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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

1980 में बुध का गोचर

1980 में बुध 14 बार राशि बदलता है: 17 जनवरी को मकर, 3 फ़रवरी को कुम्भ, 10 अप्रैल को मीन, 29 अप्रैल को मेष …। वक्री: 26 फ़रवरी, 28 जून, 23 अक्टूबर से।

1980 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु29 दिसंबर, सुबह 8:13 1979 → 17 जनवरी, सुबह 10:46 1980· 19 दिन
  2. मकर17 जनवरी, सुबह 10:46 1980 → 3 फ़रवरी, रात 10:09 1980· 17 दिन
  3. कुम्भ3 फ़रवरी, रात 10:09 1980 → 10 अप्रैल, रात 3:43 1980· लगभग 2 महीने
  4. मीन10 अप्रैल, रात 3:43 1980 → 29 अप्रैल, सुबह 7:01 1980· 19 दिन
  5. मेष29 अप्रैल, सुबह 7:01 1980 → 14 मई, रात 12:03 1980· 15 दिन
  6. वृषभ14 मई, रात 12:03 1980 → 28 मई, सुबह 11:34 1980· 14 दिन
  7. मिथुन28 मई, सुबह 11:34 1980 → 22 जून, सुबह 8:06 1980· 25 दिन
  8. कर्क22 जून, सुबह 8:06 1980 → 5 जुलाई, सुबह 4:08 1980· 13 दिन
  9. मिथुन(वक्री गति से प्रवेश)5 जुलाई, सुबह 4:08 1980 → 4 अगस्त, रात 10:57 1980· 31 दिन
  10. कर्क4 अगस्त, रात 10:57 1980 → 21 अगस्त, शाम 7:25 1980· 17 दिन
  11. सिंह21 अगस्त, शाम 7:25 1980 → 6 सितंबर, दोपहर 1:48 1980· 16 दिन
  12. कन्या6 सितंबर, दोपहर 1:48 1980 → 25 सितंबर, दोपहर 2:00 1980· 19 दिन
  13. तुला25 सितंबर, दोपहर 2:00 1980 → 1 दिसंबर, शाम 6:36 1980· लगभग 2 महीने
  14. वृश्चिक1 दिसंबर, शाम 6:36 1980 → 21 दिसंबर, सुबह 8:12 1980· 20 दिन
  15. धनु21 दिसंबर, सुबह 8:12 1980 → 9 जनवरी, रात 1:00 1981· 19 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 1980

  • 17 जनवरीसुबह 10:46

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1980

  • 3 फ़रवरीरात 10:09

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 9 फ़रवरीरात 10:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 फ़रवरीसुबह 7:02

    बुध कुम्भ 27°56′ पर वक्री

  • 28 फ़रवरीशाम 4:58

    बुध अस्त (12 मार्च तक)†

मार्च 1980

  • 12 मार्चशाम 4:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 19 मार्चशाम 7:29

    बुध कुम्भ 13°50′ पर मार्गी

अप्रैल 1980

  • 10 अप्रैलरात 3:43

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 29 अप्रैलसुबह 7:01

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 30 अप्रैलशाम 6:14

    बुध अस्त (25 मई तक)†

मई 1980

  • 14 मईरात 12:03

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 25 मईशाम 6:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मईसुबह 11:34

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 1980

  • 22 जूनसुबह 8:06

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 28 जूनशाम 4:41

    बुध कर्क 1°32′ पर वक्री

जुलाई 1980

  • 4 जुलाईरात 2:16

    बुध अस्त (20 जुलाई तक)†

  • 5 जुलाईसुबह 4:08

    बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 20 जुलाईसुबह 7:38

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 जुलाईरात 10:07

    बुध मिथुन 21°37′ पर मार्गी

अगस्त 1980

  • 4 अगस्तरात 10:57

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 12 अगस्तरात 8:45

    बुध अस्त (12 सितंबर तक)†

  • 21 अगस्तशाम 7:25

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 1980

  • 6 सितंबरदोपहर 1:48

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 12 सितंबरदोपहर 12:23

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 सितंबरदोपहर 2:00

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 1980

  • 23 अक्टूबरसुबह 7:28

    बुध तुला 26°20′ पर वक्री

  • 29 अक्टूबररात 1:09

    बुध अस्त (9 नवंबर तक)†

नवंबर 1980

  • 9 नवंबरसुबह 11:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 नवंबरशाम 4:26

    बुध तुला 10°24′ पर मार्गी

दिसंबर 1980

  • 1 दिसंबरशाम 6:36

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 5 दिसंबरशाम 5:51

    बुध अस्त (22 जनवरी तक)†

  • 21 दिसंबरसुबह 8:12

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1980: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और