर तक)†
18 अक्टूबररात 3:01
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरसुबह 6:37
बुध का तुला में प्रवेश
26 अक्टूबरसुबह 9:12
शनि मिथुन 19°20′ पर वक्री
29 अक्टूबरसुबह 10:07
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2003
8 नवंबरशाम 6:26
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबररात 2:49
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरदोपहर 2:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 नवंबरदोपहर 1:22
शुक्र का धनु में प्रवेश
28 नवंबररात 8:38
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2003
6 दिसंबरसुबह 4:45
मंगल का मीन में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 5:28
सूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 6:12
शुक्र का मकर में प्रवेश
18 दिसंबररात 2:00
बुध धनु 18°39′ पर वक्री
21 दिसंबररात 9:44
बुध अस्त (1 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
