मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2045: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2045 में गुरु (बृहस्पति) 2 मार्च को कुम्भ में, राहु 12 जुलाई को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2045 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2045 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2045

  • 2 जनवरीरात 9:18

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 2 जनवरीरात 11:50

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 12 जनवरीदोपहर 12:31

    बुध अस्त (22 फ़रवरी तक)†

  • 14 जनवरीसुबह 11:52

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 21 जनवरीसुबह 10:51

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 जनवरीशाम 7:19

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 24 जनवरीशाम 4:27

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (22 फ़रवरी तक)†

  • 26 जनवरीशाम 7:17

    शुक्र का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2045

  • 6 फ़रवरीसुबह 9:24

    शुक्र अस्त (27 अप्रैल तक)†

  • 9 फ़रवरीसुबह 11:12

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीरात 12:50

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीशाम 4:10

    मंगल अस्त (8 जुलाई तक)†

  • 19 फ़रवरीशाम 5:49

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 फ़रवरीरात 2:01

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 फ़रवरीसुबह 9:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 फ़रवरीसुबह 9:02

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीदोपहर 1:45

    मंगल का मीन में प्रवेश

मार्च 2045

  • 2 मार्चरात 12:09

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चरात 8:11

    बुध मीन 10°39′ पर वक्री

  • 13 मार्चरात 3:52

    बुध अस्त (26 मार्च तक)†

  • 14 मार्चरात 9:41

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 15 मार्चशाम 6:11

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चरात 11:09

    शनि वृश्चिक 17°18′ पर वक्री

  • 26 मार्चदोपहर 2:10

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 मार्चशाम 7:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2045

  • 2 अप्रैलरात 8:40

    बुध कुम्भ 27°30′ पर मार्गी

  • 8 अप्रैलदोपहर 2:03

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 8 अप्रैलरात 9:30

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 10 अप्रैलदोपहर 1:19

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 6:09

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 27 अप्रैलसुबह 6:04

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2045

  • 3 मईसुबह 4:29

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 5 मईसुबह 11:59

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 13 मईशाम 4:42

    बुध अस्त (7 जून तक)†

  • 15 मईरात 2:59

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 19 मईसुबह 5:08

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईसुबह 6:45

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 27 मईदोपहर 3:26

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2045

  • 4 जूनसुबह 4:04

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 7 जूनसुबह 6:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनसुबह 9:33

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनसुबह 6:40

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 21 जूनदोपहर 3:53

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 30 जूनरात 10:04

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2045

  • 1 जुलाईसुबह 5:50

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 17°49′ पर वक्री

  • 8 जुलाईरात 11:21

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जुलाईसुबह 11:55

    राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 12 जुलाईसुबह 11:55

    केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 जुलाईसुबह 11:07

    बुध कर्क 16°07′ पर वक्री

  • 16 जुलाईरात 3:21

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 16 जुलाईरात 8:22

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 19 जुलाईदोपहर 2:45

    बुध अस्त (4 अगस्त तक)†

अगस्त 2045

  • 4 अगस्तसुबह 4:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 6 अगस्तदोपहर 2:58

    बुध कर्क 5°11′ पर मार्गी

  • 8 अगस्तरात 9:04

    शनि वृश्चिक 10°40′ पर मार्गी

  • 10 अगस्तसुबह 8:10

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 14 अगस्तरात 9:26

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 4:45

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 25 अगस्तसुबह 9:48

    बुध अस्त (27 सितंबर तक)†

  • 28 अगस्तशाम 4:32

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2045

  • 5 सितंबररात 2:09

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 13 सितंबरसुबह 7:46

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 4:41

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 27 सितंबरसुबह 11:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अक्टूबर 2045

  • 1 अक्टूबरसुबह 7:02

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 1 अक्टूबरसुबह 7:12

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 1 अक्टूबररात 8:23

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरशाम 4:41

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरशाम 4:54

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 अक्टूबरसुबह 10:21

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 7°56′ पर मार्गी

  • 31 अक्टूबरसुबह 4:48

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 2045

  • 5 नवंबरदोपहर 1:37

    बुध वृश्चिक 8°17′ पर वक्री

  • 10 नवंबररात 8:11

    बुध अस्त (22 नवंबर तक)†

  • 16 नवंबररात 2:17

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 नवंबरशाम 4:32

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 11:26

    शनि अस्त (22 दिसंबर तक)†

  • 21 नवंबररात 1:52

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 22 नवंबररात 12:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 नवंबरदोपहर 2:24

    बुध तुला 22°11′ पर मार्गी

दिसंबर 2045

  • 6 दिसंबरसुबह 11:06

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 12 दिसंबरसुबह 6:57

    शुक्र धनु 24°32′ पर वक्री

  • 16 दिसंबरसुबह 7:15

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 22 दिसंबरसुबह 5:12

    बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†

  • 22 दिसंबररात 10:18

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 दिसंबरसुबह 11:40

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 27 दिसंबररात 8:11

    शुक्र अस्त (6 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और