पंचांग · गोचर · बुध
1988 में बुध का गोचर
1988 में बुध 19 बार राशि बदलता है: 6 जनवरी को मकर, 26 जनवरी को कुम्भ, 9 फ़रवरी को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 11 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 2 फ़रवरी, 1 जून, 29 सितंबर से।
1988 में बुध किन राशियों में है
- धनु18 दिसंबर, रात 11:07 1987 → 6 जनवरी, दोपहर 3:08 1988· 19 दिन
- मकर6 जनवरी, दोपहर 3:08 1988 → 26 जनवरी, सुबह 4:55 1988· 20 दिन
- कुम्भ26 जनवरी, सुबह 4:55 1988 → 9 फ़रवरी, दोपहर 3:13 1988· 14 दिन
- मकर(वक्री गति से प्रवेश)9 फ़रवरी, दोपहर 3:13 1988 → 11 मार्च, सुबह 10:42 1988· 31 दिन
- कुम्भ11 मार्च, सुबह 10:42 1988 → 1 अप्रैल, सुबह 11:50 1988· 21 दिन
- मीन1 अप्रैल, सुबह 11:50 1988 → 17 अप्रैल, सुबह 11:43 1988· 16 दिन
- मेष17 अप्रैल, सुबह 11:43 1988 → 1 मई, शाम 6:30 1988· 14 दिन
- वृषभ1 मई, शाम 6:30 1988 → 23 मई, सुबह 5:49 1988· 21 दिन
- मिथुन23 मई, सुबह 5:49 1988 → 10 जून, रात 11:51 1988· 19 दिन
- वृषभ(वक्री गति से प्रवेश)10 जून, रात 11:51 1988 → 6 जुलाई, रात 11:10 1988· 26 दिन
- मिथुन6 जुलाई, रात 11:10 1988 → 26 जुलाई, रात 1:58 1988· 19 दिन
- कर्क26 जुलाई, रात 1:58 1988 → 9 अगस्त, दोपहर 3:47 1988· 15 दिन
- सिंह9 अगस्त, दोपहर 3:47 1988 → 26 अगस्त, रात 8:40 1988· 17 दिन
- कन्या26 अगस्त, रात 8:40 1988 → 20 सितंबर, शाम 5:14 1988· 25 दिन
- तुला20 सितंबर, शाम 5:14 1988 → 6 अक्टूबर, दोपहर 12:01 1988· 16 दिन
- कन्या(वक्री गति से प्रवेश)6 अक्टूबर, दोपहर 12:01 1988 → 2 नवंबर, शाम 4:54 1988· 27 दिन
- तुला2 नवंबर, शाम 4:54 1988 → 21 नवंबर, शाम 4:16 1988· 19 दिन
- वृश्चिक21 नवंबर, शाम 4:16 1988 → 10 दिसंबर, शाम 5:18 1988· 19 दिन
- धनु10 दिसंबर, शाम 5:18 1988 → 29 दिसंबर, शाम 7:19 1988· 19 दिन
- मकर29 दिसंबर, शाम 7:19 1988 → 6 मार्च, शाम 7:21 1989· लगभग 2 महीने
तारीखवार
समय भारतीय मानक समय (IST) में।
जनवरी 1988
6 जनवरीदोपहर 3:08
बुध का मकर में प्रवेश
15 जनवरीदोपहर 1:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 जनवरीसुबह 4:55
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 1988
2 फ़रवरीसुबह 11:47
बुध कुम्भ 4°23′ पर वक्री
5 फ़रवरीसुबह 5:08
बुध अस्त (17 फ़रवरी तक)†
9 फ़रवरीदोपहर 3:13
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
17 फ़रवरीसुबह 4:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 फ़रवरीरात 11:00
बुध मकर 18°59′ पर मार्गी
मार्च 1988
11 मार्चसुबह 10:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 1988
1 अप्रैलसुबह 11:50
बुध का मीन में प्रवेश
6 अप्रैलशाम 7:35
बुध अस्त (3 मई तक)†
17 अप्रैलसुबह 11:43
बुध का मेष में प्रवेश
मई 1988
1 मईशाम 6:30
बुध का वृषभ में प्रवेश
3 मईसुबह 11:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 मईसुबह 5:49
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 1988
1 जूनसुबह 4:12
बुध मिथुन 3°05′ पर वक्री
4 जूनरात 10:24
बुध अस्त (21 जून तक)†
10 जूनरात 11:51
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
21 जूनरात 10:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जूनसुबह 4:10
बुध वृषभ 24°28′ पर मार्गी
जुलाई 1988
6 जुलाईरात 11:10
बुध का मिथुन में प्रवेश
21 जुलाईदोपहर 1:58
बुध अस्त (17 अगस्त तक)†
26 जुलाईरात 1:58
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1988
9 अगस्तदोपहर 3:47
बुध का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तरात 9:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अगस्तरात 8:40
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1988
20 सितंबरशाम 5:14
बुध का तुला में प्रवेश
29 सितंबररात 3:06
बुध तुला 3°22′ पर वक्री
अक्टूबर 1988
5 अक्टूबरशाम 4:15
बुध अस्त (17 अक्टूबर तक)†
6 अक्टूबरदोपहर 12:01
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अक्टूबरशाम 5:32
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अक्टूबरसुबह 10:52
बुध कन्या 17°57′ पर मार्गी
नवंबर 1988
2 नवंबरशाम 4:54
बुध का तुला में प्रवेश
7 नवंबरदोपहर 2:15
बुध अस्त (26 दिसंबर तक)†
21 नवंबरशाम 4:16
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1988
10 दिसंबरशाम 5:18
बुध का धनु में प्रवेश
26 दिसंबरशाम 5:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 दिसंबरशाम 7:19
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1988: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
