पंचांग · गोचर · बुध
1981 में बुध का गोचर
1981 में बुध 16 बार राशि बदलता है: 9 जनवरी को मकर, 27 जनवरी को कुम्भ, 22 फ़रवरी को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 11 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 8 फ़रवरी, 9 जून, 6 अक्टूबर से।
1981 में बुध किन राशियों में है
- धनु21 दिसंबर, सुबह 8:12 1980 → 9 जनवरी, रात 1:00 1981· 19 दिन
- मकर9 जनवरी, रात 1:00 1981 → 27 जनवरी, सुबह 4:57 1981· 18 दिन
- कुम्भ27 जनवरी, सुबह 4:57 1981 → 22 फ़रवरी, दोपहर 12:04 1981· 26 दिन
- मकर(वक्री गति से प्रवेश)22 फ़रवरी, दोपहर 12:04 1981 → 11 मार्च, दोपहर 1:24 1981· 17 दिन
- कुम्भ11 मार्च, दोपहर 1:24 1981 → 4 अप्रैल, शाम 5:10 1981· 24 दिन
- मीन4 अप्रैल, शाम 5:10 1981 → 21 अप्रैल, सुबह 8:02 1981· 17 दिन
- मेष21 अप्रैल, सुबह 8:02 1981 → 5 मई, दोपहर 12:23 1981· 14 दिन
- वृषभ5 मई, दोपहर 12:23 1981 → 22 मई, रात 9:43 1981· 17 दिन
- मिथुन22 मई, रात 9:43 1981 → 29 जुलाई, शाम 6:43 1981· लगभग 2 महीने
- कर्क29 जुलाई, शाम 6:43 1981 → 13 अगस्त, सुबह 11:44 1981· 15 दिन
- सिंह13 अगस्त, सुबह 11:44 1981 → 30 अगस्त, रात 2:39 1981· 17 दिन
- कन्या30 अगस्त, रात 2:39 1981 → 20 सितंबर, रात 9:49 1981· 22 दिन
- तुला20 सितंबर, रात 9:49 1981 → 19 अक्टूबर, शाम 6:49 1981· 29 दिन
- कन्या(वक्री गति से प्रवेश)19 अक्टूबर, शाम 6:49 1981 → 4 नवंबर, रात 8:44 1981· 16 दिन
- तुला4 नवंबर, रात 8:44 1981 → 25 नवंबर, रात 1:05 1981· 20 दिन
- वृश्चिक25 नवंबर, रात 1:05 1981 → 14 दिसंबर, रात 2:38 1981· 19 दिन
- धनु14 दिसंबर, रात 2:38 1981 → 1 जनवरी, रात 9:37 1982· 19 दिन
तारीखवार
समय भारतीय मानक समय (IST) में।
जनवरी 1981
9 जनवरीरात 1:00
बुध का मकर में प्रवेश
22 जनवरीदोपहर 1:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 जनवरीसुबह 4:57
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 1981
8 फ़रवरीशाम 6:00
बुध कुम्भ 11°20′ पर वक्री
11 फ़रवरीसुबह 8:37
बुध अस्त (23 फ़रवरी तक)†
22 फ़रवरीदोपहर 12:04
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
23 फ़रवरीदोपहर 2:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 1981
2 मार्चदोपहर 12:36
बुध मकर 26°16′ पर मार्गी
11 मार्चदोपहर 1:24
बुध का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 1981
4 अप्रैलशाम 5:10
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 6:59
बुध अस्त (10 मई तक)†
21 अप्रैलसुबह 8:02
बुध का मेष में प्रवेश
मई 1981
5 मईदोपहर 12:23
बुध का वृषभ में प्रवेश
10 मईसुबह 8:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 मईरात 9:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 1981
9 जूनशाम 5:04
बुध मिथुन 11°37′ पर वक्री
13 जूनरात 10:17
बुध अस्त (30 जून तक)†
30 जूनशाम 7:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
जुलाई 1981
3 जुलाईशाम 6:28
बुध मिथुन 2°44′ पर मार्गी
28 जुलाईसुबह 10:15
बुध अस्त (25 अगस्त तक)†
29 जुलाईशाम 6:43
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1981
13 अगस्तसुबह 11:44
बुध का सिंह में प्रवेश
25 अगस्तदोपहर 2:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अगस्तरात 2:39
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1981
20 सितंबररात 9:49
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 1981
6 अक्टूबरदोपहर 2:44
बुध तुला 10°16′ पर वक्री
12 अक्टूबररात 10:22
बुध अस्त (24 अक्टूबर तक)†
19 अक्टूबरशाम 6:49
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
24 अक्टूबरशाम 6:23
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अक्टूबरदोपहर 2:40
बुध कन्या 24°40′ पर मार्गी
नवंबर 1981
4 नवंबररात 8:44
बुध का तुला में प्रवेश
15 नवंबररात 10:18
बुध अस्त (4 जनवरी तक)†
25 नवंबररात 1:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1981
14 दिसंबररात 2:38
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1981: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
