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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2006 में बुध का गोचर

2006 में बुध 18 बार राशि बदलता है: 19 जनवरी को मकर, 5 फ़रवरी को कुम्भ, 24 फ़रवरी को मीन, 9 मार्च को कुम्भ (वक्री, पीछे की ओर) …। वक्री: 3 मार्च, 5 जुलाई, 29 अक्टूबर से।

2006 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु31 दिसंबर, रात 1:43 2005 → 19 जनवरी, सुबह 9:43 2006· 19 दिन
  2. मकर19 जनवरी, सुबह 9:43 2006 → 5 फ़रवरी, रात 9:51 2006· 18 दिन
  3. कुम्भ5 फ़रवरी, रात 9:51 2006 → 24 फ़रवरी, रात 9:07 2006· 19 दिन
  4. मीन24 फ़रवरी, रात 9:07 2006 → 9 मार्च, दोपहर 1:26 2006· 13 दिन
  5. कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)9 मार्च, दोपहर 1:26 2006 → 11 अप्रैल, शाम 5:19 2006· 33 दिन
  6. मीन11 अप्रैल, शाम 5:19 2006 → 2 मई, सुबह 6:19 2006· 21 दिन
  7. मेष2 मई, सुबह 6:19 2006 → 17 मई, सुबह 7:47 2006· 15 दिन
  8. वृषभ17 मई, सुबह 7:47 2006 → 31 मई, सुबह 11:13 2006· 14 दिन
  9. मिथुन31 मई, सुबह 11:13 2006 → 20 जून, शाम 5:18 2006· 20 दिन
  10. कर्क20 जून, शाम 5:18 2006 → 20 जुलाई, रात 11:49 2006· 30 दिन
  11. मिथुन(वक्री गति से प्रवेश)20 जुलाई, रात 11:49 2006 → 5 अगस्त, शाम 5:00 2006· 16 दिन
  12. कर्क5 अगस्त, शाम 5:00 2006 → 25 अगस्त, रात 12:06 2006· 19 दिन
  13. सिंह25 अगस्त, रात 12:06 2006 → 9 सितंबर, दोपहर 3:40 2006· 16 दिन
  14. कन्या9 सितंबर, दोपहर 3:40 2006 → 28 सितंबर, सुबह 4:28 2006· 19 दिन
  15. तुला28 सितंबर, सुबह 4:28 2006 → 24 अक्टूबर, शाम 5:30 2006· 27 दिन
  16. वृश्चिक24 अक्टूबर, शाम 5:30 2006 → 1 नवंबर, रात 10:51 2006· 8 दिन
  17. तुला(वक्री गति से प्रवेश)1 नवंबर, रात 10:51 2006 → 4 दिसंबर, सुबह 6:35 2006· 32 दिन
  18. वृश्चिक4 दिसंबर, सुबह 6:35 2006 → 24 दिसंबर, सुबह 5:19 2006· 20 दिन
  19. धनु24 दिसंबर, सुबह 5:19 2006 → 11 जनवरी, रात 11:56 2007· 19 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 2006

  • 2 जनवरीशाम 7:58

    बुध अस्त (14 फ़रवरी तक)†

  • 19 जनवरीसुबह 9:43

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2006

  • 5 फ़रवरीरात 9:51

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीशाम 6:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 फ़रवरीरात 9:07

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 2006

  • 3 मार्चरात 1:58

    बुध मीन 2°59′ पर वक्री

  • 5 मार्चसुबह 10:46

    बुध अस्त (18 मार्च तक)†

  • 9 मार्चदोपहर 1:26

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 18 मार्चशाम 4:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मार्चशाम 7:12

    बुध कुम्भ 19°14′ पर मार्गी

अप्रैल 2006

  • 11 अप्रैलशाम 5:19

    बुध का मीन में प्रवेश

मई 2006

  • 2 मईसुबह 6:19

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 6 मईसुबह 8:39

    बुध अस्त (31 मई तक)†

  • 17 मईसुबह 7:47

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 31 मईसुबह 4:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 मईसुबह 11:13

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2006

  • 20 जूनशाम 5:18

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2006

  • 5 जुलाईरात 1:02

    बुध कर्क 7°26′ पर वक्री

  • 10 जुलाईशाम 6:17

    बुध अस्त (26 जुलाई तक)†

  • 20 जुलाईरात 11:49

    बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 जुलाईशाम 5:26

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जुलाईसुबह 6:10

    बुध मिथुन 27°07′ पर मार्गी

अगस्त 2006

  • 5 अगस्तशाम 5:00

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 18 अगस्तसुबह 6:28

    बुध अस्त (18 सितंबर तक)†

  • 25 अगस्तरात 12:06

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2006

  • 9 सितंबरदोपहर 3:40

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबरशाम 7:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 सितंबरसुबह 4:28

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2006

  • 24 अक्टूबरशाम 5:30

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 अक्टूबररात 12:45

    बुध वृश्चिक 1°08′ पर वक्री

नवंबर 2006

  • 1 नवंबररात 10:51

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 3 नवंबरदोपहर 1:55

    बुध अस्त (14 नवंबर तक)†

  • 14 नवंबररात 9:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 नवंबरसुबह 5:55

    बुध तुला 15°07′ पर मार्गी

दिसंबर 2006

  • 4 दिसंबरसुबह 6:35

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 12 दिसंबरदोपहर 3:59

    बुध अस्त (28 जनवरी तक)†

  • 24 दिसंबरसुबह 5:19

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2006: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और