पंचांग · गोचर
गोचर 2047: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2047 में राहु 29 जनवरी को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 21 मार्च को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 18 अगस्त को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 11 अक्टूबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 2047 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2046 से, 15 जनवरी 2047 तक
- चन्द्रकुम्भ में31 दिसंबर 2046 से, 2 जनवरी 2047 तक
- मंगलकुम्भ में31 दिसंबर 2046 से, 8 फ़रवरी 2047 तक
- बुधधनु में20 दिसंबर 2046 से, 8 जनवरी 2047 तक
- गुरु (बृहस्पति)मीन में13 मार्च 2046 से, 21 मार्च 2047 तक
- शुक्रमकर में28 दिसंबर 2046 से, 21 जनवरी 2047 तक
- शनिधनु में7 दिसंबर 2046 से, 6 मार्च 2049 तक
- राहुमकर में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
- केतुकर्क में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
2047 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2047
3 जनवरीसुबह 8:00
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
8 जनवरीरात 1:35
बुध का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 12:15
सूर्य का मकर में प्रवेश
18 जनवरीरात 9:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 जनवरीसुबह 8:33
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
26 जनवरीरात 8:53
बुध का कुम्भ में प्रवेश
29 जनवरीदोपहर 2:53
राहु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
29 जनवरीदोपहर 2:53
केतु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
फ़रवरी 2047
5 फ़रवरीदोपहर 12:30
बुध कुम्भ 7°14′ पर वक्री
8 फ़रवरीरात 1:25
मंगल का मीन में प्रवेश
8 फ़रवरीसुबह 4:44
बुध अस्त (20 फ़रवरी तक)†
13 फ़रवरीदोपहर 1:14
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 1:34
शुक्र का मीन में प्रवेश
15 फ़रवरीसुबह 5:38
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
20 फ़रवरीसुबह 6:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 फ़रवरीरात 2:35
बुध मकर 21°58′ पर मार्गी
मार्च 2047
11 मार्चरात 3:37
शुक्र का मेष में प्रवेश
12 मार्चरात 9:08
बुध का कुम्भ में प्रवेश
15 मार्चसुबह 10:04
सूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्चदोपहर 2:49
मंगल का मेष में प्रवेश
21 मार्चरात 9:28
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2047
3 अप्रैलरात 9:16
बुध का मीन में प्रवेश
5 अप्रैलसुबह 9:22
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
7 अप्रैलदोपहर 1:21
गुरु (बृहस्पति) अस्त (7 मई तक)†
10 अप्रैलरात 10:52
बुध अस्त (7 मई तक)†
13 अप्रैलशाम 4:43
शनि धनु 10°06′ पर वक्री
14 अप्रैलशाम 6:28
सूर्य का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलरात 2:56
बुध का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 8:05
मंगल अस्त (20 अगस्त तक)†
29 अप्रैलशाम 7:25
मंगल का वृषभ में प्रवेश
मई 2047
1 मईशाम 7:12
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
4 मईसुबह 8:01
बुध का वृषभ में प्रवेश
7 मईसुबह 8:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 मईसुबह 10:23
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईदोपहर 3:13
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईदोपहर 1:00
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 मईरात 9:07
शुक्र का कर्क में प्रवेश
जून 2047
5 जूनशाम 5:34
बुध मिथुन 6°36′ पर वक्री
9 जूनशाम 4:04
बुध अस्त (26 जून तक)†
11 जूनरात 11:37
मंगल का मिथुन में प्रवेश
15 जूनरात 9:44
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनरात 10:45
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 जूनदोपहर 3:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जूनशाम 6:06
बुध वृषभ 27°53′ पर मार्गी
जुलाई 2047
6 जुलाईरात 11:02
बुध का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 5:15
शुक्र कर्क 27°35′ पर वक्री
17 जुलाईसुबह 8:34
सूर्य का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईसुबह 10:55
बुध अस्त (22 अगस्त तक)†
27 जुलाईरात 2:11
मंगल का कर्क में प्रवेश
28 जुलाईशाम 4:03
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2047
1 अगस्तदोपहर 1:44
शुक्र अस्त (11 अगस्त तक)†
11 अगस्तशाम 7:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
12 अगस्तसुबह 6:26
बुध का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तशाम 5:01
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तशाम 7:18
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
20 अगस्तशाम 7:32
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
22 अगस्तरात 2:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अगस्तसुबह 7:38
शुक्र कर्क 11°10′ पर मार्गी
29 अगस्तसुबह 4:59
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2047
2 सितंबररात 12:33
शनि धनु 3°28′ पर मार्गी
11 सितंबरशाम 7:37
मंगल का सिंह में प्रवेश
14 सितंबरशाम 5:50
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 1°10′ पर वक्री
17 सितंबरशाम 5:01
सूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सितंबरसुबह 10:45
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2047
3 अक्टूबरसुबह 6:15
बुध तुला 6°14′ पर वक्री
3 अक्टूबरदोपहर 2:52
शुक्र का सिंह में प्रवेश
9 अक्टूबरशाम 5:17
बुध अस्त (21 अक्टूबर तक)†
11 अक्टूबरसुबह 9:41
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
13 अक्टूबरसुबह 6:31
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
18 अक्टूबरसुबह 5:01
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरशाम 4:26
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अक्टूबरसुबह 10:51
बुध कन्या 20°44′ पर मार्गी
29 अक्टूबररात 9:25
मंगल का कन्या में प्रवेश
नवंबर 2047
2 नवंबरशाम 6:55
शुक्र का कन्या में प्रवेश
4 नवंबरशाम 6:39
बुध का तुला में प्रवेश
12 नवंबररात 12:41
बुध अस्त (31 दिसंबर तक)†
17 नवंबरसुबह 4:52
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबररात 2:32
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
29 नवंबररात 3:31
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2047
12 दिसंबरसुबह 9:51
शनि अस्त (14 जनवरी तक)†
13 दिसंबररात 3:34
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 7:31
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरशाम 4:59
मंगल का तुला में प्रवेश
24 दिसंबरसुबह 4:30
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
31 दिसंबरसुबह 6:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
