पंचांग · गोचर · बुध
1999 में बुध का गोचर
1999 में बुध 17 बार राशि बदलता है: 2 जनवरी को धनु, 22 जनवरी को मकर, 9 फ़रवरी को कुम्भ, 26 फ़रवरी को मीन …। वक्री: 10 मार्च, 13 जुलाई, 5 नवंबर से।
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1999 में बुध किन राशियों में है
- वृश्चिक28 अक्टूबर, रात 3:12 1998 → 2 जनवरी, शाम 7:46 1999· लगभग 2 महीने
- धनु2 जनवरी, शाम 7:46 1999 → 22 जनवरी, दोपहर 2:27 1999· 20 दिन
- मकर22 जनवरी, दोपहर 2:27 1999 → 9 फ़रवरी, सुबह 5:59 1999· 18 दिन
- कुम्भ9 फ़रवरी, सुबह 5:59 1999 → 26 फ़रवरी, सुबह 5:11 1999· 17 दिन
- मीन26 फ़रवरी, सुबह 5:11 1999 → 25 मार्च, सुबह 11:05 1999· 27 दिन
- कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)25 मार्च, सुबह 11:05 1999 → 10 अप्रैल, रात 8:23 1999· 16 दिन
- मीन10 अप्रैल, रात 8:23 1999 → 5 मई, सुबह 8:23 1999· 24 दिन
- मेष5 मई, सुबह 8:23 1999 → 21 मई, रात 1:55 1999· 16 दिन
- वृषभ21 मई, रात 1:55 1999 → 3 जून, रात 11:25 1999· 14 दिन
- मिथुन3 जून, रात 11:25 1999 → 21 जून, दोपहर 1:53 1999· 18 दिन
- कर्क21 जून, दोपहर 1:53 1999 → 28 अगस्त, दोपहर 12:15 1999· लगभग 2 महीने
- सिंह28 अगस्त, दोपहर 12:15 1999 → 13 सितंबर, रात 3:25 1999· 16 दिन
- कन्या13 सितंबर, रात 3:25 1999 → 1 अक्टूबर, रात 3:27 1999· 18 दिन
- तुला1 अक्टूबर, रात 3:27 1999 → 23 अक्टूबर, शाम 4:17 1999· 23 दिन
- वृश्चिक23 अक्टूबर, शाम 4:17 1999 → 15 नवंबर, सुबह 8:33 1999· 23 दिन
- तुला(वक्री गति से प्रवेश)15 नवंबर, सुबह 8:33 1999 → 6 दिसंबर, सुबह 8:31 1999· 21 दिन
- वृश्चिक6 दिसंबर, सुबह 8:31 1999 → 27 दिसंबर, सुबह 7:00 1999· 21 दिन
- धनु27 दिसंबर, सुबह 7:00 1999 → 15 जनवरी, सुबह 5:41 2000· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय लंदन के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
जनवरी 1999
2 जनवरीशाम 7:46
बुध का धनु में प्रवेश
11 जनवरीरात 11:25
बुध अस्त (21 फ़रवरी तक)†
22 जनवरीदोपहर 2:27
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 1999
9 फ़रवरीसुबह 5:59
बुध का कुम्भ में प्रवेश
21 फ़रवरीरात 10:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीसुबह 5:11
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 1999
10 मार्चसुबह 9:10
बुध मीन 10°13′ पर वक्री
12 मार्चशाम 4:54
बुध अस्त (26 मार्च तक)†
25 मार्चसुबह 11:05
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 मार्चसुबह 8:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 1999
2 अप्रैलसुबह 10:19
बुध कुम्भ 27°02′ पर मार्गी
10 अप्रैलरात 8:23
बुध का मीन में प्रवेश
मई 1999
5 मईसुबह 8:23
बुध का मेष में प्रवेश
13 मईसुबह 7:16
बुध अस्त (6 जून तक)†
21 मईरात 1:55
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 1999
3 जूनरात 11:25
बुध का मिथुन में प्रवेश
6 जूनरात 9:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 जूनदोपहर 1:53
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 1999
13 जुलाईरात 12:32
बुध कर्क 15°38′ पर वक्री
19 जुलाईरात 3:43
बुध अस्त (3 अगस्त तक)†
अगस्त 1999
3 अगस्तशाम 5:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अगस्तसुबह 4:27
बुध कर्क 4°44′ पर मार्गी
25 अगस्तरात 12:32
बुध अस्त (27 सितंबर तक)†
28 अगस्तदोपहर 12:15
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 1999
13 सितंबररात 3:25
बुध का कन्या में प्रवेश
27 सितंबररात 12:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 1999
1 अक्टूबररात 3:27
बुध का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरशाम 4:17
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 1999
5 नवंबररात 2:58
बुध वृश्चिक 7°53′ पर वक्री
10 नवंबरसुबह 9:50
बुध अस्त (21 नवंबर तक)†
15 नवंबरसुबह 8:33
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
21 नवंबरदोपहर 2:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबररात 3:55
बुध तुला 21°46′ पर मार्गी
दिसंबर 1999
6 दिसंबरसुबह 8:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
21 दिसंबरशाम 4:15
बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†
27 दिसंबरसुबह 7:00
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1999: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
