पंचांग · गोचर
गोचर 2045: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2045 में गुरु (बृहस्पति) 1 मार्च को कुम्भ में, राहु 11 जुलाई को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2045 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2044 से, 13 जनवरी 2045 तक
- चन्द्रवृषभ में30 दिसंबर 2044 से, 1 जनवरी 2045 तक
- मंगलमकर में13 दिसंबर 2044 से, 20 जनवरी 2045 तक
- बुधवृश्चिक में27 अक्टूबर 2044 से, 2 जनवरी 2045 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में15 फ़रवरी 2044 से, 1 मार्च 2045 तक
- शुक्रवृश्चिक में9 दिसंबर 2044 से, 2 जनवरी 2045 तक
- शनिवृश्चिक में29 अगस्त 2044 से, 7 दिसंबर 2046 तक
- राहुकुम्भ में23 दिसंबर 2043 से, 11 जुलाई 2045 तक
- केतुसिंह में23 दिसंबर 2043 से, 11 जुलाई 2045 तक
2045 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2045
2 जनवरीसुबह 7:48
शुक्र का धनु में प्रवेश
2 जनवरीसुबह 10:20
बुध का धनु में प्रवेश
11 जनवरीरात 11:01
बुध अस्त (21 फ़रवरी तक)†
13 जनवरीरात 10:22
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीरात 9:21
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
22 जनवरीसुबह 5:49
बुध का मकर में प्रवेश
24 जनवरीरात 2:57
गुरु (बृहस्पति) अस्त (21 फ़रवरी तक)†
26 जनवरीसुबह 5:47
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2045
5 फ़रवरीशाम 7:54
शुक्र अस्त (26 अप्रैल तक)†
8 फ़रवरीरात 9:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीसुबह 11:20
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 2:40
मंगल अस्त (8 जुलाई तक)†
19 फ़रवरीसुबह 4:19
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
21 फ़रवरीदोपहर 12:31
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
21 फ़रवरीरात 8:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीशाम 7:32
बुध का मीन में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 12:15
मंगल का मीन में प्रवेश
मार्च 2045
1 मार्चसुबह 10:39
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
10 मार्चसुबह 6:41
बुध मीन 10°39′ पर वक्री
12 मार्चदोपहर 3:22
बुध अस्त (26 मार्च तक)†
14 मार्चसुबह 9:11
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चसुबह 5:41
शुक्र का मीन में प्रवेश
20 मार्चसुबह 10:39
शनि वृश्चिक 17°18′ पर वक्री
26 मार्चरात 1:40
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 मार्चसुबह 7:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2045
2 अप्रैलसुबह 8:10
बुध कुम्भ 27°30′ पर मार्गी
8 अप्रैलरात 1:33
मंगल का मेष में प्रवेश
8 अप्रैलसुबह 9:00
शुक्र का मेष में प्रवेश
10 अप्रैलरात 12:49
बुध का मीन में प्रवेश
13 अप्रैलशाम 5:39
सूर्य का मेष में प्रवेश
26 अप्रैलशाम 5:34
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2045
2 मईदोपहर 3:59
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
4 मईरात 11:29
बुध का मेष में प्रवेश
13 मईसुबह 4:12
बुध अस्त (6 जून तक)†
14 मईदोपहर 2:29
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मईशाम 4:38
मंगल का वृषभ में प्रवेश
20 मईशाम 6:15
बुध का वृषभ में प्रवेश
27 मईरात 2:56
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2045
3 जूनदोपहर 3:34
बुध का मिथुन में प्रवेश
6 जूनशाम 6:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जूनरात 9:03
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनशाम 6:10
शुक्र का कर्क में प्रवेश
21 जूनरात 3:23
बुध का कर्क में प्रवेश
30 जूनसुबह 9:34
मंगल का मिथुन में प्रवेश
30 जूनशाम 5:20
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 17°49′ पर वक्री
जुलाई 2045
8 जुलाईसुबह 10:51
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जुलाईरात 11:25
राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
11 जुलाईरात 11:25
केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जुलाईरात 10:37
बुध कर्क 16°07′ पर वक्री
15 जुलाईदोपहर 2:51
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 7:52
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 2:15
बुध अस्त (3 अगस्त तक)†
अगस्त 2045
3 अगस्तदोपहर 3:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अगस्तरात 2:28
बुध कर्क 5°11′ पर मार्गी
8 अगस्तसुबह 8:34
शनि वृश्चिक 10°40′ पर मार्गी
9 अगस्तशाम 7:40
शुक्र का कन्या में प्रवेश
14 अगस्तसुबह 8:56
मंगल का कर्क में प्रवेश
16 अगस्तशाम 4:15
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तरात 9:18
बुध अस्त (26 सितंबर तक)†
28 अगस्तसुबह 4:02
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2045
4 सितंबरदोपहर 1:39
शुक्र का तुला में प्रवेश
12 सितंबरशाम 7:16
बुध का कन्या में प्रवेश
16 सितंबरशाम 4:11
सूर्य का कन्या में प्रवेश
26 सितंबररात 10:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 सितंबरशाम 6:32
बुध का तुला में प्रवेश
30 सितंबरशाम 6:42
मंगल का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2045
1 अक्टूबरसुबह 7:53
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 4:11
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 4:24
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
27 अक्टूबररात 9:51
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 7°56′ पर मार्गी
30 अक्टूबरशाम 4:18
शुक्र का धनु में प्रवेश
नवंबर 2045
5 नवंबररात 1:07
बुध वृश्चिक 8°17′ पर वक्री
10 नवंबरसुबह 6:41
बुध अस्त (21 नवंबर तक)†
15 नवंबरदोपहर 12:47
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
16 नवंबररात 3:02
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबररात 9:56
शनि अस्त (22 दिसंबर तक)†
20 नवंबरदोपहर 12:22
मंगल का कन्या में प्रवेश
21 नवंबरसुबह 11:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबररात 12:54
बुध तुला 22°11′ पर मार्गी
दिसंबर 2045
5 दिसंबररात 9:36
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
11 दिसंबरशाम 5:27
शुक्र धनु 24°32′ पर वक्री
15 दिसंबरशाम 5:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरदोपहर 3:42
बुध अस्त (4 फ़रवरी तक)†
22 दिसंबरसुबह 8:48
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 दिसंबररात 10:10
बुध का धनु में प्रवेश
27 दिसंबरसुबह 6:41
शुक्र अस्त (6 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
