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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2036: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2036 में राहु 24 मार्च को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 14 अप्रैल को वृषभ में, शनि 27 अगस्त को सिंह में, गुरु (बृहस्पति) 9 सितंबर को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 16 नवंबर को वृषभ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।

1 जनवरी 2036 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2036 का गोचर कैलेंडर

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2036

  • 4 जनवरीसुबह 6:22

    बुध अस्त (15 जनवरी तक)†

  • 4 जनवरीरात 8:14

    गुरु (बृहस्पति) मेष 16°21′ पर मार्गी

  • 6 जनवरीरात 12:11

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 7 जनवरीरात 8:43

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 जनवरीदोपहर 3:08

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 9:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जनवरीसुबह 10:11

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 21 जनवरीरात 1:42

    बुध धनु 16°23′ पर मार्गी

फ़रवरी 2036

  • 1 फ़रवरीरात 9:06

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 7 फ़रवरीशाम 6:08

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 4:07

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीरात 1:41

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीदोपहर 1:54

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2036

  • 1 मार्चरात 11:13

    बुध अस्त (2 अप्रैल तक)†

  • 5 मार्चशाम 5:24

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 2:00

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चदोपहर 12:20

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 24 मार्चसुबह 5:38

    राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 24 मार्चसुबह 5:38

    केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 28 मार्चसुबह 9:46

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 31 मार्चदोपहर 1:51

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 2036

  • 2 अप्रैलरात 2:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 अप्रैलशाम 4:07

    शनि कर्क 17°58′ पर मार्गी

  • 13 अप्रैलसुबह 10:27

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलदोपहर 3:21

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश

  • 22 अप्रैलशाम 5:43

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 23 अप्रैलसुबह 6:17

    बुध मेष 24°16′ पर वक्री

  • 25 अप्रैलशाम 5:11

    बुध अस्त (11 मई तक)†

मई 2036

  • 8 मईसुबह 8:56

    शुक्र वृषभ 23°10′ पर वक्री

  • 8 मईदोपहर 1:37

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (7 जून तक)†

  • 11 मईरात 9:28

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मईसुबह 7:16

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 17 मईरात 1:30

    बुध मेष 14°41′ पर मार्गी

  • 24 मईशाम 5:09

    शुक्र अस्त (3 जून तक)†

जून 2036

  • 3 जूनरात 9:45

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 जूनसुबह 7:11

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 7 जूनशाम 7:48

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 जूनशाम 4:33

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 14 जूनदोपहर 1:49

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनसुबह 7:13

    शुक्र वृषभ 6°40′ पर मार्गी

  • 20 जूनसुबह 11:32

    बुध अस्त (15 जुलाई तक)†

  • 24 जूनदोपहर 3:09

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2036

  • 8 जुलाईदोपहर 2:48

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 15 जुलाईसुबह 9:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईरात 12:40

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 24 जुलाईरात 11:41

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 27 जुलाईदोपहर 1:12

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 27 जुलाईदोपहर 3:37

    शनि अस्त (1 सितंबर तक)†

अगस्त 2036

  • 1 अगस्तसुबह 5:18

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 2 अगस्तशाम 4:06

    मंगल अस्त (13 नवंबर तक)†

  • 16 अगस्तसुबह 9:03

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 23 अगस्तरात 2:39

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 25 अगस्तदोपहर 12:47

    बुध कन्या 0°16′ पर वक्री

  • 27 अगस्तसुबह 7:56

    शनि का सिंह में प्रवेश

  • 27 अगस्तरात 9:19

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 31 अगस्तसुबह 4:01

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

सितंबर 2036

  • 1 सितंबरदोपहर 2:47

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 1 सितंबरशाम 4:28

    बुध अस्त (15 सितंबर तक)†

  • 9 सितंबरसुबह 11:15

    गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश

  • 12 सितंबरशाम 6:24

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 15 सितंबररात 1:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 सितंबरसुबह 9:00

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 10:20

    बुध सिंह 16°16′ पर मार्गी

  • 26 सितंबररात 8:42

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 2036

  • 1 अक्टूबरशाम 4:34

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 3 अक्टूबरसुबह 4:54

    बुध अस्त (15 नवंबर तक)†

  • 13 अक्टूबरशाम 6:21

    गुरु (बृहस्पति) मिथुन 1°52′ पर वक्री

  • 16 अक्टूबररात 8:59

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 19 अक्टूबररात 1:03

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 22 अक्टूबररात 3:43

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 28 अक्टूबरशाम 6:37

    मंगल का तुला में प्रवेश

नवंबर 2036

  • 6 नवंबरदोपहर 1:15

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 13 नवंबररात 1:19

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 नवंबरदोपहर 3:39

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 15 नवंबरदोपहर 3:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 नवंबरशाम 7:50

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरशाम 4:22

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 नवंबररात 8:05

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2036

  • 9 दिसंबरशाम 7:10

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 12 दिसंबरसुबह 5:44

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 12 दिसंबरशाम 6:28

    शनि सिंह 8°31′ पर वक्री

  • 14 दिसंबरशाम 6:05

    बुध धनु 16°41′ पर वक्री

  • 15 दिसंबरसुबह 10:30

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबरदोपहर 3:18

    बुध अस्त (29 दिसंबर तक)†

  • 29 दिसंबरदोपहर 2:49

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और