पंचांग · गोचर · बुध
2001 में बुध का गोचर
2001 में बुध 19 बार राशि बदलता है: 7 जनवरी को मकर, 25 जनवरी को कुम्भ, 13 फ़रवरी को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 12 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 4 फ़रवरी, 4 जून, 2 अक्टूबर से।
सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
2001 में बुध किन राशियों में है
- धनु19 दिसंबर, सुबह 10:22 2000 → 7 जनवरी, रात 2:24 2001· 19 दिन
- मकर7 जनवरी, रात 2:24 2001 → 25 जनवरी, रात 11:43 2001· 19 दिन
- कुम्भ25 जनवरी, रात 11:43 2001 → 13 फ़रवरी, शाम 4:03 2001· 19 दिन
- मकर(वक्री गति से प्रवेश)13 फ़रवरी, शाम 4:03 2001 → 12 मार्च, रात 1:55 2001· 26 दिन
- कुम्भ12 मार्च, रात 1:55 2001 → 2 अप्रैल, रात 10:19 2001· 22 दिन
- मीन2 अप्रैल, रात 10:19 2001 → 19 अप्रैल, रात 3:04 2001· 16 दिन
- मेष19 अप्रैल, रात 3:04 2001 → 3 मई, सुबह 8:20 2001· 14 दिन
- वृषभ3 मई, सुबह 8:20 2001 → 22 मई, शाम 7:33 2001· 19 दिन
- मिथुन22 मई, शाम 7:33 2001 → 19 जून, शाम 4:12 2001· 28 दिन
- वृषभ(वक्री गति से प्रवेश)19 जून, शाम 4:12 2001 → 6 जुलाई, दोपहर 12:04 2001· 17 दिन
- मिथुन6 जुलाई, दोपहर 12:04 2001 → 27 जुलाई, शाम 4:23 2001· 21 दिन
- कर्क27 जुलाई, शाम 4:23 2001 → 11 अगस्त, सुबह 6:39 2001· 15 दिन
- सिंह11 अगस्त, सुबह 6:39 2001 → 28 अगस्त, सुबह 6:08 2001· 17 दिन
- कन्या28 अगस्त, सुबह 6:08 2001 → 20 सितंबर, शाम 4:30 2001· 23 दिन
- तुला20 सितंबर, शाम 4:30 2001 → 11 अक्टूबर, शाम 4:58 2001· 21 दिन
- कन्या(वक्री गति से प्रवेश)11 अक्टूबर, शाम 4:58 2001 → 3 नवंबर, रात 9:00 2001· 23 दिन
- तुला3 नवंबर, रात 9:00 2001 → 23 नवंबर, रात 3:29 2001· 19 दिन
- वृश्चिक23 नवंबर, रात 3:29 2001 → 12 दिसंबर, सुबह 4:31 2001· 19 दिन
- धनु12 दिसंबर, सुबह 4:31 2001 → 31 दिसंबर, रात 3:26 2001· 19 दिन
- मकर31 दिसंबर, रात 3:26 2001 → 8 मार्च, रात 1:49 2002· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
जनवरी 2001
7 जनवरीरात 2:24
बुध का मकर में प्रवेश
17 जनवरीशाम 4:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीरात 11:43
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2001
4 फ़रवरीसुबह 7:42
बुध कुम्भ 6°50′ पर वक्री
7 फ़रवरीरात 12:04
बुध अस्त (19 फ़रवरी तक)†
13 फ़रवरीशाम 4:03
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
19 फ़रवरीरात 1:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीरात 9:26
बुध मकर 21°32′ पर मार्गी
मार्च 2001
12 मार्चरात 1:55
बुध का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2001
2 अप्रैलरात 10:19
बुध का मीन में प्रवेश
9 अप्रैलशाम 5:43
बुध अस्त (6 मई तक)†
19 अप्रैलरात 3:04
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2001
3 मईसुबह 8:20
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 मईरात 3:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 मईशाम 7:33
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2001
4 जूनसुबह 11:06
बुध मिथुन 6°05′ पर वक्री
8 जूनसुबह 9:02
बुध अस्त (25 जून तक)†
19 जूनशाम 4:12
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
25 जूनसुबह 8:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जूनसुबह 11:34
बुध वृषभ 27°23′ पर मार्गी
जुलाई 2001
6 जुलाईदोपहर 12:04
बुध का मिथुन में प्रवेश
24 जुलाईसुबह 6:32
बुध अस्त (20 अगस्त तक)†
27 जुलाईशाम 4:23
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2001
11 अगस्तसुबह 6:39
बुध का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 8:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अगस्तसुबह 6:08
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2001
20 सितंबरशाम 4:30
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2001
2 अक्टूबररात 1:07
बुध तुला 5°49′ पर वक्री
8 अक्टूबरदोपहर 12:26
बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†
11 अक्टूबरशाम 4:58
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
20 अक्टूबरसुबह 11:50
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अक्टूबरसुबह 6:08
बुध कन्या 20°19′ पर मार्गी
नवंबर 2001
3 नवंबररात 9:00
बुध का तुला में प्रवेश
10 नवंबरशाम 6:40
बुध अस्त (30 दिसंबर तक)†
23 नवंबररात 3:29
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2001
12 दिसंबरसुबह 4:31
बुध का धनु में प्रवेश
30 दिसंबररात 12:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 दिसंबररात 3:26
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2001: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
