पंचांग · गोचर
गोचर 2041: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2041 में शनि 27 जनवरी को तुला में, शनि 6 फ़रवरी को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 6 मई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 31 जुलाई को तुला में, शनि 26 सितंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2041 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2040 से, 14 जनवरी 2041 तक
- चन्द्रवृश्चिक में30 दिसंबर 2040 से, 1 जनवरी 2041 तक
- मंगलधनु में15 दिसंबर 2040 से, 23 जनवरी 2041 तक
- बुधधनु में15 दिसंबर 2040 से, 3 जनवरी 2041 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में3 दिसंबर 2040 से, 6 मई 2041 तक
- शुक्रकुम्भ में28 दिसंबर 2040 से, 29 जनवरी 2041 तक
- शनिकन्या में12 जुलाई 2039 से, 27 जनवरी 2041 तक
- राहुमेष में16 नवंबर 2040 से, 6 जून 2042 तक
- केतुतुला में16 नवंबर 2040 से, 6 जून 2042 तक
2041 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2041
3 जनवरीरात 1:10
बुध का मकर में प्रवेश
7 जनवरीसुबह 10:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 5:48
सूर्य का मकर में प्रवेश
23 जनवरीशाम 4:17
मंगल का मकर में प्रवेश
26 जनवरीसुबह 6:14
बुध मकर 27°53′ पर वक्री
27 जनवरीशाम 7:43
शनि का तुला में प्रवेश
29 जनवरीरात 2:20
बुध अस्त (9 फ़रवरी तक)†
29 जनवरीसुबह 9:03
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2041
1 फ़रवरीदोपहर 3:30
शनि तुला 0°01′ पर वक्री
6 फ़रवरीसुबह 11:36
शनि का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
9 फ़रवरीरात 8:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीशाम 6:49
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीरात 8:04
गुरु (बृहस्पति) तुला 7°20′ पर वक्री
16 फ़रवरीसुबह 10:27
बुध मकर 12°14′ पर मार्गी
24 फ़रवरीसुबह 8:06
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीसुबह 6:05
शुक्र मीन 11°46′ पर वक्री
मार्च 2041
3 मार्चरात 3:48
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
10 मार्चसुबह 6:38
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 मार्चसुबह 7:36
शुक्र अस्त (23 मार्च तक)†
14 मार्चदोपहर 3:43
सूर्य का मीन में प्रवेश
23 मार्चसुबह 6:25
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
24 मार्चसुबह 6:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
29 मार्चरात 8:17
बुध का मीन में प्रवेश
31 मार्चसुबह 6:24
बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2041
8 अप्रैलसुबह 6:09
शुक्र कुम्भ 25°37′ पर मार्गी
10 अप्रैलसुबह 11:31
मंगल का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 1:13
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 10:31
बुध का मेष में प्रवेश
24 अप्रैलरात 2:22
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 अप्रैलदोपहर 2:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अप्रैलरात 1:46
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2041
6 मईदोपहर 1:39
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
14 मईरात 10:03
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
19 मईसुबह 10:52
मंगल का मेष में प्रवेश
24 मईशाम 4:37
बुध वृषभ 25°03′ पर वक्री
28 मईरात 1:09
बुध अस्त (14 जून तक)†
31 मईसुबह 8:59
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2041
14 जूनरात 2:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनसुबह 4:36
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनदोपहर 2:41
बुध वृषभ 16°30′ पर मार्गी
18 जूनसुबह 7:32
गुरु (बृहस्पति) कन्या 27°25′ पर मार्गी
20 जूनरात 2:44
शनि कन्या 23°16′ पर मार्गी
28 जूनरात 9:56
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
29 जूनरात 1:21
मंगल का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2041
6 जुलाईदोपहर 2:07
बुध का मिथुन में प्रवेश
15 जुलाईशाम 5:52
बुध अस्त (11 अगस्त तक)†
16 जुलाईदोपहर 3:26
सूर्य का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईरात 1:28
बुध का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईसुबह 11:42
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
31 जुलाईरात 12:57
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
अगस्त 2041
6 अगस्तशाम 4:51
बुध का सिंह में प्रवेश
11 अगस्तसुबह 9:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 अगस्तसुबह 10:00
मंगल का मिथुन में प्रवेश
16 अगस्तरात 11:49
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 1:37
शुक्र का कर्क में प्रवेश
24 अगस्तदोपहर 2:50
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2041
13 सितंबररात 11:15
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबररात 11:45
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबरदोपहर 3:43
बुध कन्या 26°49′ पर वक्री
26 सितंबररात 1:39
शनि का तुला में प्रवेश
28 सितंबरशाम 4:17
मंगल का कर्क में प्रवेश
29 सितंबरसुबह 9:17
बुध अस्त (11 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 2041
3 अक्टूबररात 3:31
शनि अस्त (6 नवंबर तक)†
8 अक्टूबरसुबह 9:04
शुक्र का कन्या में प्रवेश
11 अक्टूबरशाम 4:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अक्टूबरसुबह 6:51
बुध कन्या 11°37′ पर मार्गी
17 अक्टूबरसुबह 11:42
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरसुबह 4:59
गुरु (बृहस्पति) अस्त (18 नवंबर तक)†
31 अक्टूबरदोपहर 12:01
बुध का तुला में प्रवेश
31 अक्टूबरदोपहर 12:10
बुध अस्त (19 दिसंबर तक)†
नवंबर 2041
1 नवंबरसुबह 10:11
शुक्र का तुला में प्रवेश
6 नवंबरसुबह 11:07
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरसुबह 10:32
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरसुबह 6:23
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
19 नवंबररात 12:29
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
21 नवंबरसुबह 5:32
शुक्र अस्त (12 फ़रवरी तक)†
25 नवंबरसुबह 8:11
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2041
4 दिसंबरशाम 4:57
मंगल का सिंह में प्रवेश
8 दिसंबररात 2:50
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 1:12
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबररात 3:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 दिसंबरसुबह 4:32
शुक्र का धनु में प्रवेश
27 दिसंबरशाम 6:38
बुध का मकर में प्रवेश
28 दिसंबरसुबह 5:35
मंगल सिंह 3°13′ पर वक्री
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
