पंचांग · गोचर
गोचर 2006: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2006 में राहु 12 अक्टूबर को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 27 अक्टूबर को वृश्चिक में, शनि 1 नवंबर को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2006 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2005 से, 14 जनवरी 2006 तक
- चन्द्रधनु में30 दिसंबर 2005 से, 1 जनवरी 2006 तक
- मंगलमेष में18 जुलाई 2005 से, 5 फ़रवरी 2006 तक
- बुधधनु में30 दिसंबर 2005 से, 19 जनवरी 2006 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में28 सितंबर 2005 से, 27 अक्टूबर 2006 तक
- शुक्रवक्रीमकर में3 दिसंबर 2005 से, 13 जनवरी 2006 तक
- शनिवक्रीकर्क में26 मई 2005 से, 1 नवंबर 2006 तक
- राहुमीन में25 मार्च 2005 से, 12 अक्टूबर 2006 तक
- केतुकन्या में25 मार्च 2005 से, 12 अक्टूबर 2006 तक
2006 का गोचर कैलेंडर
सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2006
2 जनवरीदोपहर 2:28
बुध अस्त (14 फ़रवरी तक)†
9 जनवरीरात 1:21
शुक्र अस्त (18 जनवरी तक)†
13 जनवरीदोपहर 1:30
शुक्र का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जनवरीसुबह 6:18
सूर्य का मकर में प्रवेश
18 जनवरीरात 10:50
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
19 जनवरीसुबह 4:13
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2006
3 फ़रवरीसुबह 9:20
शुक्र धनु 22°05′ पर मार्गी
5 फ़रवरीसुबह 5:15
मंगल का वृषभ में प्रवेश
5 फ़रवरीशाम 4:21
बुध का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीशाम 7:19
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 1:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 फ़रवरीदोपहर 3:37
बुध का मीन में प्रवेश
25 फ़रवरीरात 12:39
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2006
2 मार्चरात 8:28
बुध मीन 2°59′ पर वक्री
4 मार्चशाम 5:44
गुरु (बृहस्पति) तुला 24°55′ पर वक्री
5 मार्चसुबह 5:16
बुध अस्त (18 मार्च तक)†
9 मार्चसुबह 7:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
14 मार्चशाम 4:13
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चसुबह 11:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चदोपहर 1:42
बुध कुम्भ 19°14′ पर मार्गी
31 मार्चसुबह 6:04
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2006
3 अप्रैलदोपहर 12:00
मंगल का मिथुन में प्रवेश
5 अप्रैलदोपहर 2:24
शनि कर्क 10°26′ पर मार्गी
11 अप्रैलदोपहर 12:49
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 1:43
सूर्य का मेष में प्रवेश
28 अप्रैलरात 2:07
शुक्र का मीन में प्रवेश
मई 2006
2 मईरात 1:49
बुध का मेष में प्रवेश
6 मईसुबह 4:09
बुध अस्त (30 मई तक)†
14 मईरात 10:35
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईरात 3:17
बुध का वृषभ में प्रवेश
24 मईसुबह 8:42
शुक्र का मेष में प्रवेश
24 मईशाम 5:48
मंगल का कर्क में प्रवेश
30 मईरात 11:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मईसुबह 6:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2006
15 जूनसुबह 5:09
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनरात 10:52
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
20 जूनदोपहर 12:48
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2006
4 जुलाईरात 8:32
बुध कर्क 7°26′ पर वक्री
6 जुलाईसुबह 8:36
गुरु (बृहस्पति) तुला 15°02′ पर मार्गी
10 जुलाईदोपहर 1:47
बुध अस्त (26 जुलाई तक)†
13 जुलाईरात 1:22
मंगल का सिंह में प्रवेश
14 जुलाईरात 2:50
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईशाम 4:01
सूर्य का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईसुबह 10:31
शनि अस्त (25 अगस्त तक)†
20 जुलाईशाम 7:19
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
26 जुलाईदोपहर 12:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जुलाईरात 1:40
बुध मिथुन 27°07′ पर मार्गी
अगस्त 2006
5 अगस्तदोपहर 12:30
बुध का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तरात 10:09
शुक्र का कर्क में प्रवेश
17 अगस्तरात 12:26
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तरात 1:58
बुध अस्त (18 सितंबर तक)†
24 अगस्तशाम 7:36
बुध का सिंह में प्रवेश
25 अगस्तदोपहर 12:40
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अगस्तशाम 7:11
मंगल का कन्या में प्रवेश
31 अगस्तरात 9:08
मंगल अस्त (16 दिसंबर तक)†
सितंबर 2006
1 सितंबरसुबह 9:33
शुक्र का सिंह में प्रवेश
9 सितंबरसुबह 11:10
बुध का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 12:23
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरदोपहर 3:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 सितंबरदोपहर 1:18
शुक्र अस्त (7 दिसंबर तक)†
25 सितंबरदोपहर 2:26
शुक्र का कन्या में प्रवेश
27 सितंबररात 11:58
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2006
12 अक्टूबरसुबह 5:24
राहु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
12 अक्टूबरसुबह 5:24
केतु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
14 अक्टूबरशाम 5:09
मंगल का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 12:21
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरदोपहर 3:00
शुक्र का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबरदोपहर 1:00
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
27 अक्टूबरशाम 5:20
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
28 अक्टूबररात 8:15
बुध वृश्चिक 1°08′ पर वक्री
नवंबर 2006
1 नवंबररात 12:04
शनि का सिंह में प्रवेश
1 नवंबरशाम 5:21
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
3 नवंबरसुबह 8:25
बुध अस्त (14 नवंबर तक)†
7 नवंबररात 11:12
गुरु (बृहस्पति) अस्त (5 दिसंबर तक)†
12 नवंबरदोपहर 12:19
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
14 नवंबरशाम 4:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरसुबह 11:09
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबररात 12:25
बुध तुला 15°07′ पर मार्गी
27 नवंबरदोपहर 2:05
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2006
4 दिसंबररात 1:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
5 दिसंबररात 9:09
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
6 दिसंबररात 3:37
शनि सिंह 1°07′ पर वक्री
6 दिसंबरसुबह 9:52
शुक्र का धनु में प्रवेश
7 दिसंबररात 3:51
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
12 दिसंबरसुबह 10:29
बुध अस्त (28 जनवरी तक)†
16 दिसंबररात 1:47
सूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 5:11
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
23 दिसंबररात 11:49
बुध का धनु में प्रवेश
30 दिसंबरसुबह 7:40
शुक्र का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
