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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2046: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2046 में गुरु (बृहस्पति) 13 मार्च को मीन में, शनि 7 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2046 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2046 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2046

  • 6 जनवरीशाम 6:14

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीशाम 6:01

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 10:43

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 20 जनवरीसुबह 9:33

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 22 जनवरीसुबह 4:28

    शुक्र धनु 9°11′ पर मार्गी

फ़रवरी 2046

  • 1 फ़रवरीरात 10:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 फ़रवरीदोपहर 12:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 7:00

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 21 फ़रवरीरात 11:30

    बुध कुम्भ 23°45′ पर वक्री

  • 24 फ़रवरीसुबह 10:31

    बुध अस्त (9 मार्च तक)†

मार्च 2046

  • 1 मार्चरात 3:06

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 1 मार्चसुबह 8:17

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (30 मार्च तक)†

  • 9 मार्चसुबह 5:06

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 मार्चसुबह 7:36

    मंगल तुला 11°44′ पर वक्री

  • 13 मार्चरात 1:17

    गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश

  • 15 मार्चरात 3:48

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 7:42

    बुध कुम्भ 9°22′ पर मार्गी

  • 30 मार्चसुबह 11:30

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 मार्चरात 12:51

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

अप्रैल 2046

  • 1 अप्रैलशाम 7:43

    शनि वृश्चिक 28°44′ पर वक्री

  • 9 अप्रैलरात 10:15

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलदोपहर 12:11

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 26 अप्रैलरात 9:51

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 27 अप्रैलरात 1:30

    मंगल का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 27 अप्रैलदोपहर 1:15

    बुध अस्त (22 मई तक)†

  • 28 अप्रैलसुबह 5:22

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2046

  • 12 मईशाम 5:04

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 8:57

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मईशाम 6:18

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 22 मईशाम 6:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 मईदोपहर 2:19

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 28 मईरात 9:05

    मंगल कन्या 23°36′ पर मार्गी

जून 2046

  • 15 जूनदोपहर 3:29

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनरात 2:56

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 24 जूनरात 8:27

    बुध मिथुन 26°37′ पर वक्री

  • 29 जूनरात 10:55

    बुध अस्त (16 जुलाई तक)†

जुलाई 2046

  • 1 जुलाईदोपहर 12:51

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 12 जुलाईरात 3:35

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईसुबह 9:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 जुलाईरात 2:21

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 19 जुलाईरात 1:21

    बुध मिथुन 17°01′ पर मार्गी

अगस्त 2046

  • 4 अगस्तशाम 4:55

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 5 अगस्तरात 8:58

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 8 अगस्तसुबह 9:26

    गुरु (बृहस्पति) मीन 24°30′ पर वक्री

  • 9 अगस्तरात 8:47

    बुध अस्त (8 सितंबर तक)†

  • 17 अगस्तसुबह 10:48

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तदोपहर 2:11

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 21 अगस्तरात 1:16

    शनि वृश्चिक 22°06′ पर मार्गी

  • 29 अगस्तशाम 6:17

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 अगस्तसुबह 7:22

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2046

  • 5 सितंबरदोपहर 12:00

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 8 सितंबरसुबह 5:04

    शुक्र अस्त (24 नवंबर तक)†

  • 8 सितंबरशाम 7:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 सितंबरसुबह 10:49

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 23 सितंबरसुबह 11:56

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 24 सितंबररात 11:38

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2046

  • 13 अक्टूबरसुबह 7:10

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरदोपहर 12:37

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 17 अक्टूबररात 10:52

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबररात 12:25

    बुध तुला 22°21′ पर वक्री

  • 25 अक्टूबररात 9:49

    बुध अस्त (6 नवंबर तक)†

नवंबर 2046

  • 6 नवंबरसुबह 10:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 नवंबरदोपहर 12:56

    बुध तुला 6°29′ पर मार्गी

  • 10 नवंबरसुबह 11:23

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 10:45

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 22 नवंबरदोपहर 3:59

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 24 नवंबरदोपहर 3:35

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 नवंबररात 11:44

    शनि अस्त (3 जनवरी तक)†

दिसंबर 2046

  • 1 दिसंबररात 12:51

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 1 दिसंबरदोपहर 12:04

    बुध अस्त (18 जनवरी तक)†

  • 4 दिसंबरसुबह 6:53

    गुरु (बृहस्पति) मीन 14°33′ पर मार्गी

  • 4 दिसंबरसुबह 9:34

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 7 दिसंबररात 10:36

    शनि का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरदोपहर 1:29

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 20 दिसंबरसुबह 9:27

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 28 दिसंबरसुबह 8:08

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 31 दिसंबरसुबह 10:14

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और