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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

1990 में बुध का गोचर

1990 में बुध 13 बार राशि बदलता है: 4 जनवरी को धनु (वक्री, पीछे की ओर), 7 फ़रवरी को मकर, 28 फ़रवरी को कुम्भ, 17 मार्च को मीन …। वक्री: 23 अप्रैल, 25 अगस्त, 15 दिसंबर से।

1990 में बुध किन राशियों में है

  1. मकर26 दिसंबर, रात 1:37 1989 → 4 जनवरी, रात 10:44 1990· 10 दिन
  2. धनु(वक्री गति से प्रवेश)4 जनवरी, रात 10:44 1990 → 7 फ़रवरी, सुबह 9:56 1990· 33 दिन
  3. मकर7 फ़रवरी, सुबह 9:56 1990 → 28 फ़रवरी, रात 3:52 1990· 21 दिन
  4. कुम्भ28 फ़रवरी, रात 3:52 1990 → 17 मार्च, रात 12:40 1990· 17 दिन
  5. मीन17 मार्च, रात 12:40 1990 → 1 अप्रैल, रात 2:30 1990· 15 दिन
  6. मेष1 अप्रैल, रात 2:30 1990 → 7 जून, रात 10:05 1990· लगभग 2 महीने
  7. वृषभ7 जून, रात 10:05 1990 → 25 जून, रात 3:20 1990· 17 दिन
  8. मिथुन25 जून, रात 3:20 1990 → 9 जुलाई, रात 2:56 1990· 14 दिन
  9. कर्क9 जुलाई, रात 2:56 1990 → 25 जुलाई, दोपहर 1:02 1990· 16 दिन
  10. सिंह25 जुलाई, दोपहर 1:02 1990 → 2 अक्टूबर, सुबह 5:56 1990· लगभग 2 महीने
  11. कन्या2 अक्टूबर, सुबह 5:56 1990 → 19 अक्टूबर, दोपहर 1:44 1990· 17 दिन
  12. तुला19 अक्टूबर, दोपहर 1:44 1990 → 7 नवंबर, रात 3:18 1990· 19 दिन
  13. वृश्चिक7 नवंबर, रात 3:18 1990 → 27 नवंबर, सुबह 11:06 1990· 20 दिन
  14. धनु27 नवंबर, सुबह 11:06 1990 → 3 जनवरी, सुबह 11:00 1991· 37 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 1990

  • 3 जनवरीदोपहर 3:10

    बुध अस्त (14 जनवरी तक)†

  • 4 जनवरीरात 10:44

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 जनवरीशाम 6:33

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 जनवरीसुबह 10:01

    बुध धनु 15°59′ पर मार्गी

फ़रवरी 1990

  • 7 फ़रवरीसुबह 9:56

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीरात 3:52

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 1990

  • 2 मार्चसुबह 6:28

    बुध अस्त (2 अप्रैल तक)†

  • 17 मार्चरात 12:40

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 1990

  • 1 अप्रैलरात 2:30

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 2 अप्रैलसुबह 9:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अप्रैलदोपहर 12:23

    बुध मेष 23°49′ पर वक्री

  • 25 अप्रैलरात 11:08

    बुध अस्त (12 मई तक)†

मई 1990

  • 12 मईरात 2:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 मईसुबह 7:32

    बुध मेष 14°12′ पर मार्गी

जून 1990

  • 7 जूनरात 10:05

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 20 जूनशाम 7:22

    बुध अस्त (15 जुलाई तक)†

  • 25 जूनरात 3:20

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 1990

  • 9 जुलाईरात 2:56

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 15 जुलाईशाम 4:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जुलाईदोपहर 1:02

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 1990

  • 25 अगस्तशाम 7:37

    बुध सिंह 29°51′ पर वक्री

सितंबर 1990

  • 1 सितंबररात 11:21

    बुध अस्त (15 सितंबर तक)†

  • 15 सितंबरसुबह 8:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 सितंबरशाम 5:36

    बुध सिंह 15°52′ पर मार्गी

अक्टूबर 1990

  • 2 अक्टूबरसुबह 5:56

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 3 अक्टूबरदोपहर 12:11

    बुध अस्त (15 नवंबर तक)†

  • 19 अक्टूबरदोपहर 1:44

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 1990

  • 7 नवंबररात 3:18

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 नवंबररात 9:43

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 नवंबरसुबह 11:06

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 1990

  • 15 दिसंबररात 2:38

    बुध धनु 16°17′ पर वक्री

  • 19 दिसंबररात 12:05

    बुध अस्त (29 दिसंबर तक)†

  • 29 दिसंबररात 11:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1990: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और