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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2007 में बुध का गोचर

2007 में बुध 14 बार राशि बदलता है: 11 जनवरी को मकर, 29 जनवरी को कुम्भ, 7 अप्रैल को मीन, 24 अप्रैल को मेष …। वक्री: 14 फ़रवरी, 16 जून, 12 अक्टूबर से।

2007 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु24 दिसंबर, सुबह 5:19 2006 → 11 जनवरी, रात 11:56 2007· 19 दिन
  2. मकर11 जनवरी, रात 11:56 2007 → 29 जनवरी, शाम 6:05 2007· 18 दिन
  3. कुम्भ29 जनवरी, शाम 6:05 2007 → 7 अप्रैल, सुबह 8:21 2007· लगभग 2 महीने
  4. मीन7 अप्रैल, सुबह 8:21 2007 → 24 अप्रैल, दोपहर 12:37 2007· 17 दिन
  5. मेष24 अप्रैल, दोपहर 12:37 2007 → 8 मई, शाम 6:20 2007· 14 दिन
  6. वृषभ8 मई, शाम 6:20 2007 → 24 मई, शाम 7:41 2007· 16 दिन
  7. मिथुन24 मई, शाम 7:41 2007 → 1 अगस्त, शाम 5:46 2007· लगभग 2 महीने
  8. कर्क1 अगस्त, शाम 5:46 2007 → 16 अगस्त, शाम 5:26 2007· 15 दिन
  9. सिंह16 अगस्त, शाम 5:26 2007 → 2 सितंबर, रात 12:25 2007· 16 दिन
  10. कन्या2 सितंबर, रात 12:25 2007 → 22 सितंबर, दोपहर 3:50 2007· 21 दिन
  11. तुला22 सितंबर, दोपहर 3:50 2007 → 30 अक्टूबर, शाम 4:12 2007· 38 दिन
  12. कन्या(वक्री गति से प्रवेश)30 अक्टूबर, शाम 4:12 2007 → 4 नवंबर, शाम 6:37 2007· 5 दिन
  13. तुला4 नवंबर, शाम 6:37 2007 → 27 नवंबर, रात 9:20 2007· 23 दिन
  14. वृश्चिक27 नवंबर, रात 9:20 2007 → 17 दिसंबर, रात 12:31 2007· 19 दिन
  15. धनु17 दिसंबर, रात 12:31 2007 → 4 जनवरी, शाम 5:20 2008· 19 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 2007

  • 11 जनवरीरात 11:56

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 28 जनवरीदोपहर 2:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जनवरीशाम 6:05

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 2007

  • 14 फ़रवरीसुबह 10:07

    बुध कुम्भ 16°17′ पर वक्री

  • 16 फ़रवरीरात 11:07

    बुध अस्त (1 मार्च तक)†

मार्च 2007

  • 1 मार्चसुबह 9:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 मार्चसुबह 10:14

    बुध कुम्भ 1°28′ पर मार्गी

अप्रैल 2007

  • 7 अप्रैलसुबह 8:21

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 20 अप्रैलरात 12:43

    बुध अस्त (15 मई तक)†

  • 24 अप्रैलदोपहर 12:37

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2007

  • 8 मईशाम 6:20

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईशाम 5:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 मईशाम 7:41

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2007

  • 16 जूनसुबह 5:09

    बुध मिथुन 17°38′ पर वक्री

  • 20 जूनशाम 6:34

    बुध अस्त (7 जुलाई तक)†

जुलाई 2007

  • 7 जुलाईदोपहर 12:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 जुलाईसुबह 7:45

    बुध मिथुन 8°31′ पर मार्गी

अगस्त 2007

  • 1 अगस्तशाम 5:46

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 2 अगस्तशाम 7:10

    बुध अस्त (31 अगस्त तक)†

  • 16 अगस्तशाम 5:26

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 31 अगस्तदोपहर 2:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

सितंबर 2007

  • 2 सितंबररात 12:25

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबरदोपहर 3:50

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2007

  • 12 अक्टूबरसुबह 9:29

    बुध तुला 15°07′ पर वक्री

  • 18 अक्टूबरदोपहर 1:03

    बुध अस्त (30 अक्टूबर तक)†

  • 30 अक्टूबरसुबह 5:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 अक्टूबरशाम 4:12

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 2007

  • 2 नवंबरसुबह 4:28

    बुध कन्या 29°24′ पर मार्गी

  • 4 नवंबरशाम 6:37

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 22 नवंबरसुबह 11:17

    बुध अस्त (10 जनवरी तक)†

  • 27 नवंबररात 9:20

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2007

  • 17 दिसंबररात 12:31

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2007: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और