पंचांग · गोचर · बुध
1987 में बुध का गोचर
1987 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 13 जनवरी को मकर, 31 जनवरी को कुम्भ, 8 अप्रैल को मीन, 26 अप्रैल को मेष …। वक्री: 18 फ़रवरी, 21 जून, 16 अक्टूबर से।
1987 में बुध किन राशियों में है
- धनु26 दिसंबर, रात 2:33 1986 → 13 जनवरी, रात 11:33 1987· 19 दिन
- मकर13 जनवरी, रात 11:33 1987 → 31 जनवरी, दोपहर 1:08 1987· 18 दिन
- कुम्भ31 जनवरी, दोपहर 1:08 1987 → 8 अप्रैल, रात 8:41 1987· लगभग 2 महीने
- मीन8 अप्रैल, रात 8:41 1987 → 26 अप्रैल, शाम 4:09 1987· 18 दिन
- मेष26 अप्रैल, शाम 4:09 1987 → 11 मई, रात 12:55 1987· 14 दिन
- वृषभ11 मई, रात 12:55 1987 → 26 मई, सुबह 7:14 1987· 15 दिन
- मिथुन26 मई, सुबह 7:14 1987 → 3 अगस्त, दोपहर 12:28 1987· लगभग 2 महीने
- कर्क3 अगस्त, दोपहर 12:28 1987 → 18 अगस्त, रात 11:09 1987· 15 दिन
- सिंह18 अगस्त, रात 11:09 1987 → 4 सितंबर, रात 12:13 1987· 16 दिन
- कन्या4 सितंबर, रात 12:13 1987 → 23 सितंबर, रात 9:25 1987· 20 दिन
- तुला23 सितंबर, रात 9:25 1987 → 29 नवंबर, शाम 5:05 1987· लगभग 2 महीने
- वृश्चिक29 नवंबर, शाम 5:05 1987 → 18 दिसंबर, रात 11:07 1987· 19 दिन
- धनु18 दिसंबर, रात 11:07 1987 → 6 जनवरी, दोपहर 3:08 1988· 19 दिन
तारीखवार
समय भारतीय मानक समय (IST) में।
जनवरी 1987
13 जनवरीरात 11:33
बुध का मकर में प्रवेश
31 जनवरीदोपहर 1:08
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 1987
2 फ़रवरीसुबह 8:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
18 फ़रवरीरात 9:36
बुध कुम्भ 20°50′ पर वक्री
21 फ़रवरीसुबह 9:21
बुध अस्त (6 मार्च तक)†
मार्च 1987
6 मार्चरात 12:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 मार्चरात 2:52
बुध कुम्भ 6°17′ पर मार्गी
अप्रैल 1987
8 अप्रैलरात 8:41
बुध का मीन में प्रवेश
24 अप्रैलदोपहर 12:09
बुध अस्त (19 मई तक)†
26 अप्रैलशाम 4:09
बुध का मेष में प्रवेश
मई 1987
11 मईरात 12:55
बुध का वृषभ में प्रवेश
19 मईरात 9:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईसुबह 7:14
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 1987
21 जूनसुबह 9:13
बुध मिथुन 23°08′ पर वक्री
26 जूनसुबह 6:43
बुध अस्त (12 जुलाई तक)†
जुलाई 1987
12 जुलाईशाम 7:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जुलाईदोपहर 1:21
बुध मिथुन 13°43′ पर मार्गी
अगस्त 1987
3 अगस्तदोपहर 12:28
बुध का कर्क में प्रवेश
6 अगस्तरात 11:30
बुध अस्त (5 सितंबर तक)†
18 अगस्तरात 11:09
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 1987
4 सितंबररात 12:13
बुध का कन्या में प्रवेश
5 सितंबरसुबह 11:19
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 सितंबररात 9:25
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 1987
16 अक्टूबररात 10:15
बुध तुला 19°32′ पर वक्री
22 अक्टूबररात 10:01
बुध अस्त (3 नवंबर तक)†
नवंबर 1987
3 नवंबरसुबह 11:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 नवंबरदोपहर 1:09
बुध तुला 3°43′ पर मार्गी
27 नवंबररात 8:13
बुध अस्त (15 जनवरी तक)†
29 नवंबरशाम 5:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1987
18 दिसंबररात 11:07
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1987: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
