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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2020: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2020 में शनि 24 जनवरी को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 30 मार्च को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 30 जून को धनु में, राहु 23 सितंबर को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 20 नवंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

1 जनवरी 2020 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2020 का गोचर कैलेंडर

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2020

  • 9 जनवरीसुबह 4:38

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 जनवरीरात 10:39

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 जनवरीसुबह 11:50

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीरात 2:23

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 24 जनवरीसुबह 10:15

    शनि का मकर में प्रवेश

  • 30 जनवरीदोपहर 12:58

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 जनवरीरात 3:08

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 31 जनवरीदोपहर 2:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

फ़रवरी 2020

  • 3 फ़रवरीरात 2:33

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 8 फ़रवरीसुबह 4:07

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीदोपहर 3:19

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीसुबह 6:38

    बुध कुम्भ 18°46′ पर वक्री

  • 19 फ़रवरीशाम 6:56

    बुध अस्त (3 मार्च तक)†

  • 29 फ़रवरीरात 1:48

    शुक्र का मेष में प्रवेश

मार्च 2020

  • 3 मार्चसुबह 8:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 मार्चसुबह 9:34

    बुध कुम्भ 4°05′ पर मार्गी

  • 14 मार्चदोपहर 12:09

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 22 मार्चदोपहर 2:56

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 28 मार्चदोपहर 3:54

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 30 मार्चसुबह 4:19

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

अप्रैल 2020

  • 7 अप्रैलदोपहर 2:39

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलरात 8:39

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 21 अप्रैलरात 9:23

    बुध अस्त (17 मई तक)†

  • 25 अप्रैलरात 2:50

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2020

  • 4 मईरात 8:57

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 9 मईसुबह 10:02

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 11 मईसुबह 9:20

    शनि मकर 7°49′ पर वक्री

  • 13 मईदोपहर 12:28

    शुक्र वृषभ 27°42′ पर वक्री

  • 14 मईशाम 5:32

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 14 मईशाम 7:59

    गुरु (बृहस्पति) मकर 3°06′ पर वक्री

  • 17 मईसुबह 9:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मईरात 12:09

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 29 मईरात 9:10

    शुक्र अस्त (9 जून तक)†

जून 2020

  • 9 जूनरात 1:52

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनरात 12:10

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 18 जूनसुबह 10:43

    बुध मिथुन 20°38′ पर वक्री

  • 18 जूनरात 8:31

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 4:29

    बुध अस्त (9 जुलाई तक)†

  • 25 जूनदोपहर 12:34

    शुक्र वृषभ 11°12′ पर मार्गी

  • 30 जूनसुबह 5:28

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

जुलाई 2020

  • 9 जुलाईशाम 7:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जुलाईदोपहर 2:12

    बुध मिथुन 11°21′ पर मार्गी

  • 16 जुलाईसुबह 11:02

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2020

  • 1 अगस्तसुबह 5:26

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 2 अगस्तरात 3:48

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 4 अगस्तसुबह 11:52

    बुध अस्त (2 सितंबर तक)†

  • 16 अगस्तशाम 6:45

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 16 अगस्तशाम 7:26

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 8:43

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2020

  • 1 सितंबररात 2:19

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 2 सितंबरदोपहर 12:17

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 2 सितंबरदोपहर 3:59

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 सितंबरसुबह 4:03

    मंगल मेष 4°00′ पर वक्री

  • 13 सितंबरसुबह 6:42

    गुरु (बृहस्पति) धनु 23°16′ पर मार्गी

  • 16 सितंबरशाम 7:23

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबरशाम 5:08

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 23 सितंबरदोपहर 12:46

    राहु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 सितंबरदोपहर 12:46

    केतु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 28 सितंबररात 1:18

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 29 सितंबरसुबह 11:29

    शनि मकर 1°11′ पर मार्गी

अक्टूबर 2020

  • 4 अक्टूबरसुबह 10:18

    मंगल का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 अक्टूबरसुबह 6:49

    बुध तुला 17°32′ पर वक्री

  • 17 अक्टूबरसुबह 7:22

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबरसुबह 8:21

    बुध अस्त (31 अक्टूबर तक)†

  • 23 अक्टूबरसुबह 11:01

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 31 अक्टूबररात 11:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

नवंबर 2020

  • 3 नवंबररात 11:35

    बुध तुला 1°45′ पर मार्गी

  • 14 नवंबरसुबह 6:24

    मंगल मीन 21°05′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरसुबह 7:10

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 1:18

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 20 नवंबरदोपहर 1:45

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 24 नवंबरशाम 7:05

    बुध अस्त (12 जनवरी तक)†

  • 28 नवंबरसुबह 7:20

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2020

  • 11 दिसंबरसुबह 5:33

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 दिसंबररात 9:48

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 17 दिसंबरसुबह 11:53

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 24 दिसंबरसुबह 10:36

    मंगल का मेष में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और