पंचांग · गोचर
गोचर 2045: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2045 में गुरु (बृहस्पति) 2 मार्च को कुम्भ में, राहु 12 जुलाई को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 2045 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2044 से, 14 जनवरी 2045 तक
- चन्द्रवृषभ में31 दिसंबर 2044 से, 2 जनवरी 2045 तक
- मंगलमकर में14 दिसंबर 2044 से, 21 जनवरी 2045 तक
- बुधवृश्चिक में28 अक्टूबर 2044 से, 3 जनवरी 2045 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में16 फ़रवरी 2044 से, 2 मार्च 2045 तक
- शुक्रवृश्चिक में10 दिसंबर 2044 से, 3 जनवरी 2045 तक
- शनिवृश्चिक में30 अगस्त 2044 से, 8 दिसंबर 2046 तक
- राहुकुम्भ में24 दिसंबर 2043 से, 12 जुलाई 2045 तक
- केतुसिंह में24 दिसंबर 2043 से, 12 जुलाई 2045 तक
2045 का गोचर कैलेंडर
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2045
3 जनवरीसुबह 4:48
शुक्र का धनु में प्रवेश
3 जनवरीसुबह 7:20
बुध का धनु में प्रवेश
12 जनवरीरात 8:01
बुध अस्त (22 फ़रवरी तक)†
14 जनवरीशाम 7:22
सूर्य का मकर में प्रवेश
21 जनवरीशाम 6:21
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
23 जनवरीरात 2:49
बुध का मकर में प्रवेश
24 जनवरीरात 11:57
गुरु (बृहस्पति) अस्त (22 फ़रवरी तक)†
27 जनवरीरात 2:47
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2045
6 फ़रवरीशाम 4:54
शुक्र अस्त (27 अप्रैल तक)†
9 फ़रवरीशाम 6:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 8:20
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 11:40
मंगल अस्त (9 जुलाई तक)†
20 फ़रवरीरात 1:19
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीसुबह 9:31
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
22 फ़रवरीशाम 5:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीशाम 4:32
बुध का मीन में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 9:15
मंगल का मीन में प्रवेश
मार्च 2045
2 मार्चसुबह 7:39
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
11 मार्चरात 3:41
बुध मीन 10°39′ पर वक्री
13 मार्चसुबह 11:22
बुध अस्त (27 मार्च तक)†
15 मार्चसुबह 5:11
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चरात 1:41
शुक्र का मीन में प्रवेश
21 मार्चसुबह 6:39
शनि वृश्चिक 17°18′ पर वक्री
26 मार्चरात 9:40
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
27 मार्चरात 3:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2045
3 अप्रैलरात 3:10
बुध कुम्भ 27°30′ पर मार्गी
8 अप्रैलरात 8:33
मंगल का मेष में प्रवेश
9 अप्रैलसुबह 4:00
शुक्र का मेष में प्रवेश
10 अप्रैलशाम 7:49
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलदोपहर 12:39
सूर्य का मेष में प्रवेश
27 अप्रैलदोपहर 12:34
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2045
3 मईसुबह 10:59
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
5 मईशाम 6:29
बुध का मेष में प्रवेश
13 मईरात 11:12
बुध अस्त (7 जून तक)†
15 मईसुबह 9:29
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
19 मईसुबह 11:38
मंगल का वृषभ में प्रवेश
21 मईदोपहर 1:15
बुध का वृषभ में प्रवेश
27 मईरात 9:56
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2045
4 जूनसुबह 10:34
बुध का मिथुन में प्रवेश
7 जूनदोपहर 1:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनशाम 4:03
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनदोपहर 1:10
शुक्र का कर्क में प्रवेश
21 जूनरात 10:23
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2045
1 जुलाईसुबह 4:34
मंगल का मिथुन में प्रवेश
1 जुलाईदोपहर 12:20
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 17°49′ पर वक्री
9 जुलाईसुबह 5:51
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जुलाईशाम 6:25
राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जुलाईशाम 6:25
केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
13 जुलाईशाम 5:37
बुध कर्क 16°07′ पर वक्री
16 जुलाईसुबह 9:51
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 जुलाईरात 2:52
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 9:15
बुध अस्त (4 अगस्त तक)†
अगस्त 2045
4 अगस्तसुबह 10:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अगस्तरात 9:28
बुध कर्क 5°11′ पर मार्गी
9 अगस्तरात 3:34
शनि वृश्चिक 10°40′ पर मार्गी
10 अगस्तदोपहर 2:40
शुक्र का कन्या में प्रवेश
15 अगस्तरात 3:56
मंगल का कर्क में प्रवेश
17 अगस्तसुबह 11:15
सूर्य का सिंह में प्रवेश
25 अगस्तशाम 4:18
बुध अस्त (27 सितंबर तक)†
28 अगस्तरात 11:02
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2045
5 सितंबरसुबह 8:39
शुक्र का तुला में प्रवेश
13 सितंबरदोपहर 2:16
बुध का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 11:11
सूर्य का कन्या में प्रवेश
27 सितंबरशाम 6:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2045
1 अक्टूबरदोपहर 2:32
बुध का तुला में प्रवेश
1 अक्टूबरदोपहर 2:42
मंगल का सिंह में प्रवेश
2 अक्टूबररात 3:53
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
18 अक्टूबररात 12:11
सूर्य का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबररात 12:24
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
28 अक्टूबरशाम 5:51
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 7°56′ पर मार्गी
31 अक्टूबरदोपहर 12:18
शुक्र का धनु में प्रवेश
नवंबर 2045
5 नवंबररात 9:07
बुध वृश्चिक 8°17′ पर वक्री
11 नवंबररात 3:41
बुध अस्त (22 नवंबर तक)†
16 नवंबरसुबह 9:47
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
17 नवंबररात 12:02
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरशाम 6:56
शनि अस्त (23 दिसंबर तक)†
21 नवंबरसुबह 9:22
मंगल का कन्या में प्रवेश
22 नवंबरसुबह 8:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबररात 9:54
बुध तुला 22°11′ पर मार्गी
दिसंबर 2045
6 दिसंबरशाम 6:36
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
12 दिसंबरदोपहर 2:27
शुक्र धनु 24°32′ पर वक्री
16 दिसंबरदोपहर 2:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबरदोपहर 12:42
बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†
23 दिसंबरसुबह 5:48
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
27 दिसंबरशाम 7:10
बुध का धनु में प्रवेश
28 दिसंबररात 3:41
शुक्र अस्त (7 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
