पंचांग · गोचर · बुध
2006 में बुध का गोचर
2006 में बुध 18 बार राशि बदलता है: 19 जनवरी को मकर, 5 फ़रवरी को कुम्भ, 24 फ़रवरी को मीन, 9 मार्च को कुम्भ (वक्री, पीछे की ओर) …। वक्री: 2 मार्च, 4 जुलाई, 28 अक्टूबर से।
सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
2006 में बुध किन राशियों में है
- धनु30 दिसंबर, रात 8:13 2005 → 19 जनवरी, सुबह 4:13 2006· 19 दिन
- मकर19 जनवरी, सुबह 4:13 2006 → 5 फ़रवरी, शाम 4:21 2006· 18 दिन
- कुम्भ5 फ़रवरी, शाम 4:21 2006 → 24 फ़रवरी, दोपहर 3:37 2006· 19 दिन
- मीन24 फ़रवरी, दोपहर 3:37 2006 → 9 मार्च, सुबह 7:56 2006· 13 दिन
- कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)9 मार्च, सुबह 7:56 2006 → 11 अप्रैल, दोपहर 12:49 2006· 33 दिन
- मीन11 अप्रैल, दोपहर 12:49 2006 → 2 मई, रात 1:49 2006· 21 दिन
- मेष2 मई, रात 1:49 2006 → 17 मई, रात 3:17 2006· 15 दिन
- वृषभ17 मई, रात 3:17 2006 → 31 मई, सुबह 6:43 2006· 14 दिन
- मिथुन31 मई, सुबह 6:43 2006 → 20 जून, दोपहर 12:48 2006· 20 दिन
- कर्क20 जून, दोपहर 12:48 2006 → 20 जुलाई, शाम 7:19 2006· 30 दिन
- मिथुन(वक्री गति से प्रवेश)20 जुलाई, शाम 7:19 2006 → 5 अगस्त, दोपहर 12:30 2006· 16 दिन
- कर्क5 अगस्त, दोपहर 12:30 2006 → 24 अगस्त, शाम 7:36 2006· 19 दिन
- सिंह24 अगस्त, शाम 7:36 2006 → 9 सितंबर, सुबह 11:10 2006· 16 दिन
- कन्या9 सितंबर, सुबह 11:10 2006 → 27 सितंबर, रात 11:58 2006· 19 दिन
- तुला27 सितंबर, रात 11:58 2006 → 24 अक्टूबर, दोपहर 1:00 2006· 27 दिन
- वृश्चिक24 अक्टूबर, दोपहर 1:00 2006 → 1 नवंबर, शाम 5:21 2006· 8 दिन
- तुला(वक्री गति से प्रवेश)1 नवंबर, शाम 5:21 2006 → 4 दिसंबर, रात 1:05 2006· 32 दिन
- वृश्चिक4 दिसंबर, रात 1:05 2006 → 23 दिसंबर, रात 11:49 2006· 20 दिन
- धनु23 दिसंबर, रात 11:49 2006 → 11 जनवरी, शाम 6:26 2007· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
जनवरी 2006
2 जनवरीदोपहर 2:28
बुध अस्त (14 फ़रवरी तक)†
19 जनवरीसुबह 4:13
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2006
5 फ़रवरीशाम 4:21
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 1:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 फ़रवरीदोपहर 3:37
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2006
2 मार्चरात 8:28
बुध मीन 2°59′ पर वक्री
5 मार्चसुबह 5:16
बुध अस्त (18 मार्च तक)†
9 मार्चसुबह 7:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
18 मार्चसुबह 11:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चदोपहर 1:42
बुध कुम्भ 19°14′ पर मार्गी
अप्रैल 2006
11 अप्रैलदोपहर 12:49
बुध का मीन में प्रवेश
मई 2006
2 मईरात 1:49
बुध का मेष में प्रवेश
6 मईसुबह 4:09
बुध अस्त (30 मई तक)†
17 मईरात 3:17
बुध का वृषभ में प्रवेश
30 मईरात 11:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मईसुबह 6:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2006
20 जूनदोपहर 12:48
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2006
4 जुलाईरात 8:32
बुध कर्क 7°26′ पर वक्री
10 जुलाईदोपहर 1:47
बुध अस्त (26 जुलाई तक)†
20 जुलाईशाम 7:19
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
26 जुलाईदोपहर 12:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जुलाईरात 1:40
बुध मिथुन 27°07′ पर मार्गी
अगस्त 2006
5 अगस्तदोपहर 12:30
बुध का कर्क में प्रवेश
18 अगस्तरात 1:58
बुध अस्त (18 सितंबर तक)†
24 अगस्तशाम 7:36
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2006
9 सितंबरसुबह 11:10
बुध का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरदोपहर 3:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 सितंबररात 11:58
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2006
24 अक्टूबरदोपहर 1:00
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
28 अक्टूबररात 8:15
बुध वृश्चिक 1°08′ पर वक्री
नवंबर 2006
1 नवंबरशाम 5:21
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
3 नवंबरसुबह 8:25
बुध अस्त (14 नवंबर तक)†
14 नवंबरशाम 4:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
18 नवंबररात 12:25
बुध तुला 15°07′ पर मार्गी
दिसंबर 2006
4 दिसंबररात 1:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
12 दिसंबरसुबह 10:29
बुध अस्त (28 जनवरी तक)†
23 दिसंबररात 11:49
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2006: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
