पंचांग · गोचर
गोचर 2005: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2005 में शनि 13 जनवरी को मिथुन में, राहु 25 मार्च को मीन में, शनि 26 मई को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 28 सितंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय मेलबर्न के स्थानीय समय (Australia/Melbourne, AEDT/AEST) में।
1 जनवरी 2005 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2004 से, 14 जनवरी 2005 तक
- चन्द्रसिंह में31 दिसंबर 2004 से, 2 जनवरी 2005 तक
- मंगलवृश्चिक में17 दिसंबर 2004 से, 29 जनवरी 2005 तक
- बुधवृश्चिक में6 दिसंबर 2004 से, 6 जनवरी 2005 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में28 अगस्त 2004 से, 28 सितंबर 2005 तक
- शुक्रवृश्चिक में12 दिसंबर 2004 से, 5 जनवरी 2005 तक
- शनिवक्रीकर्क में6 सितंबर 2004 से, 13 जनवरी 2005 तक
- राहुमेष में6 सितंबर 2003 से, 25 मार्च 2005 तक
- केतुतुला में6 सितंबर 2003 से, 25 मार्च 2005 तक
2005 का गोचर कैलेंडर
सभी समय मेलबर्न के स्थानीय समय (Australia/Melbourne, AEDT/AEST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2005
5 जनवरीसुबह 7:28
शुक्र का धनु में प्रवेश
6 जनवरीरात 1:11
बुध का धनु में प्रवेश
13 जनवरीरात 9:13
शनि का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जनवरीसुबह 11:08
सूर्य का मकर में प्रवेश
24 जनवरीसुबह 5:46
बुध अस्त (3 मार्च तक)†
26 जनवरीरात 8:30
बुध का मकर में प्रवेश
29 जनवरीसुबह 6:17
शुक्र का मकर में प्रवेश
29 जनवरीदोपहर 2:28
मंगल का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2005
2 फ़रवरीदोपहर 1:08
गुरु (बृहस्पति) कन्या 24°56′ पर वक्री
13 फ़रवरीरात 12:09
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 8:03
बुध का कुम्भ में प्रवेश
19 फ़रवरीसुबह 8:46
शुक्र अस्त (9 मई तक)†
22 फ़रवरीसुबह 5:27
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2005
2 मार्चरात 1:10
बुध का मीन में प्रवेश
3 मार्चदोपहर 12:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 मार्चशाम 6:43
मंगल का मकर में प्रवेश
14 मार्चरात 9:04
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चसुबह 6:18
शुक्र का मीन में प्रवेश
20 मार्चसुबह 11:13
बुध मीन 20°10′ पर वक्री
22 मार्चदोपहर 2:23
शनि मिथुन 26°28′ पर मार्गी
22 मार्चशाम 6:02
बुध अस्त (5 अप्रैल तक)†
25 मार्चदोपहर 12:27
राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
25 मार्चदोपहर 12:27
केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
अप्रैल 2005
5 अप्रैलरात 10:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 अप्रैलसुबह 8:54
शुक्र का मेष में प्रवेश
12 अप्रैलशाम 5:46
बुध मीन 7°49′ पर मार्गी
14 अप्रैलसुबह 4:35
सूर्य का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 4:08
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
मई 2005
5 मईदोपहर 3:50
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
8 मईशाम 7:46
बुध का मेष में प्रवेश
9 मईरात 2:52
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईरात 1:29
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईसुबह 11:57
बुध अस्त (15 जून तक)†
25 मईरात 10:41
बुध का वृषभ में प्रवेश
26 मईसुबह 11:22
शनि का कर्क में प्रवेश
30 मईरात 2:12
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2005
3 जूनरात 8:51
मंगल का मीन में प्रवेश
5 जूनशाम 5:38
गुरु (बृहस्पति) कन्या 15°00′ पर मार्गी
8 जूनरात 8:18
बुध का मिथुन में प्रवेश
15 जूनसुबह 8:06
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनरात 10:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जूनशाम 4:02
शुक्र का कर्क में प्रवेश
24 जूनदोपहर 2:42
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2005
5 जुलाईरात 10:57
शनि अस्त (11 अगस्त तक)†
16 जुलाईशाम 6:59
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईसुबह 10:07
शुक्र का सिंह में प्रवेश
18 जुलाईदोपहर 1:36
मंगल का मेष में प्रवेश
23 जुलाईदोपहर 12:59
बुध कर्क 26°32′ पर वक्री
30 जुलाईरात 3:34
बुध अस्त (14 अगस्त तक)†
अगस्त 2005
11 अगस्तसुबह 5:24
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
12 अगस्तसुबह 10:34
शुक्र का कन्या में प्रवेश
14 अगस्तसुबह 4:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अगस्तदोपहर 1:51
बुध कर्क 14°49′ पर मार्गी
17 अगस्तरात 3:23
सूर्य का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2005
1 सितंबरशाम 5:55
बुध का सिंह में प्रवेश
3 सितंबररात 2:51
बुध अस्त (8 अक्टूबर तक)†
6 सितंबररात 9:03
शुक्र का तुला में प्रवेश
17 सितंबररात 3:17
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरशाम 7:02
बुध का कन्या में प्रवेश
28 सितंबरसुबह 9:45
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2005
2 अक्टूबरसुबह 7:59
मंगल मेष 29°26′ पर वक्री
3 अक्टूबररात 12:44
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
5 अक्टूबरसुबह 6:06
बुध का तुला में प्रवेश
8 अक्टूबरसुबह 6:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 अक्टूबरशाम 5:55
गुरु (बृहस्पति) अस्त (6 नवंबर तक)†
17 अक्टूबरदोपहर 3:12
सूर्य का तुला में प्रवेश
25 अक्टूबररात 9:35
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
30 अक्टूबरशाम 7:00
शुक्र का धनु में प्रवेश
नवंबर 2005
6 नवंबररात 1:29
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
14 नवंबरशाम 4:42
बुध वृश्चिक 17°00′ पर वक्री
16 नवंबरदोपहर 3:57
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरदोपहर 3:12
बुध अस्त (30 नवंबर तक)†
22 नवंबरशाम 7:31
शनि कर्क 17°23′ पर वक्री
30 नवंबरशाम 4:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2005
3 दिसंबररात 10:54
शुक्र का मकर में प्रवेश
4 दिसंबरदोपहर 1:23
बुध वृश्चिक 0°48′ पर मार्गी
10 दिसंबरदोपहर 3:07
मंगल मेष 14°18′ पर मार्गी
16 दिसंबरसुबह 6:34
सूर्य का धनु में प्रवेश
24 दिसंबररात 8:35
शुक्र मकर 7°32′ पर वक्री
31 दिसंबरसुबह 7:13
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
